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Join NowBihar news: बिहार की नीतीश सरकार अब एक बार फिर समाज के अंतिम पायदान पर खड़े लोगों की तकदीर बदलने की तैयारी में है। राज्य सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए एक ऐसा रोडमैप तैयार किया है, जो न केवल समाज की रूढ़िवादी बेड़ियों को तोड़ेगा, बल्कि राज्य के मेधावी छात्र-छात्राओं के लिए आसमान भी छोटा कर देगा।
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अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (SC/ST) कल्याण विभाग की ओर से दो ऐसी महा-योजनाओं का प्रस्ताव तैयार किया गया है, जिसने युवाओं में जबरदस्त उत्साह पैदा कर दिया है। आइए जानते हैं क्या हैं ये दो बड़ी घोषणाएं और इनका सीधा फायदा आप कैसे उठा सकते हैं।
1. जातिवाद की दीवार टूटेगी, बढ़ेगा प्रोत्साहन: अब ₹1 लाख नहीं, सीधे ₹2.5 लाख!
बिहार में अभी तक अंतरजातीय विवाह (Inter-caste Marriage) करने वाले जोड़ों को समाज कल्याण विभाग की ओर से 1 लाख रुपये की सहायता दी जाती है। लेकिन सामाजिक भेदभाव को जड़ से मिटाने के लिए अब एससी-एसटी कल्याण विभाग ने अपनी अलग और उससे कहीं ज्यादा आकर्षक योजना का प्रस्ताव पेश किया है।
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इस योजना के तहत, यदि कोई व्यक्ति अंतरजातीय विवाह करता है, तो उसे प्रोत्साहन के तौर पर ढाई लाख रुपये (₹2.5 Lakh) दिए जाएंगे।
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उद्देश्य: इस बड़ी धनराशि के पीछे सरकार का मकसद जाति प्रथा के दंश को कम करना और समाज में समरसता और भाईचारे को बढ़ावा देना है।
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प्रक्रिया: कैबिनेट से हरी झंडी मिलने के बाद इसके आवेदन की प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी रखी जाएगी, ताकि पैसा सीधे लाभार्थी के खाते में जाए।
2. विदेशी पढ़ाई का सपना अब नहीं रहेगा अधूरा: सरकार उठाएगी खर्चा!
गरीबी अक्सर टैलेंट की सबसे बड़ी दुश्मन होती है। बिहार के कई प्रतिभाशाली एससी-एसटी छात्र-छात्राएं विदेशों में उच्च शिक्षा हासिल करना चाहते हैं, लेकिन बैंक बैलेंस कम होने की वजह से वे आवेदन करने से भी डरते हैं। अब ऐसा नहीं होगा!
विभाग ने एक महत्वाकांक्षी ‘विदेशी छात्रवृत्ति योजना’ (Foreign Scholarship Scheme) का प्रस्ताव तैयार किया है।
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केंद्र सरकार का सहयोग: यह योजना केंद्र सरकार की ‘राष्ट्रीय विदेशी छात्रवृत्ति योजना’ से प्रेरित और उससे जुड़ी होगी।
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क्या-क्या मिलेगा: इसके तहत विदेश में दाखिला लेने वाले बिहार के छात्रों की ट्यूशन फीस, रहने-खाने का खर्च और यात्रा का खर्च सरकार द्वारा वहन किया जाएगा।
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कब से लागू होगी: प्रस्ताव को मंजूरी के लिए केंद्र के पास भेजा गया है। सब कुछ ठीक रहा तो शैक्षणिक सत्र 2026-27 से बिहार के छात्र ऑक्सफोर्ड, हार्वर्ड और एमआईटी जैसे विश्वविद्यालयों में पढ़ाई करते नजर आएंगे।
सामाजिक समानता की ओर बड़ा कदम
सरकार का मानना है कि ये दोनों कदम ‘आर्थिक मजबूती’ और ‘सामाजिक न्याय’ के दो प्रमुख स्तंभ साबित होंगे। एक ओर जहाँ अंतरजातीय विवाह से समाज में भेदभाव कम होगा, वहीं दूसरी ओर उच्च शिक्षा प्राप्त कर ये छात्र वैश्विक पटल पर बिहार का नाम रोशन करेंगे।
कैबिनेट की मंजूरी का इंतज़ार:
फिलहाल, एससी-एसटी कल्याण विभाग ने इन दोनों योजनाओं का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि जैसे ही बिहार कैबिनेट से इन पर आधिकारिक मुहर लगती है, इसके लिए विशेष गाइडलाइन्स और ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च कर दिए जाएंगे।










