Donald Trump: वैश्विक राजनीति में एक ऐसा मोड़ आ गया है जिसकी कल्पना शायद ही किसी ने की थी। पाकिस्तान में चल रही अमेरिका और ईरान के बीच की ‘शांति वार्ता’ के पटरी से उतरते ही, डोनाल्ड ट्रंप का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। अब ट्रंप ने कोई कूटनीतिक चेतावनी नहीं, बल्कि एक सीधी और खौफनाक धमकी दी है. अमेरिका खुद ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) को बंद करेगा।
यह खबर इसलिए चौंकाने वाली है क्योंकि अब तक दुनिया जानती थी कि ईरान इस रास्ते को बंद करने की धमकी देता था और अमेरिका इसे खुलवाने के लिए दबाव डालता था। लेकिन अब बाजी पलट चुकी है। ट्रंप ने संकेत दिया है कि अगर ईरान नहीं सुधरा, तो अमेरिका खुद उस ‘लाइफलाइन’ को जाम कर देगा जहाँ से दुनिया का एक-तिहाई तेल गुजरता है।
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ईरान की अर्थव्यवस्था पर सीधा प्रहार
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ईरान के लिए सिर्फ एक समुद्री रास्ता नहीं, बल्कि उसकी अर्थव्यवस्था की ऑक्सीजन है। तेहरान का ज्यादातर तेल यहीं से होकर वैश्विक बाजारों में पहुंचता है। ट्रंप अच्छी तरह जानते हैं कि अगर यह रास्ता बंद हुआ, तो ईरान की कमाई का मुख्य जरिया खत्म हो जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह दांव ईरान के उन 4 प्रमुख बंदरगाहों को पूरी तरह ठप कर सकता है जो उसकी ताकत हैं:
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खर्ग (खार्क) द्वीप: जहाँ से सबसे ज्यादा तेल एक्सपोर्ट होता है।
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जास्क टर्मिनल: ईरान का रणनीतिक आउटलेट।
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बंदर अब्बास: व्यापार का मुख्य केंद्र।
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बंदर खुमैनी: सप्लाई चेन की अहम कड़ी।
तेल की कीमतों में ‘आग’ लगने का डर
ग्लोबल शिपिंग इंडस्ट्री इस समय दहशत में है। पाकिस्तान में मीटिंग फेल होने की खबर आते ही कच्चे तेल की कीमतें पहले ही 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा चुकी हैं। अगर ट्रंप अपनी धमकी पर अमल करते हैं और ईरानी जहाजों पर नाकाबंदी शुरू होती है, तो यह आंकड़ा कहां जाकर रुकेगा, कोई नहीं जानता।
अभी तक अमेरिकी नौसेना ने ईरानी टैंकरों को थोड़ी ढील दे रखी थी ताकि ग्लोबल मार्केट में तेल की कमी न हो और कीमतें कंट्रोल में रहें। यहाँ तक कि मार्च में अमेरिका ने ईरान को 140 मिलियन बैरल तेल बेचने के लिए एक अस्थायी लाइसेंस भी दिया था। लेकिन अब ट्रंप इस नीति को पूरी तरह बदलने के मूड में हैं।
युद्ध के फंड पर चोट की तैयारी
CNN की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान मार्च तक रोजाना औसतन 18 लाख बैरल कच्चे तेल का निर्यात करने में सफल रहा है। इस तेल से मिलने वाले अरबों डॉलर का इस्तेमाल ईरान अपनी सरकार चलाने और सैन्य अभियानों के लिए कर रहा है। ट्रंप का मकसद साफ है—होर्मुज को बंद करके ईरान के ‘वॉर चेस्ट’ (युद्ध कोष) को खाली कर देना।
हालांकि, इस लड़ाई में दुनिया को भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है। यूएई (UAE) और ओमान जैसे देशों के तेल निर्यात में भी दिक्कतें आ सकती हैं। अगर दुनिया की सबसे बड़ी इकोनॉमी खुद दुनिया के सबसे बड़े तेल मार्ग को बंद करने पर आमादा हो जाए, तो आने वाले दिन पेट्रोल-डीजल की किल्लत और भारी मंदी के संकेत दे रहे हैं।
क्या टल पाएगा यह संकट?
अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या ईरान झुकता है या ट्रंप अपनी इस धमकी को हकीकत में बदलते हैं। एक बात तो साफ है, पाकिस्तान में शांति वार्ता का फेल होना किसी बड़े वैश्विक तूफान की आहट है।

