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Join NowAriha Shah case update: जरा सोचिए, एक मासूम बच्ची जो अपने माता-पिता की गोद में होनी चाहिए थी, वह पिछले 3 साल और 4 महीनों से एक अनजान देश की ‘फोस्टर केयर’ (Foster Care) में अपनी पहचान तलाश रही है। हम बात कर रहे हैं अरिहा शाह की, जो जर्मनी में एक ऐसी कानूनी जंग के बीच फंसी है, जिसने पूरे भारत की संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है।
सोमवार, 12 जनवरी 2026 को भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने इस मामले पर एक ऐसा बयान दिया है, जिससे न्याय की उम्मीदें एक बार फिर जाग उठी हैं। गांधीनगर में आयोजित एक प्रेस ब्रीफिंग में उन्होंने साफ किया कि भारत अब इस मामले को सिर्फ कागजों या कानूनी दांव-पेंचों तक सीमित नहीं रखेगा।
कानून नहीं, अब बात ‘इंसानियत’ की होगी
विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बड़े ही भावुक शब्दों में कहा कि बेबी अरिहा शाह का मामला केवल दो देशों के बीच का कानूनी विवाद नहीं है, बल्कि यह एक मानवीय मुद्दा (Humanitarian Issue) है। भारत सरकार का मानना है कि एक बच्ची को उसकी संस्कृति, उसके माता-पिता और उसकी जड़ों से दूर रखना उसके अधिकारों का उल्लंघन है।
मिस्री ने जोर देकर कहा, “हम अरिहा के परिवार की तकलीफ और उनके उस असहनीय दर्द को समझते हैं, जिससे वे पिछले 40 महीनों से गुजर रहे हैं। भारत सरकार इस मुश्किल घड़ी में पीड़ित परिवार के साथ चट्टान की तरह खड़ी है और उन्हें हर संभव मदद दी जा रही है।”
जर्मनी से लगातार संपर्क: क्या झुकेगी बर्लिन सरकार?
भारत की ओर से कूटनीतिक दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। विदेश सचिव ने बताया कि नई दिल्ली और बर्लिन दोनों ही स्तरों पर जर्मन अधिकारियों के साथ बातचीत का सिलसिला जारी है। भारत सरकार लगातार जर्मनी के दूतावास और वहां की संबंधित एजेंसियों के संपर्क में है ताकि अरिहा की जल्द से जल्द सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की जा सके।
जर्मनी में भी ‘हिंदुस्तानी’ बनी रहेगी अरिहा!
इस पूरे मामले में सबसे बड़ी चिंता यह है कि इतने लंबे समय तक विदेशी माहौल में रहने के कारण कहीं अरिहा अपनी भारतीय संस्कृति को न भूल जाए। इस पर विक्रम मिस्री ने एक बहुत ही सकारात्मक जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि भारत सरकार यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही है कि जर्मनी में रहते हुए भी अरिहा का पालन-पोषण भारतीय परिवेश में हो।
इसके लिए सरकार दो स्तरों पर काम कर रही है:
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अरिहा को जर्मनी में आयोजित होने वाले भारतीय त्योहारों में शामिल करने का प्रयास किया जा रहा है।
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उसे भारतीय लोगों से बातचीत करने और अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़े रहने के अवसर प्रदान किए जा रहे हैं।
क्या है अरिहा शाह का पूरा मामला?
जो लोग नहीं जानते, उन्हें बता दें कि बेबी अरिहा शाह पिछले 40 महीनों से जर्मनी की फोस्टर केयर में है। उसे उसके माता-पिता से अलग कर दिया गया था, जिसके बाद से भारत सरकार उसे वापस लाने के लिए कूटनीतिक और कानूनी लड़ाई लड़ रही है। यह मामला भारत और जर्मनी के द्विपक्षीय संबंधों के बीच एक संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है। विक्रम मिस्री का यह ताजा बयान संकेत देता है कि भारत अब इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर और भी मजबूती से उठाने वाला है। 40 महीनों का लंबा इंतजार अब खत्म होना चाहिए और ‘भारत की बेटी’ को उसके असली घर वापस आना चाहिए। क्या जर्मनी भारत की इस मानवीय अपील को स्वीकार करेगा? पूरा देश इसी उम्मीद में बैठा है।










