Divyangjan Marriage: अब दिव्यांगों का भी बसेगा खुशहाल घर, शादी पर सरकार देगी ₹2.50 लाख का ‘आशीर्वाद’

Divyangjan Marriage: समाज में हर इंसान का हक है कि उसका जीवन सामान्य तरीके से बीते, उसे प्यार मिले और उसका अपना एक घर हो। अक्सर दिव्यांगजनों को समाज की मुख्यधारा में जुड़ने के लिए कई संघर्षों का सामना करना पड़ता है। लेकिन अब, उन बाधाओं को दूर करने और दिव्यांगों के सपनों को पंख देने के लिए सरकार ने एक बेहद संवेदनशील और क्रांतिकारी कदम उठाया है।

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सरकार ने निर्णय लिया है कि अब दिव्यांगजनों के विवाह के लिए प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। यह पहल न केवल उन्हें आर्थिक संबल प्रदान करेगी, बल्कि समाज में उनके प्रति बनी पुरानी और रूढ़िवादी सोच को भी बदलने का काम करेगी।

लाखों की आर्थिक मदद: समझिए किसे और कितना मिलेगा पैसा?

सरकार द्वारा जारी किए गए नए आदेशों के मुताबिक, इस योजना के तहत प्रोत्साहन राशि को दो श्रेणियों में बांटा गया है:

  1. दिव्यांग और सामान्य व्यक्ति का विवाह: यदि कोई दिव्यांग व्यक्ति किसी सामान्य व्यक्ति (Non-disabled) से शादी करता है, तो सरकार उस जोड़े को 1.50 लाख रुपये की आर्थिक मदद प्रदान करेगी।

  2. दोनों ही दिव्यांग हों: यदि पति और पत्नी दोनों ही दिव्यांग हैं, तो उन्हें सरकार की ओर से 2.50 लाख रुपये की बड़ी प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।

यह पूरी राशि पति-पत्नी के संयुक्त बैंक खाते (Joint Account) में सीधे डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के जरिए भेजी जाएगी।

भविष्य के लिए सुरक्षा का सुरक्षा चक्र (50% FD का नियम)

सरकार ने केवल शादी तक ही मदद नहीं सोची है, बल्कि दंपती के भविष्य को भी सुरक्षित करने का प्रबंध किया है। आदेश के अनुसार, मिली हुई राशि में से 50 प्रतिशत रकम को 5 साल के लिए एफडी (Fixed Deposit) के रूप में रखना अनिवार्य होगा। इसका उद्देश्य यह है कि विवाह के शुरुआती वर्षों के बाद भी दंपती के पास एक सुरक्षित आर्थिक बैकअप रहे।

तुकाराम मुंढे की विशेष पहल: बदल रही है समाज की सोच

दिव्यांग कल्याण विभाग के सचिव तुकाराम मुंढे ने बताया कि अक्सर दिव्यांगजनों के विवाह के फैसलों को परिवार और समाज द्वारा टाल दिया जाता है या उन्हें मजबूरी मानकर असंगत जोड़ियां तय कर दी जाती हैं। विशेष रूप से दिव्यांग महिलाओं को समाज में दोहरी चुनौतियों और भेदभाव का सामना करना पड़ता है। इसी असमानता को खत्म करने और उन्हें सम्मानजनक जीवन देने के लिए इस ‘दिव्यांग-सामान्य विवाह प्रोत्साहन योजना’ में बड़े सुधार किए गए हैं।

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क्या आप इस योजना के लिए पात्र हैं? (Check Eligibility Criteria)

इस योजना का लाभ उठाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण शर्तों का पालन करना अनिवार्य है:

  • UDID कार्ड: वर या वधू के पास कम से कम 40% दिव्यांगता का प्रमाणित और वैध UDID कार्ड होना चाहिए।

  • स्थायी निवासी: दोनों में से कम से कम एक व्यक्ति का महाराष्ट्र का स्थायी निवासी होना आवश्यक है।

  • प्रथम विवाह: यह लाभ केवल पहले विवाह के लिए ही देय है। यदि कोई तलाकशुदा है, तो उसे तभी लाभ मिलेगा जब उसने पहले कभी इस योजना का लाभ न लिया हो।

  • समय सीमा: विवाह का कानूनी पंजीकरण (Registration) अनिवार्य है और विवाह के एक साल के भीतर ही आवेदन करना होगा।

कैसे करें आवेदन और किन दस्तावेजों की होगी जरूरत?

आवेदन करने के लिए आपको अपने क्षेत्र के संबंधित जिला कार्यालय (Zila Parishad) में संपर्क करना होगा। लाभार्थियों का चयन मुख्य कार्यकारी अधिकारी की अध्यक्षता वाली एक उच्च स्तरीय समिति करेगी। आवेदन के साथ निम्नलिखित दस्तावेज तैयार रखें:

  • 40% या उससे अधिक दिव्यांगता का प्रमाण पत्र (Handicapped Certificate).

  • महाराष्ट्र का निवास प्रमाण पत्र (Domicile Certificate).

  • शादी का कानूनी प्रमाण पत्र (Marriage Registration Certificate).

  • आधार कार्ड (दोनों का).

  • संयुक्त बैंक खाता नंबर और बैंक विवरण।

यह योजना न केवल आर्थिक सहायता है, बल्कि दिव्यांगजनों के लिए सम्मान और बराबरी का संदेश है। यदि आप या आपका कोई जानने वाला इसके पात्र है, तो बिना देरी किए आवेदन करें और इस बड़ी सौगात का हिस्सा बनें।


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