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Join NowMohan Bhagwat : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ इस वक्त देश की राजनीति का सबसे बड़ा केंद्र बनी हुई है। वजह है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत का दो दिवसीय प्रवास। यूं तो इसे एक ‘शिष्टाचार भेंट’ या रूटीन दौरा बताया जा रहा है, लेकिन लखनऊ की गलियों में चल रही चर्चाओं को मानें तो यह मुलाकात उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़े तूफान का संकेत है।
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बंद कमरे की वो 35 मिनट की बातचीत…
बुधवार की रात जब घड़ी की सुइयों ने 8 बजाए, तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ निराला नगर स्थित संघ कार्यालय ‘सरस्वती शिशु मंदिर’ पहुंचे। वहां जो हुआ, उसने सियासी जानकारों के कान खड़े कर दिए। मुख्यमंत्री और संघ प्रमुख मोहन भागवत के बीच एक बंद कमरे में बिल्कुल एकांत में करीब 35 मिनट तक गुफ्तगू हुई।
इस बैठक के दौरान किसी और को कमरे में जाने की अनुमति नहीं थी। चर्चा है कि इस बातचीत में न केवल प्रदेश की कानून व्यवस्था और विकास कार्यों पर चर्चा हुई, बल्कि संगठन के भीतर चल रही खींचतान और आगामी ‘कैबिनेट विस्तार’ (UP Cabinet Expansion) को लेकर भी अहम मशविरा किया गया।
दोनों डिप्टी सीएम को मिला ’10 मिनट’ का समय
गुरुवार की सुबह भी हलचल कम नहीं थी। मोहन भागवत ने प्रदेश के दोनों उपमुख्यमंत्री—केशव प्रसाद मौर्य और बृजेश पाठक से भी अलग-अलग मुलाकात की। सूत्रों के मुताबिक, इन मुलाकातों का समय करीब 10-10 मिनट रहा। राजनीतिक हलकों में इस बात की बड़ी चर्चा है कि क्या संघ अब यूपी सरकार और संगठन के बीच के ‘तालमेल’ को खुद अपने हाथों से सुधारने की कोशिश कर रहा है? केशव प्रसाद मौर्य और बृजेश पाठक की भागवत से मुलाकात को महज शिष्टाचार मानना थोड़ा मुश्किल लग रहा है, खासकर तब जब प्रदेश में संगठन में फेरबदल की चर्चाएं जोरों पर हों।
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2027 का महा-प्लान: संघ ने संभाली कमान
अगले साल यानी 2026 के अंत और 2027 की शुरुआत में उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव (UP Assembly Election 2027) होने हैं। मोहन भागवत का बार-बार यूपी दौरा करना इस बात का साफ संकेत है कि संघ अब सीधे तौर पर चुनाव का ताना-बाना बुनने में जुट गया है। चुनाव में अभी समय है, लेकिन ‘अटकलों का बाजार’ इसलिए गर्म है क्योंकि हाल के दिनों में सरकार और संगठन के बीच कुछ मुद्दों पर मतभेद की खबरें आती रही हैं।
क्या यूपी में होने वाला है बड़ा बदलाव?
संघ प्रमुख का फोकस इस वक्त पूरी तरह से उत्तर प्रदेश पर टिका है। विशेषज्ञों का मानना है कि भागवत की इन मुलाकातों का सीधा असर आने वाले दिनों में देखने को मिल सकता है। चाहे वह मंत्रिमंडल में नए चेहरों की एंट्री हो या फिर संगठन के पदों पर नई नियुक्तियां, संघ की सहमति के बिना अब कोई बड़ा पत्ता नहीं हिलेगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भागवत से बार-बार होने वाली ये मुलाकातें यह भी स्पष्ट करती हैं कि शीर्ष नेतृत्व और संघ के बीच सामंजस्य काफी गहरा है। लेकिन क्या यह सामंजस्य विरोधियों और भीतरघात करने वालों के लिए खतरे की घंटी है? यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। मोहन भागवत के लखनऊ दौरे ने यह साफ कर दिया है कि 2027 की जंग के लिए संघ परिवार अब ‘एक्शन मोड’ में है। बंद कमरे की बैठकों के नतीजे जब धरातल पर आएंगे, तब शायद यूपी की राजनीति का चेहरा पूरी तरह बदल चुका होगा।










