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Join NowUP Voter List Revision 2026: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर से बड़ा उबाल आ गया है। इस बार मुद्दा कोई नया कानून या गठबंधन नहीं, बल्कि लोकतंत्र की सबसे बुनियादी ताकत यानी ‘वोटर लिस्ट’ है। उत्तर प्रदेश में हाल ही में संपन्न हुई मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) की प्रक्रिया के बाद जो आंकड़े सामने आए हैं, उन्होंने न सिर्फ सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है, बल्कि विपक्षी दलों को सरकार और चुनाव आयोग को कटघरे में खड़ा करने का मौका दे दिया है।
2.89 करोड़ वोटरों के नाम कटे: क्या है पूरा मामला?
यूपी में जारी की गई मतदाता सूची की नई ड्राफ्ट लिस्ट के अनुसार, राज्य में कुल 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम काट दिए गए हैं। पुनरीक्षण प्रक्रिया से पहले उत्तर प्रदेश में कुल 15.44 करोड़ पंजीकृत मतदाता थे, जो अब घटकर 12.55 करोड़ रह गए हैं। चुनाव आयोग की इस ‘सफाई’ प्रक्रिया के बाद अब सबसे बड़ा सवाल उन जिलों को लेकर उठ रहा है, जहां नामों की कटौती का प्रतिशत औसत से कहीं ज्यादा है।
मुस्लिम बाहुल्य जिलों पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’?
सियासी सरगर्मी बढ़ने की सबसे बड़ी वजह यह है कि जिन जिलों में सबसे ज्यादा नाम काटे गए हैं, उनमें सहारनपुर, मुरादाबाद और रामपुर जैसे मुस्लिम बाहुल्य जिले शामिल हैं। इन इलाकों में 15 से 19 प्रतिशत तक वोटरों के नाम कम हुए हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि यह महज एक प्रक्रिया नहीं बल्कि एक सोची-समझी ‘चुनावी रणनीति’ हो सकती है। आइए देखते हैं उन 5 प्रमुख जिलों का डेटा, जहाँ वोटरों की संख्या में भारी गिरावट आई है:
1. मुरादाबाद (Moradabad)
यहाँ 15.76% वोटरों के नाम लिस्ट से बाहर हो गए हैं। कुल 3,87,628 मतदाताओं के नाम कटे हैं। आपको बता दें कि यहाँ 6 विधानसभा सीटें हैं, जिनमें से 2022 में बीजेपी सिर्फ 1 सीट जीत पाई थी।
2. सहारनपुर (Saharanpur)
इस जिले में 16.37% की कमी आई है, यानी कुल 4,32,539 वोटर कम हुए हैं। यहाँ की 7 सीटों में से बीजेपी के पास फिलहाल 5 सीटें हैं।
3. मुजफ्फरनगर (Muzaffarnagar)
जाट और मुस्लिम आबादी वाले इस जिले में 16.29% (3,44,222) वोट कम हुए हैं। यहाँ की 6 सीटों पर इंडिया गठबंधन और बीजेपी के बीच कड़ी टक्कर रहती है।
4. रामपुर (Rampur)
आज़म खान का गढ़ कहे जाने वाले रामपुर में रिकॉर्ड 18.29% वोट काट दिए गए हैं। कुल 3,21,572 मतदाताओं के नाम लिस्ट से गायब हैं।
5. संभल (Sambhal)
संभल में भी 18.29% की कटौती देखी गई है, जहाँ 3,18,615 वोट कम हुए हैं। यहाँ की 4 सीटों में से 3 पर समाजवादी पार्टी का कब्जा है।
अखिलेश यादव ने उठाए गंभीर सवाल
समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने इस लिस्ट के जारी होते ही मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने चुनाव आयोग से इस मामले का तुरंत संज्ञान लेने की मांग की है। सपा का आरोप है कि मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में जानबूझकर वैध वोटरों के नाम काटे गए हैं ताकि आने वाले चुनावों के परिणामों को प्रभावित किया जा सके। अखिलेश यादव ने साफ कहा है कि जो वैध वोटर हैं, उन्हें दोबारा लिस्ट में शामिल किया जाना चाहिए ताकि लोकतंत्र की मर्यादा बनी रहे।
आगे क्या होगा?
2.89 करोड़ वोटरों का कम होना कोई छोटी घटना नहीं है। चुनाव आयोग का तर्क है कि यह प्रक्रिया ‘मृत’, ‘डुप्लीकेट’ और ‘शिफ्टेड’ वोटरों को हटाने के लिए की गई थी ताकि फर्जी वोटिंग को रोका जा सके। लेकिन, जिस तरह से विशेष क्षेत्रों में यह आंकड़े उभरे हैं, उसने 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यूपी में एक नया सियासी युद्ध छेड़ दिया है। अगर आप भी यूपी के निवासी हैं, तो तुरंत अपना नाम वोटर लिस्ट में चेक करें। कहीं ऐसा न हो कि अगले चुनाव में आप अपने लोकतांत्रिक अधिकार से वंचित रह जाएं।











