UP Voter List : 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सपा-भाजपा में मची खलबली

Published On: January 8, 2026
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UP Voter List : उत्तर प्रदेश की राजनीति में इस समय ‘वोटर लिस्ट’ शब्द ने एक ऐसा तूफान खड़ा कर दिया है, जिसने सत्ता और विपक्ष दोनों को ही चिंता में डाल दिया है। उत्तर प्रदेश निर्वाचन आयोग द्वारा जारी SIR (Special Inquiry Report) के तहत ड्राफ्ट मतदाता सूची के आने के बाद जो आंकड़े सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। साल 2024 के लोकसभा चुनाव में जहाँ समाजवादी पार्टी (सपा) ने 37 सीटें जीतकर अपना परचम लहराया था, वहीं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) 33 सीटों पर सिमट गई थी। अब इन नतीजों को जब हालिया वोटर लिस्ट कटौती (Voter List Deduction) से जोड़कर देखा जा रहा है, तो एक बड़ा अंतर और गहरा सस्पेंस उभरकर सामने आ रहा है।

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सपा के गढ़ में वोट कटने की रफ्तार (SP Win Districts Analysis)
समाजवादी पार्टी की जीत वाले जिलों में मतदाता सूची से नामों की कटौती आमतौर पर 15 से 25 प्रतिशत के बीच दर्ज की गई है।

  • अखिलेश यादव के गढ़ कन्नौज में 21.57% और मैनपुरी में 16.17% वोटरों के नाम हटाए गए हैं।

  • पश्चिमी यूपी की कैराना सीट से जुड़े शामली में 16.75% और मुजफ्फरनगर में 16.29% की कटौती हुई है।

  • सबसे ज्यादा चौंकाने वाले आंकड़े लखनऊ से आए हैं, जहाँ 30.04% नाम कटे हैं। इसके अलावा संभल में 20.29%, फिरोजाबाद में 18.13% और बदायूं में 20.39% वोट कम हुए हैं।

  • पूर्वांचल की बात करें तो आजमगढ़ और लालगंज में 15.25% और जौनपुर में 16.51% वोट कम हुए हैं।

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भाजपा की सीटों पर कटौती का स्तर और भी गहरा (BJP Win Districts Analysis)
हैरानी की बात यह है कि जिन जिलों में 2024 में भाजपा की जीत हुई थी, वहां मतदाता सूची से नाम हटने का प्रतिशत अपेक्षाकृत ज्यादा नजर आ रहा है। कई जगहों पर यह आंकड़ा 20 से 30 प्रतिशत तक जा पहुँचा है।

  • गाजियाबाद में रिकॉर्ड 28.83% और मेरठ में 24.65% नाम हटाए गए हैं।

  • कानपुर नगर में 25.50% और आगरा में 23.25% की बड़ी कटौती दर्ज हुई है।

  • धार्मिक और राजनीतिक रूप से अहम वाराणसी में 18.18% और प्रयागराज (फूलपुर) में 24.64% वोट कम हुए हैं।

  • बहराइच में 20.44% और शाहजहाँपुर में 21.76% की कटौती ने स्थानीय नेताओं की धड़कनें बढ़ा दी हैं।

2027 का रण: क्या बदल जाएगा समीकरण?
यूपी में 2027 में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव के लिहाज से ये आंकड़े बेहद निर्णायक साबित हो सकते हैं। यदि किसी विशेष समुदाय या विचारधारा के मतदाताओं के नाम बड़ी संख्या में सूची से बाहर हुए हैं, तो इसका सीधा असर चुनावी नतीजों पर पड़ेगा। यही वजह है कि समाजवादी पार्टी और भाजपा दोनों ने ही अब अपने कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए हैं कि वे बूथ स्तर पर जाकर एक-एक वोट की पड़ताल करें।

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एक्सपर्ट की राय: क्या वास्तव में किसी का नुकसान हुआ?
वरिष्ठ पत्रकार योगेश मिश्रा का मानना है कि केवल इन प्रतिशत के आधार पर हार-जीत तय करना जल्दबाजी होगी। उनके अनुसार, “जब तक हम ग्राउंड लेवल पर यह नहीं देख लेते कि किस खास कम्युनिटी, किस समाज या किस पोलिंग बूथ के कितने वोट कटे हैं, तब तक किसी भी पार्टी के नुकसान या फायदे का अंतिम निष्कर्ष निकालना असंभव है।” उनके मुताबिक, इस डेटा का बारीकी से विश्लेषण करना होगा कि क्या ये वोट शिफ्ट हुए हैं या वास्तव में मतदाता अपात्र थे।

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आपका वोट, आपकी ताकत
उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के इस ‘शुद्धिकरण’ अभियान ने सियासी बिसात बिछा दी है। निर्वाचन आयोग का कहना है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है, लेकिन राजनीतिक दलों की सक्रियता बता रही है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और भी गर्म होने वाला है। यदि आपका नाम भी सूची से कट गया है, तो फौरन ऑनलाइन या बीएलओ के माध्यम से इसे जुड़वाने की प्रक्रिया शुरू करें, क्योंकि आपका एक वोट ही 2027 की सरकार तय करेगा।


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