MP Dalit groom case: दमोह में दलित दूल्हे को घोड़ी से उतारा, जानें क्या है पूरा विवाद और पुलिस का एक्शन?

MP Dalit groom case: शादी का घर हो, बैंड-बाजा बज रहा हो और दूल्हा घोड़ी पर बैठा हो… यह नज़ारा किसी भी परिवार के लिए सबसे बड़ी खुशी का पल होता है। लेकिन सोचिए, अगर इसी बीच कुछ लोग आएं और सिर्फ इसलिए दूल्हे को घोड़ी से उतार कर पीट दें क्योंकि वह एक खास जाति से आता है? सुनने में यह किसी पुरानी फिल्म का सीन लगता है, लेकिन मध्य प्रदेश के दमोह जिले में यह सच में हुआ है। चलिए, आपको आसान और सरल भाषा में समझाते हैं कि आखिर यह पूरा मामला क्या है, विवाद क्यों हुआ और इस पर पुलिस अब क्या कार्रवाई कर रही है।

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क्या है पूरा मामला?

यह घटना दमोह जिले के हटा थाना क्षेत्र में आने वाले बिजौरी पाठक गांव की है। यहां गोलू अहिरवार नाम के एक युवक की शादी थी। 23 वर्षीय गोलू जन्म से ही शारीरिक रूप से विकलांग (दिव्यांग) हैं। उनके परिवार में सालों बाद शादी की शहनाई बज रही थी, इसलिए पूरा घर बहुत खुश था।

बुंदेलखंड इलाके में शादी से पहले एक पुरानी परंपरा होती है, जिसे ‘रछवाई’ कहा जाता है। इसमें दूल्हा शादी से ठीक पहले घोड़ी पर सवार होकर पूरे गांव में निकलता है। गोलू भी 21 अप्रैल को इसी रस्म को निभा रहे थे। बैंड बज रहा था और परिवार वाले खुशी से नाच रहे थे। लेकिन तभी यह खुशी डर और विवाद में बदल गई।

विवाद कैसे शुरू हुआ?

गोलू के परिवार का आरोप है कि गांव के कुछ ऊंची जाति (लोधी समुदाय) के लोगों को यह बात बिल्कुल रास नहीं आई कि एक दलित युवक घोड़ी पर बैठे। गोलू की बहन मनीषा और मां विद्या अहिरवार के मुताबिक, कुछ लोगों ने अचानक अपनी मोटरसाइकिल अड़ाकर उनका रास्ता रोक लिया।

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परिवार का कहना है कि उन लोगों ने जातिसूचक गालियां दीं और कहा कि इस गांव में तुम्हारी जाति का कोई इंसान घोड़ी पर नहीं चढ़ सकता। बात इतनी बढ़ गई कि उन्होंने गोलू को घोड़ी से नीचे खींच लिया और लाठियों से पीटा। जब बीच-बचाव करने के लिए परिवार की महिलाएं आगे आईं, तो उन्हें भी नहीं बख्शा गया।

आरोपियों का इस मामले पर क्या कहना है?

हर कहानी के दो पहलू होते हैं। जिन चार लोगों पर मारपीट का आरोप लगा है, उनमें से तीन एक ही परिवार के हैं। आरोपी पक्ष का दावा है कि यह पूरा मामला झूठा है।

एफआईआर में नामजद एक आरोपी के भतीजे ने बताया कि दलित परिवार के साथ उनका पुराना जमीन का विवाद चल रहा है। उनका कहना है कि उसी पुराने विवाद का बदला लेने के लिए उन्हें ‘घोड़ी से उतारने’ और ‘जातिगत भेदभाव’ के इस झूठे केस में फंसाया जा रहा है।

पुलिस ने क्या एक्शन लिया?

जैसे ही यह मामला हटा पुलिस थाने पहुंचा, पुलिस ने तुरंत एक्शन लिया। दमोह के एसपी (SP) श्रुतकीर्ति सोमवंशी ने बताया कि पुलिस ने एससी-एसटी (SC-ST) एक्ट और अन्य सख्त धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है।

अब तक एक आरोपी को गिरफ्तार किया जा चुका है और बाकी लोगों की तलाश जारी है। पुलिस इस मामले में आरोपियों पर ‘रासुका’ (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) लगाने के लिए कलेक्टर को पत्र भी लिख चुकी है। घटना के बाद परिवार डरा हुआ था, इसलिए गोलू की बाकी की शादी पुलिस की कड़ी सुरक्षा के बीच करवाई गई। एहतियात के तौर पर गांव और गोलू के घर के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।

मध्य प्रदेश में क्यों बढ़ रहे हैं ऐसे मामले?

दुख की बात यह है कि ऐसा मामला कोई पहली बार सामने नहीं आया है। अगर हम एनसीआरबी (NCRB – नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो) की रिपोर्ट देखें, तो साल 2021 से लेकर 2023 तक, अनुसूचित जाति (SC) के खिलाफ होने वाले अपराधों के मामले में मध्य प्रदेश पूरे देश में तीसरे नंबर पर रहा है।

सिर्फ बुंदेलखंड इलाके की ही बात करें तो:

  • साल 2025: टीकमगढ़ जिले के मोकहरा गांव में एक दलित दूल्हे (जितेंद्र अहिरवार) पर घोड़ी चढ़ने को लेकर पथराव किया गया था।

  • दिसंबर 2024: दमोह के ही चौरई गांव में एक दलित दूल्हे की बग्घी में तोड़फोड़ की गई थी और दूल्हे को पीटा गया था।

आज के डिजिटल युग में जहां हम दुनिया भर की तरक्की की बातें कर रहे हैं, वहीं देश के कुछ हिस्सों में आज भी यह तय किया जा रहा है कि घोड़ी पर कौन बैठेगा और कौन नहीं। हालांकि, पुलिस इस मामले में मुस्तैदी से अपना काम कर रही है, लेकिन समाज की इस पुरानी सोच को जड़ से खत्म होने में शायद अभी और वक्त लगेगा।


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