Pushkar Singh Dhami: धामी सरकार का वो डिजिटल मास्टरस्ट्रोक, जिससे सात समंदर पार भी चमकेगा उत्तराखंड के बच्चों का नाम

Pushkar Singh Dhami: उत्तराखंड की शांत वादियों में अब एक नई गूंज सुनाई दे रही है. विकास और पारदर्शिता की गूंज। राज्य के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने देवभूमि के उन हाथों को मजबूती देने का बीड़ा उठाया है, जो राज्य की नींव रखते हैं। हम बात कर रहे हैं हमारे प्रदेश के मेहनतकश श्रमिकों की। लंबे समय से उत्तराखंड के श्रमिक वर्ग को जिन चुनौतियों का सामना करना पड़ता था, धामी सरकार ने उन्हें न केवल समझा है, बल्कि डिजिटल समाधानों के जरिए उन्हें जड़ से खत्म करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं।

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बिचौलियों का अंत: डिजिटल पारदर्शिता और ‘श्रमिक सेवा मोबाइल ऐप’
पुराने समय में सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्ति तक पहुँचते-पूँछते दम तोड़ देता था। लेकिन मुख्यमंत्री धामी ने इस समस्या का समाधान ‘डिजिटल उत्तराखंड’ के रूप में दिया है। ‘श्रमिक सेवा मोबाइल ऐप’ की शुरुआत एक ऐसी पहल है जिसने पूरी व्यवस्था को पारदर्शी बना दिया है। अब श्रमिकों को दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ते और न ही किसी बिचौलिए की खुशामद करनी पड़ती है। एक क्लिक पर सारी जानकारी और सुविधाएं उनके फोन पर उपलब्ध हैं। यह कदम भ्रष्टाचार के खिलाफ धामी सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का जीता-जागता उदाहरण है।

डीबीटी (DBT): सीधा अधिकार, सीधे खाते में
श्रमिकों के हक की पाई-पाई अब सीधे उनके बैंक खातों में पहुँच रही है। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए मिलने वाली आर्थिक सहायता ने यह सुनिश्चित किया है कि सरकारी खजाने से निकला पैसा बिना किसी कटौती के सीधे लाभार्थी के पास पहुँचे। इससे न केवल श्रमिकों का आर्थिक मनोबल बढ़ा है, बल्कि उन्हें यह अहसास भी हुआ है कि उनकी सरकार उनके साथ हर कदम पर खड़ी है।

बच्चों का भविष्य: पहाड़ से विदेश तक के रास्ते
धामी सरकार की दूरगामी सोच केवल वर्तमान तक सीमित नहीं है। सरकार श्रमिकों के बच्चों के भविष्य को लेकर बेहद संजीदा है। आज पहाड़ के बच्चों के लिए देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी बेहतर शिक्षा और रोजगार के अवसर तलाशने में सरकार मदद कर रही है। धामी जी का मानना है कि यदि श्रमिक का बच्चा शिक्षित और कुशल होगा, तो पूरा राज्य तरक्की करेगा। शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में किए जा रहे ये प्रयास आने वाले समय में उत्तराखंड को एक ‘ग्लोबल हब’ के रूप में स्थापित करेंगे।

पलायन को मजबूरी नहीं, विकल्प बनाना है
उत्तराखंड की सबसे बड़ी चुनौती रही है ‘पलायन’। रोजगार की तलाश में पहाड़ खाली हो रहे थे, लेकिन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस ‘पलायन’ के दर्द को कम करने के लिए स्थानीय स्तर पर ही स्वरोजगार और श्रमिक कल्याण की योजनाओं का जाल बिछा दिया है। सरकार का स्पष्ट संकल्प है—पहाड़ की जवानी को पहाड़ के काम लाना। जब गांव-गांव में सुविधाएं होंगी, हाथ में मोबाइल ऐप और खाते में सीधे पैसे होंगे, तो पलायन मजबूरी नहीं बल्कि एक विकल्प मात्र रह जाएगा। सुशासन (Good Governance) केवल बातों से नहीं, बल्कि ठोस कार्यों से दिखता है। उत्तराखंड की भाजपा सरकार ने अपनी नीतियों से यह साबित कर दिया है कि वह अंत्योदय के मंत्र पर चल रही है, जहाँ पंक्ति के अंतिम व्यक्ति को भी गरिमापूर्ण जीवन जीने का अधिकार है।

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