Join WhatsApp
Join NowMental peace and happiness: हम सभी के जीवन में कुछ ऐसे लोग जरूर होते हैं, जिनसे बात करना किसी युद्ध लड़ने से कम नहीं होता। चाहे वो दफ्तर का कोई सहकर्मी हो, कोई रिश्तेदार या फिर कोई तथाकथित दोस्त—कुछ लोगों का स्वभाव ही ऐसा होता है कि वे आपकी मानसिक शांति को भंग कर देते हैं। जब कोई हमें परेशान करता है, तो मन में गुस्सा, बेचैनी और चिड़चिड़ापन जमा होने लगता है।
Mukhyamantri Ayushman: राजस्थान में दुर्लभ बीमारियों से जूझ रहे बच्चों के लिए संजीवनी बूटी
लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी प्रतिक्रिया ही सामने वाले की सबसे बड़ी जीत होती है? मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि ‘मुश्किल लोगों’ (Difficult People) को संभालना एक कला है। आज हम आपको उन 6 जीवन बदलने वाले तरीकों के बारे में बताएंगे, जिनसे आप किसी भी जहरीले इंसान के व्यवहार का सामना बिना अपना आपा खोए कर सकते हैं।
PMJJBY: प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, दुर्घटना बीमा और वित्तीय सुरक्षा का माध्यम
1. हर किसी के सामने भड़ास न निकालें: सही ‘कान’ चुनें
जब हम परेशान होते हैं, तो हमारा मन करता है कि जो भी मिले उसे अपनी व्यथा सुना दें। लेकिन रुकिए! हर किसी के सामने मन हल्का करना उल्टा पड़ सकता है। गलत लोगों से अपनी बात साझा करने पर अक्सर बातें और बिगड़ जाती हैं या फिर वे आपकी कमजोरी का फायदा उठा सकते हैं।
क्या करें? अपनी परेशानी केवल उन लोगों से साझा करें जिन पर आपको अटूट भरोसा है—जैसे आपके माता-पिता, जीवनसाथी या कोई पुराना सच्चा दोस्त। जब आप किसी ऐसे व्यक्ति से बात करते हैं जो आपको वाकई समझता है, तो मस्तिष्क में तनाव पैदा करने वाले ‘कोर्टिसोल’ हार्मोन का स्तर कम होता है और आप बेहतर महसूस करते हैं।
2. व्यवहार के ‘पैटर्न’ को समझें और मानसिक ढाल तैयार करें
मुश्किल स्वभाव वाले लोग अक्सर एक ही ढर्रे पर चलते हैं। कोई हर बात में मीन-मेख निकालेगा, कोई हमेशा खुद को पीड़ित (Victim) दिखाएगा, तो कोई छोटी सी बात पर ज्वालामुखी की तरह फट पड़ेगा।
सीक्रेट मंत्र: अगर आप पहले से ही यह मान लें कि “यह व्यक्ति तो ऐसा ही व्यवहार करेगा,” तो आप मानसिक रूप से तैयार हो जाते हैं। जब आप सामने वाले के व्यवहार का अंदाजा पहले ही लगा लेते हैं, तो उसकी कड़वी बातें आपको अचानक से चोट नहीं पहुँचातीं। यह आपकी एक ‘इमोशनल शील्ड’ की तरह काम करता है।
3. प्रतिक्रिया (React) नहीं, जवाब (Respond) दें
यह सबसे महत्वपूर्ण सबक है। जब कोई आप पर चिल्लाता है, तो हमारा दिमाग ‘फाइट या फ्लाइट’ मोड में चला जाता है और हम भी पलटकर चिल्ला देते हैं। यहीं हम मात खा जाते हैं।
एक्सपर्ट सलाह: अगली बार जब कोई आप पर कटु टिप्पणी करे, तो तुरंत जवाब देने के बजाय एक लंबी गहरी सांस लें। 5 सेकंड का मौन रखें। यह मौन आपकी सबसे बड़ी ताकत है। शांत होकर पूछें, “आप ऐसा क्यों कह रहे हैं?” या “आपका मतलब क्या है?” आपकी शांति सामने वाले के गुस्से के गुब्बारे की हवा निकाल देगी। याद रखें, चुप रहना कमजोरी नहीं, बल्कि एक रणनीतिक जीत है।
4. अपनी ‘लक्ष्मण रेखा’ तय करें: सम्मान से समझौता नहीं
शांति का मतलब यह कतई नहीं है कि आप बदतमीजी सहते रहें। अगर कोई बार-बार आपकी सीमाओं को लांघ रहा है, तो उसे रोकना जरूरी है।
शब्दों का चुनाव: बिना चिल्लाए, साफ और कड़े शब्दों में कहें— “मुझे इस तरह से बात किया जाना पसंद नहीं है” या “कृपया मुझसे सम्मानपूर्वक बात करें।” जब आप शांत रहकर अपनी सीमाएं (Boundaries) तय करते हैं, तो सामने वाले को यह संदेश स्पष्ट चला जाता है कि वह आपके साथ क्या कर सकता है और क्या नहीं।
5. आप किसी के ‘थेरेपिस्ट’ नहीं हैं: खुद को दोष देना छोड़ें
अक्सर संवेदनशील लोग यह सोचने लगते हैं कि “शायद सामने वाला दुखी है इसलिए ऐसा कर रहा है” और वे उसे ठीक करने की कोशिश करने लगते हैं।
कड़वा सच: आप किसी के निजी डॉक्टर या थेरेपिस्ट नहीं हैं। हर वयस्क इंसान अपनी भावनाओं और व्यवहार के लिए खुद जिम्मेदार है। अगर कोई अपने फ्रस्ट्रेशन के कारण आपको निशाना बना रहा है, तो इसमें आपकी कोई गलती नहीं है। अपनी मानसिक शांति को प्राथमिकता दें और दूसरों के व्यवहार का बोझ अपने कंधों पर न उठाएं।
6. वहां से हट जाना कायरता नहीं, ‘सेल्फ-डिफेंस’ है
अगर स्थिति हाथ से निकल रही हो और माहौल बहुत ज्यादा नकारात्मक हो जाए, तो सबसे अच्छा तरीका है—विषय बदल दें या उस जगह से उठकर चले जाएं।
नया नजरिया: लोग सोचते हैं कि भाग जाना कमजोरी है, लेकिन असल में यह आत्मविश्वास और आत्म-सम्मान (Self-Respect) की निशानी है। हर लड़ाई लड़ना जरूरी नहीं होता। कभी-कभी खुद को उस जहरीले माहौल से दूर कर लेना ही सबसे बड़ी समझदारी और जीत होती है।














