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Join NowPakistan economy crisis: दोस्तों, अगर आप भी अंतरराष्ट्रीय खबरों और पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था (Economy) पर नज़र रखते हैं, तो आपके लिए एक बहुत बड़ी और दिलचस्प खबर है। जब भी पाकिस्तान और कर्ज की बात आती है, तो अमूमन यही खबर आती है कि उसने किसी नए देश से पैसे मांगे हैं। लेकिन इस बार कहानी थोड़ी उल्टी है। पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक (स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान) ने बताया है कि उसने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) का अरबों डॉलर का कर्ज पूरी तरह से चुका दिया है।
सुनने में यह पाकिस्तान के लिए एक अच्छी खबर लगती है। लेकिन क्या सच में ऐसा है? या इसके पीछे एक दोस्त से पैसे लेकर दूसरे को चुकाने वाला पुराना खेल चल रहा है? आइए, इस पूरी खबर को आसान और बोलचाल की भाषा में समझते हैं।
क्या है पूरा मामला? (आंकड़ों की जुबानी)
पाकिस्तान के सरकारी बैंक ‘स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (SBP)’ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक आधिकारिक जानकारी दी है।
बैंक के मुताबिक, गुरुवार 23 अप्रैल को पाकिस्तान ने यूएई के ‘अबू धाबी फंड फॉर डेवलपमेंट’ (ADFD) को 1 अरब अमेरिकी डॉलर (लगभग 83 हजार करोड़ पाकिस्तानी रुपये) वापस कर दिए हैं। स्टेट बैंक ने यह भी बताया कि इससे पहले पिछले ही हफ्ते 2.45 अरब डॉलर की भारी-भरकम रकम भी यूएई को लौटाई गई थी। यानी अगर दोनों किश्तों को मिला दिया जाए, तो पाकिस्तान अब तक यूएई को कुल 3.45 अरब अमेरिकी डॉलर का कर्ज लौटा चुका है और इसी के साथ यूएई का कर्ज पूरी तरह से चुकता हो गया है।
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एक दोस्त को चुकाया, दूसरे से मांगा: सऊदी अरब की एंट्री
अब आप सोच रहे होंगे कि जिस देश की अर्थव्यवस्था इतने गहरे संकट में है, वहां अचानक से यूएई को चुकाने के लिए साढ़े तीन अरब डॉलर कहां से आ गए? यहीं पर असली कहानी शुरू होती है।
दरअसल, जब कोई देश इतना बड़ा कर्ज चुकाता है, तो उसके पास रखे विदेशी डॉलर (विदेशी मुद्रा भंडार) एकदम से कम हो जाते हैं, जिससे देश के दिवालिया होने का खतरा बढ़ जाता है। इस झटके से बचने के लिए पाकिस्तान ने अपने एक और पुराने दोस्त सऊदी अरब का दरवाज़ा खटखटाया है।
पाकिस्तान ने हाल ही में साफ किया है कि यूएई को पैसे लौटाने के बाद, अब वह अपने विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) को स्थिर रखने के लिए सऊदी अरब से 3 अरब डॉलर की नई जमा राशि (Deposit) लेगा। आसान शब्दों में कहें तो, यह कुछ वैसा ही है जैसे आप अपने एक दोस्त का उधार चुकाने के लिए दूसरे दोस्त से पैसे मांग लें।
क्या पाकिस्तान और यूएई के रिश्तों में दरार आ गई है?
इस पूरी खबर के सामने आने के बाद कूटनीतिक गलियारों में एक नई बहस छिड़ गई है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या पाकिस्तान और यूएई के रिश्तों में सब कुछ ठीक है?
अक्सर जब पाकिस्तान खाड़ी देशों (गल्फ कंट्रीज) से पैसे लेता है, तो चुकाने का समय आने पर वह उस कर्ज की मियाद (Rollover) बढ़वा लेता है। यानी वह कहता है कि “अभी पैसे नहीं हैं, कुछ साल बाद दे दूंगा”, और यूएई या सऊदी अरब मान जाते हैं।
लेकिन इस बार कर्ज की मियाद नहीं बढ़ाई गई, बल्कि पाकिस्तान को पैसे लौटाने पड़े। एक्सपर्ट्स का मानना है कि कर्ज का वापस किया जाना इस बात का संकेत हो सकता है कि यूएई ने इस बार कर्ज को ‘रोलओवर’ करने यानी आगे बढ़ाने से साफ मना कर दिया हो। अगर ऐसा है, तो यह कूटनीतिक स्तर पर पाकिस्तान के लिए एक चिंता का विषय है।
आम भाषा में समझें: क्या होता है ‘डिपॉजिट’ और विदेशी मुद्रा भंडार?
अगर आपको इकॉनमी की भाषा थोड़ी भारी लगती है, तो इसे एक उदाहरण से समझें।
किसी भी देश को विदेशों से सामान (जैसे पेट्रोल, मशीनें, दवाइयां) खरीदने के लिए डॉलर की जरूरत होती है। इसे ‘विदेशी मुद्रा भंडार’ कहते हैं।
जब पाकिस्तान का खजाना खाली होने लगता है, तो सऊदी अरब या यूएई जैसे देश पाकिस्तान के बैंक में कुछ अरब डॉलर ‘डिपॉजिट’ यानी जमा कर देते हैं। शर्त यह होती है कि पाकिस्तान इस पैसे को खर्च नहीं कर सकता, बस अपने खाते में दिखाकर दुनिया (और IMF) को यह भरोसा दिला सकता है कि “देखो, हमारे पास पैसा है, हम दिवालिया नहीं हुए हैं।”
पाकिस्तान ने भले ही यूएई का कर्ज चुका कर अपना खाता साफ कर लिया हो, लेकिन सऊदी अरब से दोबारा 3 अरब डॉलर मांगने की नौबत दिखाती है कि उसकी आर्थिक सेहत में कोई जादुई सुधार नहीं आया है। साथ ही, यूएई को पैसे लौटाने की जल्दबाजी (या दबाव) ने दोनों देशों के रिश्तों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सऊदी अरब से यह नया फंड कितनी जल्दी पाकिस्तान के खाते में पहुंचता है।










