Countries without 3G 4G 5G: दुनिया का इकलौता ‘Digital नरक’, 5G के दौर में इंटरनेट के लिए तरसते हैं लोग

Countries without 3G 4G 5G: आज के दौर में जहाँ दुनिया 6G की तैयारी कर रही है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) हमारे जीवन का हिस्सा बन चुका है, वहीं हमारे ही नक्शे पर एक ऐसा देश भी मौजूद है जो ‘डिजिटल युग’ से कोसों दूर है। हम बात कर रहे हैं अफ्रीकी देश इरिट्रिया (Eritrea) की। हैरान कर देने वाली बात यह है कि इरिट्रिया दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है जहाँ आज भी आम जनता के लिए 3G, 4G या 5G जैसी बुनियादी मोबाइल डेटा सेवा पूरी तरह से गायब है।

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मोबाइल सिर्फ नाम का, इंटरनेट है एक सपना!
इरिट्रिया में रहने वाले लोगों के लिए स्मार्टफोन महज एक डिब्बा है, जिसका इस्तेमाल वे केवल बेसिक वॉयस कॉल करने या एसएमएस (SMS) भेजने के लिए ही कर सकते हैं। यहाँ की सड़कों पर आपको लोग फोन तो लिए दिखेंगे, लेकिन कोई भी यूट्यूब पर वीडियो देखता या इंस्टाग्राम स्क्रॉल करता नजर नहीं आएगा। यहाँ मोबाइल डेटा न होना कोई तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि एक सरकारी व्यवस्था है।

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₹100 में एक घंटा इंटरनेट और वो भी कछुए की रफ्तार!
अब आप सोच रहे होंगे कि क्या यहाँ इंटरनेट बिल्कुल नहीं है? जवाब है—हाँ, लेकिन बहुत ही सीमित। इंटरनेट का उपयोग करने के लिए यहाँ के लोगों को कुछ सरकारी मंजूरी वाले ‘इंटरनेट कैफे’ पर निर्भर रहना पड़ता है। ये कैफे ज्यादातर देश की राजधानी ‘अस्मारा’ (Asmara) में ही स्थित हैं। हैरानी की बात तो यह है कि इन कैफे में इंटरनेट की स्पीड इतनी धीमी है कि एक साधारण ईमेल भेजने में भी काफी समय लग जाता है। और इसके लिए आपको भारी कीमत चुकानी पड़ती है—करीब ₹100 प्रति घंटा! एक औसत आय वाले व्यक्ति के लिए यह खर्च उठाना नामुमकिन जैसा है।

सरकार की ‘तीसरी आँख’ और प्राइवेसी का अंत
इरिट्रिया में इंटरनेट चलाना किसी जासूसी फिल्म के सीन जैसा है। इरिट्रिया सरकार का टेलीकम्युनिकेशन पर पूरा कंट्रोल है। अगर आप किसी इंटरनेट कैफे में जाते हैं, तो आपको अपनी आधिकारिक पहचान (ID Card) दिखानी होती है। आपकी हर ऑनलाइन एक्टिविटी, हर क्लिक और हर मैसेज पर सरकार की कड़ी नजर होती है। यहाँ प्राइवेसी शब्द का कोई वजूद नहीं है।

अपनों से बात करने के लिए महंगे इंटरनेशनल कॉल
व्हाट्सएप कॉल या मैसेंजर के बिना, विदेश में रहने वाले अपने रिश्तेदारों से संपर्क करने का यहाँ केवल एक ही जरिया है—इंटरनेशनल टेलीफोन कॉल। ये कॉल न केवल बेहद महंगे हैं, बल्कि अक्सर इनका कनेक्शन भी भरोसेमंद नहीं होता। फिर भी, बाहरी दुनिया से जुड़ने का यही सबसे सीधा रास्ता है।

सूचनाओं के लिए सैटेलाइट और प्रवासियों का सहारा
इरिट्रिया का स्थानीय मीडिया पूरी तरह से सरकार के नियंत्रण में है, जो वही दिखाता है जो सरकार चाहती है। ऐसे में बाहरी दुनिया की खबरें जानने के लिए कई परिवार चोरी-छिपे सैटेलाइट टेलीविजन (Satellite TV) पर निर्भर रहते हैं। इसके अलावा, इथोपिया, सूडान और यूरोप में रहने वाले इरिट्रिया के लाखों प्रवासी जब अपने घर लौटते हैं, तो वे अपने साथ नई दुनिया की खबरें, अपडेट्स और यहाँ तक कि विदेशों की यादें और ‘खुशियां’ भी लेकर आते हैं।

इरिट्रिया की यह कहानी हमें यह सोचने पर मजबूर कर देती है कि हम इंटरनेट और डिजिटल आजादी के कितने आदि हो चुके हैं। जहाँ हम एक मिनट नेट बंद होने पर परेशान हो जाते हैं, वहीं एक पूरा देश आज भी ‘डिजिटल ब्लैकआउट’ में जीने को मजबूर है।

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