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Join NowShare Market Updates: भारतीय शेयर बाजार में निवेश करने वालों के लिए पिछला एक हफ्ता किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा है। अगर आप भी स्टॉक मार्केट के निवेशक हैं, तो पोर्टफोलियो का लाल निशान देखकर आपकी धड़कनें तेज होना लाजमी है। दलाल स्ट्रीट पर आज लगातार छठवें दिन गिरावट का दौर जारी रहा, जिसने निवेशकों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।
बाजार की इस ‘सुनामी’ में केवल सूचकांक ही नहीं गिरे, बल्कि मध्यमवर्गीय निवेशकों की गाढ़ी कमाई के 17 लाख करोड़ रुपये पलक झपकते ही हवा हो गए। आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर बाजार में यह भगदड़ क्यों मची है और क्या यह गिरावट अभी और गहराएगी?
सेंसेक्स और निफ्टी का ताजा हाल: बाजार में ‘ब्लडबाथ’
आज यानी सोमवार को हफ्ते के पहले ही दिन बाजार ने गिरावट के साथ शुरुआत की। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स (BSE Sensex) 0.17% गिरकर 83,433.30 पर खुला, लेकिन जैसे-जैसे घड़ी की सुइयां आगे बढ़ीं, बिकवाली का दबाव और तेज हो गया। सुबह 11 बजे तक सेंसेक्स करीब 450 अंक लुढ़ककर 83,125 के स्तर पर आ गया।
वहीं, निफ्टी 50 (NSE Nifty) की हालत भी नाजुक बनी हुई है। निफ्टी 125 अंकों से ज्यादा की गिरावट के साथ 25,550 के आसपास संघर्ष करता नजर आया। गौर करने वाली बात यह है कि महज 6 दिनों के भीतर सेंसेक्स अपने ऑल-टाइम हाई से 2,700 अंक से ज्यादा टूट चुका है।
किसने कमाया और किसने डुबाया?
बाजार की इस गिरावट में भी कुछ शेयर हरे निशान में तैर रहे थे, जिनमें HDFC Life, SBI Life, श्रीराम फाइनेंस और हिंडाल्को टॉप गेनर्स रहे। लेकिन दूसरी तरफ, मार्केट के दिग्गजों ने सबसे ज्यादा निराश किया। रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL), अपोलो हॉस्पिटल्स, लार्सन एंड टुब्रो (L&T) और मैक्स हेल्थकेयर जैसे शेयर टॉप लूजर्स की लिस्ट में शामिल रहे, जिससे बाजार का सेंटिमेंट और बिगड़ गया।
क्यों लड़खड़ा रहा है भारतीय बाजार? 5 बड़े कारण
विशेषज्ञों के अनुसार, यह गिरावट केवल घरेलू कारणों से नहीं है, बल्कि इसके पीछे वैश्विक भू-राजनीतिक (Geopolitical) और आर्थिक समीकरणों का हाथ है:
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ट्रंप टैरिफ और ट्रेड डील का डर: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया टिप्पणियों ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर अनिश्चितता पैदा कर दी है। निवेशक डरे हुए हैं कि अगर अमेरिका सख्त टैरिफ लगाता है, तो भारतीय निर्यातकों को बड़ा नुकसान होगा।
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जियोपॉलिटिकल तनाव: ईरान में बढ़ते विरोध प्रदर्शन, वेनेजुएला का संकट और ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप की विवादास्पद धमकियों ने वैश्विक बाजार में अस्थिरता पैदा कर दी है।
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इंडिया VIX में उछाल: इंडिया वोलैटिलिटी इंडेक्स (VIX) में आई तेजी साफ संकेत दे रही है कि आने वाले दिनों में बाजार में और भी बड़े उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं।
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सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार: ट्रंप टैरिफ पर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले में हो रही देरी से निवेशकों के बीच बेचैनी बनी हुई है।
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Q3 नतीजों की चिंता: तीसरी तिमाही (Q3) के कॉर्पोरेट नतीजे आने शुरू हो रहे हैं। बैंकिंग और टेक सेक्टर की दिग्गज कंपनियों के मैनेजमेंट कमेंट्री पर सबकी नजर है, जो बाजार की अगली दिशा तय करेगी।
अजीब विरोधाभास: अमेरिका रिकॉर्ड पर, भारत फर्श पर!
एक तरफ भारतीय बाजार में हाहाकार मचा है, वहीं दूसरी ओर अमेरिकी बाजार रिकॉर्ड तोड़ रहे हैं। S&P 500, नैस्डेक और डॉव जोन्स अपने ऐतिहासिक उच्चतम स्तर पर बंद हुए हैं। यह विरोधाभास भारतीय निवेशकों के लिए ज्यादा चिंताजनक है क्योंकि वैश्विक तेजी का फायदा भारत को नहीं मिल पा रहा है।
डॉलर और कच्चे तेल का दबाव
कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें 63 डॉलर प्रति बैरल के आसपास स्थिर हैं, लेकिन ईरान संकट के चलते सप्लाई रुकने का खतरा बना हुआ है। उधर, अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) में मामूली गिरावट आई है, जिससे रुपया थोड़ा संभलकर 90.17 के स्तर पर पहुंचा है।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
बाजार के जानकारों का मानना है कि यह पैनिक सेलिंग (Panic Selling) का समय नहीं है, बल्कि सतर्क रहने का समय है। बाजार में गिरावट लंबी खिंच सकती है, इसलिए किसी भी बड़े निवेश से पहले Q3 के नतीजों और अमेरिकी ट्रेड पॉलिसी पर नजर रखना जरूरी है।










