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Join NowShivraj Singh Chouhan: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ आज एक ऐतिहासिक गवाह बनी, जब केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की गरिमामयी उपस्थिति में ‘क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन (उत्तर क्षेत्र)’ का शानदार आगाज़ हुआ। यह सम्मेलन केवल मंत्रियों की बैठक भर नहीं है, बल्कि देश के ‘अन्नदाता’ के जीवन में एक क्रांतिकारी बदलाव लाने की दिशा में उठाया गया एक बहुत बड़ा कदम माना जा रहा है।
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अन्नदाताओं के लिए उम्मीदों की नई किरण
समारोह के दौरान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार का मुख्य लक्ष्य किसानों की आय को दोगुना करना और खेती को आधुनिक तकनीक से जोड़ना है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि जब तक देश का किसान समृद्ध नहीं होगा, तब तक भारत के विकसित राष्ट्र बनने का सपना पूरा नहीं हो सकता। लखनऊ में आयोजित इस क्षेत्रीय सम्मेलन में उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों के कृषि मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने शिरकत की, ताकि खेती-किसानी से जुड़ी जमीनी समस्याओं का ठोस समाधान निकाला जा सके।
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लखनऊ बना कृषि नीति का केंद्र
इस सम्मेलन में भाग लेने पहुंचे विभिन्न राज्यों के मंत्रियों का गर्मजोशी से स्वागत किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य उत्तर भारत की विशिष्ट भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप कृषि नीतियों को तैयार करना है। इसमें सिंचाई, बीज की गुणवत्ता, खाद की उपलब्धता और फसलों के उचित दाम (MSP) जैसे संवेदनशील मुद्दों पर गहन चर्चा की गई।
यह सम्मेलन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उत्तर भारत को भारत का ‘अन्न भंडार’ कहा जाता है। यहाँ लिए गए निर्णय सीधे तौर पर करोड़ों किसानों के बैंक खातों और उनके जीवन स्तर को प्रभावित करेंगे। शिवराज सिंह चौहान, जिन्हें अक्सर किसानों के बीच ‘मामा’ के रूप में जाना जाता है, उन्होंने विश्वास दिलाया कि मोदी सरकार की नीतियां हर छोटे-बड़े किसान तक बिना किसी बाधा के पहुँचेंगी।
सकारात्मक परिवर्तन की ओर बढ़ते कदम
सम्मेलन के दौरान यह बात उभरकर सामने आई कि अब पारंपरिक खेती के साथ-साथ ‘स्मार्ट फार्मिंग’ और ‘डिजिटल एग्रीकल्चर’ को बढ़ावा देना समय की मांग है। सरकार का पूरा ध्यान इस बात पर है कि कैसे किसानों की लागत को कम किया जाए और उत्पादन को बढ़ाया जाए। इस सम्मेलन की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि यहाँ तय किए गए रोडमैप को कितनी जल्दी धरातल पर उतारा जाता है।
विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों ने भी अपने-अपने राज्यों की ‘बेस्ट प्रैक्टिसेज’ साझा कीं, ताकि एक राज्य की सफल तकनीक का लाभ दूसरे राज्य के किसान भी उठा सकें। निश्चित रूप से, लखनऊ की इस धरती से शुरू हुआ यह मंथन आने वाले समय में खेती के क्षेत्र में सुखद परिणाम लेकर आएगा।










