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Raja Bhaiya : सीएम योगी के सामने राजा भैया ने क्यों कहा- ‘कहीं 15 साल बाद बेटा बचाओ न कहना पड़े’

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Raja Bhaiya : देश की राजनीति में इस समय महिलाओं की भागीदारी और ‘महिला आरक्षण’ (Women Reservation) का मुद्दा सबसे ज्यादा छाया हुआ है। इसी कड़ी में जब उत्तर प्रदेश विधानसभा (UP Assembly) का विशेष सत्र बुलाया गया, तो पक्ष और विपक्ष के कई नेताओं ने अपनी-अपनी बात रखी। लेकिन इस दौरान जिस एक नेता के भाषण ने सबका ध्यान अपनी तरफ खींचा और सदन में बैठे विधायकों को सोचने के साथ-साथ मुस्कुराने पर भी मजबूर कर दिया, वो थे कुंडा के बाहुबली विधायक रघुराज प्रताप सिंह ऊर्फ ‘राजा भैया’ (Raja Bhaiya)।

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राजा भैया का अंदाज हमेशा से थोड़ा अलग और बेबाक रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) की मौजूदगी में राजा भैया ने महिला सशक्तिकरण और नारी शक्ति वंदन अधिनियम का समर्थन तो किया, लेकिन उन्होंने जमीनी हकीकत का वो आईना भी दिखाया जिसे हम अक्सर गांवों में ‘प्रधान-पति’ के नाम से जानते हैं। आइए, एक दोस्त की तरह बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं कि राजा भैया ने सदन में ऐसा क्या कह दिया जिसकी हर तरफ चर्चा हो रही है और उनके इस भाषण के असली मायने क्या हैं।

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‘प्रधान-पति’ का वो कड़वा सच, जिसे हर गांव वाला जानता है

भाषण की शुरुआत करते हुए राजा भैया ने कहा कि पंचायती राज में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण तो दे दिया गया है, लेकिन क्या सच में इससे महिलाओं की स्थिति सुधरी है?

इस बात को समझाने के लिए राजा भैया ने अपने ही गांव ‘बेती’ का एक बहुत ही सटीक और जमीनी उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि उनके गांव की प्रधान श्रीमती तेसी देवी हैं, लेकिन अगर वे सामने आ जाएं तो शायद ही कोई उन्हें पहचान पाए। ऐसा इसलिए क्योंकि गांव का सारा काम उनके पतिदेव यानी ‘प्रधान-पति’ श्री रामधनी पटेल ही देखते हैं। यहां तक कि पंचायत चुनाव के प्रचार में और बैनर-पोस्टरों पर भी ‘प्रधान-पति’ का ही नाम और फोटो आगे रहता है। राजा भैया की यह बात उस कड़वी सच्चाई को दिखाती है जो आज भी हमारे देश के हजारों गांवों में मौजूद है।

मजेदार तंज: ‘कहीं 15-20 साल बाद बेटा बचाओ का नारा न लगाना पड़े’

गंभीर बातों के बीच भाषण के दौरान एक पल ऐसा भी आया जब पूरा सदन ठहाकों से गूंज उठा। राजा भैया ने हल्के-फुल्के और मजाकिया अंदाज में कहा कि आज जिस तेजी से महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं, उसे देखकर कहीं ऐसा न हो जाए कि 15-20 साल बाद पुरुषों के लिए एक विशेष सत्र बुलाना पड़े।

उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि कहीं आने वाले समय में ‘बेटी बचाओ’ की जगह ‘बेटा बचाओ’ या ‘पुरुष सशक्तिकरण’ (Male Empowerment) का नारा न लगाना पड़ जाए। उनके इस तंज पर सत्ता पक्ष से लेकर विपक्ष तक के सभी विधायक अपनी हंसी नहीं रोक पाए।

महिला विधायकों के हाथ में कमान: यही है असली सशक्तिकरण

राजा भैया ने उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष (Speaker) द्वारा लिए गए एक फैसले की भी जमकर तारीफ की। दरअसल, इस विशेष सत्र के दौरान स्पीकर की कुर्सी और सदन को चलाने की जिम्मेदारी महिला विधायकों के एक पैनल को दी गई थी।

इस पर राजा भैया ने खुशी जताते हुए कहा कि यह देखकर बहुत अच्छा लग रहा है कि आज सदन की पूरी कमान हमारी महिला विधायकों के हाथ में है। उनका मानना था कि सिर्फ कागजों पर कानून बनाने से ज्यादा असर तब पड़ता है, जब हकीकत में महिलाओं को इतनी बड़ी जिम्मेदारी दी जाती है। यही असली महिला सशक्तिकरण (Women Empowerment) है।

सीएम योगी के सामने कानून-व्यवस्था की तारीफ

अपने भाषण के अंत में राजा भैया ने सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनकी सरकार की कानून-व्यवस्था की भी खुलकर सराहना की। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि आज अगर हम उत्तर प्रदेश की बात करें, तो यहां की बेटियां और महिलाएं सिर्फ सक्षम ही नहीं हैं, बल्कि वे पूरी तरह से सुरक्षित भी महसूस कर रही हैं।

एक समय था जब यूपी में महिलाओं की सुरक्षा एक बहुत बड़ा मुद्दा हुआ करती थी, लेकिन राजा भैया के अनुसार आज योगी सरकार में माहौल काफी बदल गया है और महिलाएं बिना किसी डर के आगे बढ़ रही हैं।

कुल मिलाकर देखा जाए तो, विधानसभा के इस विशेष सत्र में राजा भैया का भाषण सिर्फ तालियां बटोरने के लिए नहीं था। उन्होंने एक बहुत ही अहम और प्रैक्टिकल मुद्दे पर हमारा ध्यान खींचा है।संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के तहत आरक्षण मिलना एक ऐतिहासिक कदम है। लेकिन, जब तक गांव-देहात में ‘प्रधान-पति’, ‘पार्षद-पति’ और ‘विधायक-पति’ वाला यह प्रॉक्सी सिस्टम (Proxy System) खत्म नहीं होगा, तब तक महिला आरक्षण का असली मकसद पूरा नहीं हो पाएगा। असली बदलाव तब आएगा जब चुनी गई महिला नेता ‘रबर स्टाम्प’ न बनकर खुद अपने फैसले लेंगी और समाज उन्हें उनके अपने नाम और काम से पहचानेगा।


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