UP Panchayat Chunav: उम्मीदवारों को लगा तगड़ा झटका, निर्वाचन आयोग के इस एक पत्र ने बदली चुनाव की तारीख, अब जून के बाद ही होगा फैसला?

Published On: April 20, 2026
Follow Us
UP Panchayat Chunav: उम्मीदवारों को लगा तगड़ा झटका, निर्वाचन आयोग के इस एक पत्र ने बदली चुनाव की तारीख, अब जून के बाद ही होगा फैसला?

Join WhatsApp

Join Now

UP Panchayat Chunav: उत्तर प्रदेश की राजनीति में ‘पंचायत चुनाव’ का अपना ही एक अलग क्रेज है। गांव की चौपालों से लेकर लखनऊ के गलियारों तक, संभावित उम्मीदवार अपनी तैयारी तेज कर चुके थे। लेकिन, अब उन सभी के लिए एक मायूस कर देने वाली खबर सामने आ रही है। अगर आप भी प्रधानी या जिला पंचायत की रेस में उतरने की तैयारी कर रहे थे, तो फिलहाल आपको थोड़ा और इंतजार करना होगा। ताजा अपडेट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव अब तय समय से देरी से होंगे।

UP Government Schemes for Daughters: उत्तर प्रदेश की बेटियों के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ‘रक्षा कवच’

राज्य निर्वाचन आयोग का वो पत्र, जिसने मचाई हलचल
पंचायत चुनाव में देरी के संकेत कहीं और से नहीं, बल्कि खुद राज्य निर्वाचन आयोग (State Election Commission) के एक आधिकारिक पत्र से मिल रहे हैं। 17 अप्रैल 2026 को जारी इस पत्र ने चुनावी समीकरणों को पूरी तरह से उलझा दिया है। पत्र के अनुसार, निर्वाचन आयोग अभी मतदाताओं की लिस्ट दुरुस्त करने में जुटा है।

तय समय सारिणी के अनुसार, 21 अप्रैल से मतदाताओं के डुप्लीकेशन (एक से ज्यादा जगह नाम होना) और पूरी प्रक्रिया के कंप्यूटरीकरण का काम शुरू होगा, जो 28 मई 2026 तक चलेगा। ध्यान देने वाली बात यह है कि वर्तमान पंचायतों का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो रहा है। इसका सीधा मतलब यह है कि जब कार्यकाल खत्म होगा, तब तक वोटर लिस्ट का काम भी पूरा नहीं हो पाएगा।

10 जून से पहले उम्मीद नहीं!
निर्वाचन आयोग की योजना काफी लंबी है। 28 मई को कंप्यूटरीकरण का काम खत्म होने के बाद, 29 मई से 9 जून 2026 तक मतदान केंद्रों का क्रमांकन, वार्डों की मैपिंग, मतदाता सूची की डाउनलोडिंग और फोटो कॉपियां तैयार करने जैसे तकनीकी काम किए जाएंगे। निर्वाचक नामावलियों (Voter List) का अंतिम प्रकाशन 10 जून 2026 को होगा। जब तक फाइनल वोटर लिस्ट नहीं आ जाती, चुनाव की अधिसूचना जारी होना नामुमकिन है।

पिछड़ा वर्ग आयोग और कानूनी अड़चनें
सिर्फ तकनीकी काम ही चुनाव में देरी की वजह नहीं है। इस बार पेच पिछड़ा वर्ग आयोग (OBC Commission) के गठन को लेकर भी फंसा हुआ है। जब तक आयोग का गठन और सीटों का नए सिरे से आरक्षण तय नहीं हो जाता, तब तक चुनाव प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाएगी। इसके अलावा, इलाहाबाद हाईकोर्ट में भी पंचायत चुनाव को लेकर कुछ याचिकाएं लंबित हैं, जो इस देरी में आग में घी का काम कर रही हैं।

ओम प्रकाश राजभर ने किसे ठहराया जिम्मेदार?
यूपी सरकार के पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने भी पहले ही चुनाव टलने के संकेत दे दिए थे। हालांकि, उन्होंने इस देरी का ठीकरा विपक्ष के सिर फोड़ा है। राजभर का कहना है कि समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों की वजह से कुछ तकनीकी और कानूनी बाधाएं उत्पन्न हुई हैं। वहीं दूसरी ओर, आरजेडी (RJD) जैसी पार्टियां महिला आरक्षण और अन्य मुद्दों पर सरकार को घेर रही हैं, जिससे माहौल और भी गरमा गया है।

उम्मीदवारों के बीच बेचैनी
इस देरी ने उन उम्मीदवारों की नींद उड़ा दी है जो महीनों से गांव-गांव घूमकर प्रचार कर रहे थे। चुनाव टलने का मतलब है—प्रचार का खर्च बढ़ना और जनता के बीच अपनी पकड़ बनाए रखने की चुनौती। अब सबकी निगाहें 10 जून के बाद होने वाले आयोग के फैसले पर टिकी हैं।


Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now