नोएडा के सेक्टर-52 में रहने वाली एक युवती को 5जी (5G) सेवा देने का झांसा देकर साइबर जालसाजों ने उसका मोबाइल फोन हैक कर लिया। हालांकि, पीड़ित युवती ने समय रहते गजब की सूझबूझ का परिचय दिया और तत्काल अपने बैंक खाते व सिम कार्ड को बंद कराकर खुद को बड़ी साइबर ठगी का शिकार होने से बचा लिया। इस गंभीर मामले में पीड़िता की शिकायत पर नोएडा के कोतवाली सेक्टर-24 पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
32 अंकों का कोड डलवाकर मोबाइल का नियंत्रण अपने हाथ में लिया
पीड़ित शिवाक्षी अग्रवाल ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में बताया कि बीते 24 जून को उनके मोबाइल फोन पर एक अज्ञात व्यक्ति का कॉल आया था। फोन करने वाले व्यक्ति ने अपना परिचय प्रथम कुमार के रूप में दिया। उसने शिवाक्षी को झांसा दिया कि वह उनके मोबाइल नंबर पर 5जी सीरीज को सक्रिय (एक्टिवेट) कराने में मदद कर रहा है।
प्रथम कुमार के झांसे में आकर शिवाक्षी ने उसके निर्देशानुसार एयरटेल ऐप (Airtel App) खोला और उसमें आरोपी द्वारा बताया गया एक 32 अंकों का कोड दर्ज कर दिया। 32 अंकों का कोड दर्ज करते ही शिवाक्षी अग्रवाल का मोबाइल फोन अचानक बंद हो गया और उनके फोन का पूरा नियंत्रण आरोपी के पास चला गया।
बैंक खातों तक पहुंचने और लोगों को कॉल करने का किया प्रयास
आरोपी ने शिवाक्षी के मोबाइल का नियंत्रण हाथ में लेते ही उनके फोन का गलत इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। आरोपी ने उनके नंबर से कई लोगों को कॉल किए। इसके साथ ही, उसने शिवाक्षी के मोबाइल के जरिए उनके बैंक खातों तक पहुंच बनाने और वित्तीय धोखाधड़ी को अंजाम देने का भी भरपूर प्रयास किया।
चूंकि शिवाक्षी का फोन बंद हो चुका था, उन्हें तुरंत आभास हो गया कि उनके साथ कोई धोखाधड़ी हुई है। उन्होंने बिना कोई समय गंवाए सक्रियता दिखाई। उन्होंने तुरंत अपने बैंक से संपर्क किया और बैंक खातों को ब्लॉक करवा दिया। इसके साथ ही, उन्होंने टेलीकॉम कंपनी से संपर्क कर अपनी सिम सर्विस को भी बंद करा दिया, जिससे आरोपी उनके बैंक खातों से पैसे निकालने में पूरी तरह नाकाम रहा।
पुलिस ने दर्ज की प्राथमिकी, जांच में जुटी टीमें
इस मामले में सेक्टर-24 कोतवाली प्रभारी सुबोध कुमार ने बताया कि शिवाक्षी अग्रवाल की लिखित शिकायत के आधार पर पुलिस ने प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है। पुलिस की आईटी और साइबर सेल की टीमें इस मामले की जांच में जुट गई हैं। जिस नंबर से फोन आया था और जिस ऐप का इस्तेमाल कर कोड डलवाया गया था, उन सभी तकनीकी पहलुओं की बारीकी से जांच की जा रही है ताकि आरोपी प्रथम कुमार और उसके पीछे के गिरोह का पता लगाया जा सके।

