Nishikant Dubey: क्यों ओम बिरला के खिलाफ है विपक्ष? •

Nishikant Dubey: भारतीय राजनीति के गलियारों में हलचल तब और बढ़ गई जब लोकसभा में भाजपा सांसद श्री निशिकांत दुबे ने सीधे तौर पर गांधी परिवार पर कड़ा प्रहार किया। उनके इस भाषण ने न केवल संसद के भीतर शोर मचाया, बल्कि सोशल मीडिया पर भी एक नई बहस छेड़ दी है।

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“पीएम इन वेटिंग” का तमगा और राजशाही मानसिकता
निशिकांत दुबे ने अपने संबोधन में एक बहुत ही गहरी चोट की। उन्होंने कहा कि गांधी परिवार की मानसिकता आज भी लोकतंत्र से ज्यादा राजशाही से प्रेरित लगती है। दुबे के अनुसार, “इस परिवार में जो भी जन्म लेता है, उसे यह गलतफहमी हो जाती है कि वह राजनीति की सीढ़ियां चढ़ने के लिए नहीं, बल्कि सीधे प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठने के लिए पैदा हुआ है।” उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि उनके लिए ‘लीडर ऑफ अपोजिशन’ (LOP) का पद भी छोटा है, वे खुद को हमेशा ‘Prime Minister in Waiting’ समझते हैं।

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संवैधानिक संस्थाओं पर कब्जे की चाहत?
निशिकांत दुबे ने गांधी परिवार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस परिवार को लगता है कि देश के जितने भी बड़े और संवैधानिक पद हैं, उन पर किसे बिठाना है, यह तय करने का ‘दैवीय अधिकार’ सिर्फ उन्हीं के पास है। जब सत्ता उनके हाथ से फिसल गई, तो उनकी यह सोच अब ‘छटपटाहट’ में बदल चुकी है। पिछले 12 सालों से सत्ता से बाहर रहने का दर्द अब उनके व्यवहार में साफ झलक रहा है।

ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव: रणनीति या हताशा?
स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर बोलते हुए निशिकांत दुबे ने इसे पूरी तरह से ‘राजनीतिक हताशा’ करार दिया। उन्होंने तर्क दिया कि चूंकि गांधी परिवार अपनी मर्जी से चीजें नहीं चला पा रहा है, इसलिए वे अब उन संस्थाओं और व्यक्तियों को निशाना बना रहे हैं जो निष्पक्षता से सदन चला रहे हैं। यह अविश्वास प्रस्ताव किसी नीति के खिलाफ नहीं, बल्कि उस ‘अहंकार’ की उपज है जो 12 साल से सत्ता न मिल पाने के कारण टूट रहा है।

लोकतंत्र बनाम परिवारवाद
निशिकांत दुबे का यह भाषण सीधे तौर पर भारतीय राजनीति में ‘परिवारवाद’ बनाम ‘योग्यता’ की लड़ाई को दर्शाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश अब बदल चुका है और वह किसी एक परिवार की जागीर नहीं है। जनता अब काम और रिपोर्ट कार्ड के आधार पर नेता चुनती है, न कि सरनेम के आधार पर।

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