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Join NowShankaracharya Swami Avimuktheshwaranand: भारत की आध्यात्मिक राजधानी कहे जाने वाले प्रयागराज से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पूरे देश के धार्मिक और सामाजिक हलकों में खलबली मचा दी है। हाल के दिनों में अपने प्रखर बयानों के लिए सुर्खियों में रहने वाले ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती (Shankaracharya Swami Avimuktheshwaranand) अब एक बेहद गंभीर कानूनी संकट में फंसते नजर आ रहे हैं। उनके खिलाफ नाबालिगों के यौन उत्पीड़न जैसे संगीन आरोपों में एफआईआर दर्ज की गई है, और अब पुलिस की जांच की आंच उन तक पहुंच चुकी है।
अदालत के आदेश पर दर्ज हुई FIR: क्या हैं धाराएं?
यह पूरा मामला तब गरमाया जब एडीजे रेप एवं पॉक्सो स्पेशल कोर्ट (ADJ POCSO Court) ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस को मुकदमा दर्ज करने का कड़ा निर्देश दिया। प्रयागराज के झूंसी थाने में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके करीबी शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 351(2) के साथ-साथ पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) की धारा 3, 4(2), 5, 6, 16 और 17 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। इस एफआईआर में दो-तीन अज्ञात व्यक्तियों को भी आरोपी बनाया गया है।
हरदोई में नाबालिगों की गवाही: रूह कंपा देने वाले खुलासे
पुलिस की तफ्तीश अब केवल कागजों तक सीमित नहीं है। मामले की जांच कर रही झूंसी थाने की पुलिस टीम हाल ही में उत्तर प्रदेश के हरदोई पहुंची। वहां उन कथित पीड़ित नाबालिग लड़कों के बयान दर्ज किए गए, जिन्होंने शंकराचार्य और उनके सहयोगियों पर यौन शोषण के गंभीर आरोप लगाए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, पुलिस ने इन बच्चों के अलग-अलग और सामूहिक, दोनों तरह से बयान लिए हैं। सबसे अहम बात यह है कि बच्चों के ये बयान ‘कलमबंद’ (164 के तहत) और वीडियो रिकॉर्डिंग पर लिए गए हैं, ताकि इन्हें अदालत में ठोस सबूत के तौर पर पेश किया जा सके। बताया जा रहा है कि बच्चों ने उन सभी आरोपों की पुष्टि की है जो श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट के अध्यक्ष आशुतोष ब्रह्मचारी ने अपनी अर्जी में लगाए थे।
माघ मेले के दौरान हुई घटना?
इस विवाद की जड़ें प्रयागराज के पवित्र माघ मेले से जुड़ी हैं। शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी का आरोप है कि मेले के दौरान शिविर में नाबालिग लड़कों के साथ दुष्कर्म जैसी घिनौनी वारदात को अंजाम दिया गया। इसी शिकायत पर लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद विशेष न्यायाधीश विनोद कुमार चौरसिया ने पुलिस को कार्रवाई के आदेश दिए थे।
गिरफ्तारी की तलवार और पुलिस की अगली कार्रवाई
नाबालिगों द्वारा अपने बयानों पर कायम रहने और मेडिकल परीक्षण की प्रक्रिया शुरू होने के बाद, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है। प्रयागराज पुलिस अब इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों, मोबाइल लोकेशन और चश्मदीदों के बयानों की कड़ियां जोड़ रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी तरह पारदर्शी है और साक्ष्यों के आधार पर ही अगली विधिक कार्रवाई की जाएगी।
एक ओर जहां स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थक इसे एक सोची-समझी साजिश बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पॉक्सो एक्ट जैसे गंभीर कानून के तहत दर्ज मामला उनकी मुश्किलें बढ़ा सकता है। फिलहाल, सबकी निगाहें कोर्ट के अगले रुख और पुलिस की चार्जशीट पर टिकी हैं। क्या एक धर्मगुरु को इन आरोपों से मुक्ति मिलेगी या कानून अपना काम करेगा? यह आने वाला वक्त ही बताएगा।










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