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Join NowRaja Raghuvanshi murder case: आपने अक्सर फिल्मों में देखा होगा कि पुलिस की एक छोटी सी कागजी गलती का फायदा उठाकर बड़े-बड़े मुजरिम जमानत पर छूट जाते हैं। लेकिन असल जिंदगी में जब ऐसा होता है, तो हर कोई हैरान रह जाता है। ऐसा ही कुछ हुआ है देश के सबसे चर्चित ‘राजा रघुवंशी मर्डर केस’ में।
याद है आपको वो मामला जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था? जहां एक नई-नवेली दुल्हन ने ही अपने पति के कत्ल की खौफनाक साजिश रची थी। सीसीटीवी कैमरों से लेकर कई डिजिटल सबूतों में आरोपी कैद भी हुए। लेकिन अब लगभग 11 महीने जेल में रहने के बाद, इस केस की मुख्य आरोपी और राजा की पत्नी सोनम रघुवंशी को शिलॉन्ग की एक अदालत ने जमानत दे दी है। आखिर इतने हाई प्रोफाइल और संगीन मामले में सोनम को अचानक जमानत कैसे मिल गई? चलिए, बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं इस पूरे मामले की इनसाइड स्टोरी।
शिलॉन्ग पुलिस से आखिर क्या गलती हुई?
सोनम को जमानत मिलने के पीछे किसी बड़े वकील का जादू नहीं, बल्कि मेघालय (शिलॉन्ग) पुलिस की एक बहुत बड़ी लापरवाही है।
अदालत में जब सोनम की जमानत पर सुनवाई चल रही थी, तो पता चला कि पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी के कागजातों (अरेस्ट मेमो) में गलत धारा लिख दी थी। जहां हत्या के मामले में बीएनएस (भारतीय न्याय संहिता) की धारा 103 (1) लगनी चाहिए थी, वहां पुलिस ने गलती से धारा 403 (1) लगा दी। आसान शब्दों में समझें तो, पुलिस के कागजों के हिसाब से सोनम पर ‘कत्ल’ का नहीं बल्कि ‘संपत्ति हड़पने’ का आरोप दर्ज हो गया।
हालांकि पुलिस ने कोर्ट में इसे सिर्फ एक ‘टाइपिंग मिस्टेक’ या लिखने की गलती बताया, लेकिन कानून तो सबूतों और कागजों पर चलता है। इसके अलावा, जब सोनम को पहली बार गाजीपुर कोर्ट में पेश किया गया था, तब उसे कोई वकील (कानूनी सहायता) नहीं दिया गया था। कोर्ट ने माना कि यह एक गिरफ्तार व्यक्ति के मौलिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन है। इसी तकनीकी गलती और कानूनी झोल का पूरा फायदा सोनम को मिला और कोर्ट ने उसे जमानत दे दी।
सोनम को किन शर्तों पर मिली जमानत?
भले ही सोनम जेल से बाहर आ गई है, लेकिन वह पूरी तरह से आजाद नहीं है। कोर्ट ने उसे 50 हजार रुपये के मुचलके पर जमानत दी है (जो उसके पिता देवी सिंह ने भरा है)। इसके साथ ही कोर्ट ने कुछ सख्त शर्तें भी रखी हैं:
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सोनम बिना अदालत की इजाजत के शिलॉन्ग जिले से बाहर नहीं जा सकती।
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उसे हर पेशी पर कोर्ट में हाजिर होना पड़ेगा।
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वह केस के गवाहों या सबूतों के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ करने की कोशिश नहीं करेगी।
परिवार का दर्द: अब हाई कोर्ट और सीबीआई से उम्मीद
सोनम के जेल से बाहर आने की खबर ने राजा रघुवंशी के परिवार को पूरी तरह से तोड़ दिया है। जिस मेघालय पुलिस की जांच पर परिवार भरोसा कर रहा था, उसी की गलती से उन्हें यह झटका लगा है।
इंदौर में रहने वाले राजा के भाई ने अब इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती देने का मन बना लिया है। वहीं, बेटे को खो चुकी मां अब पुलिस की जांच से निराश होकर इस पूरे मामले की सीबीआई (CBI) जांच की मांग कर रही हैं। परिवार को डर है कि मुख्य आरोपी को जमानत मिलने से अब बाकी आरोपियों को भी आसानी से बेल मिल सकती है।
790 पन्नों की चार्जशीट: क्या था कत्ल का असली मास्टरप्लान?
इस मामले में मेघालय पुलिस ने 790 पन्नों की एक बेहद लंबी चार्जशीट दायर की थी। इस चार्जशीट के मुताबिक इस पूरी खौफनाक साजिश के कुल 5 किरदार थे:
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सोनम रघुवंशी: मृतक की पत्नी और मुख्य मास्टरमाइंड।
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राज सिंह कुशवाहा: सोनम का प्रेमी, जो इंदौर में बैठकर पूरी प्लानिंग कर रहा था।
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विशाल सिंह चौहान, आकाश सिंह राजपूत और आनंद कुर्मी: ये वो तीन हत्यारे थे, जिन्हें राजा को रास्ते से हटाने के लिए हायर किया गया था।
कैसे दिया गया था इस वारदात को अंजाम?
चार्जशीट के अनुसार, सोनम ने राजा को मारने की पहली कोशिश 21 मई को गुवाहाटी में की थी, लेकिन वहां कोई सुनसान जगह नहीं मिली। इसके बाद उसने अपने प्रेमी राज के कहने पर अचानक मेघालय जाने का प्लान बनाया। तीनों कातिल भी उनके पीछे-पीछे मेघालय पहुंच गए।
23 मई के दिन सोनम सेल्फी लेने के बहाने राजा को एक सुनसान और खूबसूरत ‘सेल्फी पॉइंट’ पर ले गई। वहां पहुंचते ही सोनम ने विशाल को इशारा किया। विशाल ने पीछे से एक धारदार हथियार (दाव) से राजा के सिर पर वार कर दिया। राजा तड़पने लगा और दर्द से चीखने लगा।
दिल दहला देने वाली बात यह है कि अपनी आंखों के सामने पति को मरता देख सोनम ने पहले तो अपना मुंह फेर लिया। लेकिन जब राजा की चीखें शांत हो गईं, तो उसने पास जाकर कन्फर्म किया कि वह मर गया है या नहीं। इसके बाद उसने कातिलों के साथ मिलकर राजा की लाश को खाई में फेंक दिया और वहां से भाग निकली।
सीसीटीवी फुटेज, कॉल रिकॉर्ड्स और मोबाइल की तस्वीरों जैसे ढेरों पक्के सबूत होने के बावजूद, सिर्फ एक कागजी गलती ने इस केस को एक नया मोड़ दे दिया है। अब यह देखना काफी अहम होगा कि राजा का परिवार हाई कोर्ट में क्या कदम उठाता है और क्या इस केस की जांच सीबीआई के हाथों में जाती है या नहीं। न्याय की यह लड़ाई अब और भी लंबी होती दिख रही है।


