Bihar Bengal Partition: बीजेपी विधायक रणविजय सिंह एक बयान देते हैं कि जल्द ही बिहार और पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों को काटकर एक नया केंद्र शासित प्रदेश बनाया जाएगा। उनके बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी और सोशल मीडिया पर लोग इस मामले की सच्चाई जानने के लिए प्रयास करने लगे। इसी बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बिहार दौरे पर जाते हैं और लोगों को लगता है शायद रणविजय सिंह ठीक हैं। शायद अमित शाह इसी संदर्भ में बिहार गए हैं और राजनीतिक गलियारों में हलचल मच जाती है।
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क्या है सत्यता :
जब कोई केंद्र शासित राज्य बनता है तो उसके संदर्भ में सदन में एक विधेयक लाना होता है। उसको जब सदन से मंजूरी मिलती है तब ही कोई केंद्रशासित प्रदेश बन सकता है। हालांकि अभी तक इस संदर्भ में न तो कोई विधेयक पास हुआ है और न बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व से ऐसी कोई घोषणा हुई है की वह ऐसा कुछ करने के संदर्भ में विचार कर रहे हैं। या उनकी आगामी समय को लेकर ऐसी योजना है कि वह देश को एक नया केंद्रशासित प्रदेश देंगे।
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बिहार- पश्चिम बंगाल विभाजन से कौन से राज्य होंगे प्रभावित :
अगर भविष्य में कभी ऐसा हुआ और सरकार ने बिहार और पश्चिम बंगाल के कुछ जिलों से एक अन्य राज्य बनाने का प्रयास किया तो बिहार के किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार और पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर, दक्षिण दिनाजपुर, दार्जिलिंग राज्य इसमें शामिल होंगे। बता दें किशनगंज सीधे बंगाल की सीमा से सटा हुआ है। दार्जलिंग भौगोलिक दृष्टि से किशनगंज के पास है। पूर्णिया और कटिहार सीमांचल के अहम जिले हैं। वहीँ उत्तर दिनाजपुर और दक्षिण दिनाजपुर बिहार से जुड़े राज्यों में आते हैं।
किसकी कितनी आबादी :
अगर हम आबादी की दृष्टिकोण से देखें तो किशनगंज में लगभग 68% मुस्लिम, 31% हिंदू हैं। उत्तर दिनाजपुर में 50 फीसदी मुस्लिम और 50 फीसदी हिंदू हैं। दक्षिण दिनाजपुर में 73% हिंदू, 24% मुस्लिम हैं। दार्जिलिंग में हिंदू बौद्ध और ईसाई समुदाय के लोग रहते हैं.हालांकि यहाँ भी हिन्दू आबादी अधिक है।
पूर्णिया में लगभग 60% हिंदू, 38% मुस्लिम वही कटिहार में करीब 68% हिंदू, 31% मुस्लिम आबादी है।

