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Join NowIndia-US Pax Silica Alliance: दुनिया की राजनीति में महाशक्ति बनने की जंग अब हथियारों से नहीं, बल्कि एक छोटी सी ‘चिप’ (Chip) से लड़ी जा रही है। 20 फरवरी 2026 का दिन इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों से लिखा जाएगा, क्योंकि इसी दिन भारत ने एक ऐसा कदम उठाया है जिससे बीजिंग से लेकर वाशिंगटन तक की हलचल बढ़ गई है।
भारत के आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव और अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की मौजूदगी में एक ऐतिहासिक गठबंधन पर मुहर लगी। भारत अब आधिकारिक तौर पर अमेरिका के नेतृत्व वाले ‘पैक्स सिलिका अलायंस’ (Pax Silica Alliance) का हिस्सा बन चुका है। यह सिर्फ एक समझौता नहीं, बल्कि भविष्य की तकनीक पर कब्जे की एक बड़ी रणनीति है।
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आखिर क्या है ‘Pax Silica’ और क्यों डरा हुआ है चीन?
‘Pax Silica’ नाम सुनकर शायद आपको यह कोई साइंस-फिक्शन फिल्म जैसा लगे, लेकिन इसका अर्थ बहुत गहरा है। Pax एक लैटिन शब्द है जिसका अर्थ है ‘शांति और स्थिरता’, वहीं Silica का मतलब है ‘सिलिकॉन’—वो जादुई मिट्टी जिससे दुनिया के सबसे आधुनिक कंप्यूटर चिप्स और सेमीकंडक्टर बनते हैं।
सरल शब्दों में कहें तो, इस गठबंधन का मकसद दुनिया को एक ऐसा ‘ट्रस्टेड नेटवर्क’ (Trusted Network) देना है, जहाँ तकनीक का इस्तेमाल युद्ध के लिए नहीं बल्कि ग्लोबल शांति और विकास के लिए हो। लेकिन इसके पीछे की असली कहानी कुछ और है। कोविड-19 के बाद दुनिया ने देखा कि कैसे चिप्स की सप्लाई के लिए हम कुछ चुनिंदा देशों (खासकर चीन) पर निर्भर थे। अब भारत और अमेरिका मिलकर उस निर्भरता की जंजीरों को तोड़ना चाहते हैं।
ड्रैगन के तकनीकी प्रभुत्व को सीधी चुनौती
हालांकि, किसी भी सरकारी दस्तावेज में सीधे तौर पर चीन का नाम नहीं लिया गया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि ‘पैक्स सिलिका’ का एकमात्र लक्ष्य चीन के बढ़ते तकनीकी अहंकार को कम करना है। ग्लोबल सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक सप्लाई चेन में अब तक चीन का एकछत्र राज था, लेकिन अब भारत इस क्षेत्र में ‘नया सुल्तान’ बनकर उभर रहा है।
यह गठबंधन भारत को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) के मामले में आत्मनिर्भर बनाने में मदद करेगा। अब भारत को किसी भी तकनीक के लिए चीन के सामने हाथ फैलाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
दुनिया के दिग्गज देश एक साथ, भारत की बढ़ी ताकत
इस गठबंधन में भारत का शामिल होना कोई छोटी बात नहीं है। इसमें पहले से ही जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, इजरायल, ब्रिटेन, कतर और यूएई जैसे तकनीकी दिग्गज शामिल हैं। इन देशों के पास दुनिया की सबसे बेहतरीन चिप डिजाइनिंग और एआई रिसर्च की तकनीक है। अब भारत की विशाल ‘डिजिटल इकोनॉमी’ और युवाओं की ताकत इस ग्रुप को और भी खतरनाक बना देगी।
भारत के ‘सेमीकंडक्टर मिशन’ को लगेंगे पंख
अश्विनी वैष्णव के नेतृत्व में भारत सरकार पहले ही India Semiconductor Mission (ISM) पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। ‘पैक्स सिलिका अलायंस’ में शामिल होने के बाद भारत को निम्नलिखित बड़े फायदे होंगे:
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विदेशी निवेश: अमेरिका और जापान की बड़ी चिप कंपनियां अब भारत में अपनी फैक्ट्रियां लगाएंगी।
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AI क्रांति: भारत के स्टार्टअप्स को दुनिया की सबसे बेहतरीन एआई रिसर्च तक पहुंच मिलेगी।
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सप्लाई चेन सुरक्षा: युद्ध या महामारी जैसी स्थिति में भी भारत के पास तकनीक और चिप्स की कमी नहीं होगी।
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रोजगार के अवसर: लाखों की संख्या में हाई-टेक नौकरियां पैदा होंगी।
भारत का ‘पैक्स सिलिका’ में शामिल होना इस बात का प्रमाण है कि अब दुनिया भारत को सिर्फ एक बाजार के रूप में नहीं, बल्कि एक ‘टेक्नोलॉजी लीडर’ के रूप में देख रही है। यह समझौता भारत के विकसित भारत 2047 के सपने की ओर एक बहुत बड़ा कदम है।










