NCERT Class 8 Judicial Corruption: भारत की शिक्षा प्रणाली और न्यायपालिका के बीच एक अभूतपूर्व टकराव की स्थिति पैदा हो गई है। मामला NCERT (नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग) की कक्षा आठवीं की सामाजिक विज्ञान की नई किताब से जुड़ा है। इस किताब में ‘न्यायिक भ्रष्टाचार’ पर एक पूरा अध्याय शामिल किया गया है, जिस पर अब सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कड़ा संज्ञान लिया है।
CJI सूर्यकांत का कड़ा रुख: “जल्द होगी सुनवाई”
बुधवार (25 फरवरी, 2026) को इस मामले ने तब तूल पकड़ा जब देश के दिग्गज वकील कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने इस मुद्दे को मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत के सामने रखा। मामले की गंभीरता को देखते हुए सीजेआई सूर्यकांत ने आश्वासन दिया कि इस पर जल्द ही विस्तार से सुनवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट लहजे में कहा, “मैंने इस मामले का संज्ञान लिया है। किसी को भी भारतीय न्यायपालिका की छवि खराब करने या उसे बदनाम करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।”
उन्होंने यह भी कहा कि न्यायपालिका के प्रमुख के तौर पर वह अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाएंगे, क्योंकि इस मुद्दे को लेकर पूरे देश के जजों और वकीलों में गहरी चिंता है।
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आखिर NCERT की कक्षा 8 की किताब में ऐसा क्या है?
पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, कक्षा आठवीं की सामाजिक विज्ञान की नई पुस्तक में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ शीर्षक से एक अध्याय जोड़ा गया है। इसमें भारतीय न्यायिक प्रणाली के सामने खड़ी चुनौतियों का जिक्र किया गया है। किताब में लिखा है कि:
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भ्रष्टाचार: न्यायपालिका के विभिन्न स्तरों पर लोगों को भ्रष्टाचार का सामना करना पड़ता है, जिससे विशेषकर गरीबों के लिए न्याय पाना कठिन हो जाता है।
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लंबित मुकदमे: किताब के आंकड़ों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट में 81,000, हाईकोर्ट्स में 62.40 लाख और जिला अदालतों में लगभग 4.70 करोड़ मामले लंबित हैं।
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जजों की कमी: न्यायिक प्रणाली की सुस्त रफ़्तार के पीछे जजों की पर्याप्त संख्या न होना एक बड़ा कारण बताया गया है।
संविधान की मूल संरचना पर हमला?
इस मामले पर जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने बेहद सख्त टिप्पणी की है। उन्होंने एनसीईआरटी के इस कदम को ‘संविधान की मूल संरचना’ (Basic Structure of the Constitution) पर प्रहार बताया है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूली बच्चों के मन में न्यायपालिका के प्रति अविश्वास पैदा करना लोकतंत्र के लिए घातक हो सकता है।
पुराने बनाम नए संस्करण का विवाद
इससे पहले एनसीईआरटी की किताबों में मुख्य रूप से न्यायालयों की संरचना, उनके कार्य और अधिकारों पर ध्यान केंद्रित किया जाता था। लेकिन नए अध्याय में ‘न्याय तक पहुंच’ की व्याख्या करने के साथ-साथ भ्रष्टाचार और जवाबदेही जैसे संवेदनशील मुद्दों को शामिल किया गया है।
किताब में पूर्व मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई (CJI B.R. Gavai) के जुलाई 2025 के उस बयान का भी उल्लेख है, जिसमें उन्होंने कहा था कि न्यायपालिका के भीतर कदाचार की घटनाओं से जनता का भरोसा कम होता है। किताब का तर्क है कि पारदर्शिता और जवाबदेही ही लोकतांत्रिक मूल्यों की पहचान है।
क्या होगा आगे?
सुप्रीम कोर्ट अब यह तय करेगा कि क्या एक शैक्षणिक पुस्तक में न्यायपालिका की कमियों को इस तरह उजागर करना सही है या यह संस्था की गरिमा को ठेस पहुँचाने की कोशिश है। आने वाले दिनों में यह मामला देश की सबसे बड़ी अदालत में चर्चा का विषय रहेगा।

