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Join NowSpice-1000 Precision Guided Bombs : भारतीय रक्षा गलियारों से एक ऐसी खबर आई है जिसने सीमा पार हलचल तेज कर दी है। रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने हाल ही में भारतीय वायु सेना (IAF) की ताकत को कई गुना बढ़ाने के लिए एक बड़े डिफेंस सौदे को हरी झंडी दिखा दी है। भारत अब इजरायल की दिग्गज कंपनी ‘राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम्स’ से करीब 1,000 स्पाइस-1000 (Spice-1000) प्रिसिजन-गाइडेड बम किट्स खरीदने जा रहा है।
यह सिर्फ एक सौदा नहीं, बल्कि दुश्मन के लिए ‘मौत का वारंट’ है। आखिर क्यों स्पाइस-1000 को दुनिया के सबसे घातक हथियारों में गिना जाता है? आइये समझते हैं इसके पीछे का पूरा विज्ञान और सामरिक महत्व।
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क्या है स्पाइस-1000? साधारण बम को बनाता है ‘सुपर इंटेलिजेंट’
स्पाइस (SPICE – Smart, Precise Impact and Cost-Effective) असल में कोई नया बम नहीं है, बल्कि एक ‘जादुई किट’ है। यह तकनीक हमारे वायुसेना के पास मौजूद साधारण ‘अनगाइडेड’ बमों को एक घातक, सटीक और लंबी दूरी के स्मार्ट हथियार में तब्दील कर देती है।
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इसकी सबसे बड़ी ताकत इसकी स्टैंड-ऑफ रेंज है। स्पाइस-1000 लगने के बाद एक बम हवा में 100 से 125 किलोमीटर तक तैर (Glide) सकता है। इसका मतलब है कि हमारे राफेल या सुखोई विमान को दुश्मन की सीमा में घुसने की जरूरत ही नहीं होगी। हमारे जांबाज पायलट अपने देश की सीमा के भीतर सुरक्षित रहकर दुश्मन के कमांड सेंटर या बंकरों को पलक झपकते ही तबाह कर सकेंगे।
जैमिंग भी बेअसर: ये बम ‘देखता’ भी है और ‘समझता’ भी!
अक्सर युद्ध के दौरान दुश्मन देश जीपीएस (GPS) सिग्नल को जैम या ब्लॉक कर देते हैं ताकि मिसाइलें रास्ता भटक जाएं। लेकिन स्पाइस-1000 के सामने यह चालबाजी नहीं चलेगी। इसमें इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सीन-मैचिंग एल्गोरिदम लगा है। आसान भाषा में कहें तो, हमले से पहले इसमें टारगेट की तस्वीर डाल दी जाती है। हवा में यह बम नीचे की जमीन की तुलना अपनी मेमोरी में सेव फोटो से करता है और बिना किसी बाहरी सिग्नल के सीधा निशाने पर जाकर फटता है। इसकी सटीकता (Accuracy) इतनी जबरदस्त है कि यह 3 मीटर के छोटे से दायरे में भी सटीक वार करता है।
बालाकोट का खौफनाक मंजर याद है?
2019 में जब भारत ने पाकिस्तान के बालाकोट में आतंकी ठिकानों को धुआं-धुआं किया था, तब भारतीय वायुसेना ने इसी स्पाइस परिवार के बड़े भाई स्पाइस-2000 का इस्तेमाल किया था। उस हमले की सफलता ने दुनिया को दिखा दिया था कि भारत अब चुप बैठने वाला देश नहीं है। अब स्पाइस-1000 के आने से हमारी लेयर्ड स्ट्राइक कैपेबिलिटी और मजबूत हो जाएगी।
चीन और पाकिस्तान की टेंशन क्यों बढ़ गई?
वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चीन के साथ जारी तनाव और सीमा पार से जारी प्रायोजित आतंकवाद के बीच, ये 1000 बम भारत को ‘प्रहार’ करने की वो शक्ति देंगे जो किसी भी एयर डिफेंस सिस्टम को धता बता सकती है। भारत का रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) अपना स्वदेशी बम ‘गौरव’ विकसित कर रहा है, लेकिन तत्काल जरूरतों को देखते हुए इजरायली तकनीक को चुना गया है ताकि युद्ध की स्थिति में हम पलड़ा भारी रख सकें।
प्रमुख विशेषताएं (Specifications at a Glance):
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वजन: 500 किलोग्राम क्लास (Mk.83 बमों के लिए सटीक)।
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मारक क्षमता: 125 किमी की ग्लाइड रेंज।
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सटीकता: 3 मीटर से कम (CEP < 3m)।
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तकनीक: GPS-Independent (बिना सैटेलाइट के काम करने में सक्षम)।
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इन विमानों पर होगा तैनात: राफेल, सुखोई Su-30MKI और स्वदेशी तेजस।
भारत और इजरायल के बीच का यह अटूट रक्षा गठबंधन न केवल सैन्य संतुलन को भारत के पक्ष में झुकाता है, बल्कि यह भी संदेश देता है कि भारत अपनी संप्रभुता के लिए दुनिया की सबसे आधुनिक तकनीक अपनाने से पीछे नहीं हटेगा।











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