Join WhatsApp
Join NowCBSE Board Exam: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने साल 2026 से लागू होने वाली अपनी नई शिक्षा नीति और परीक्षा प्रणाली को लेकर एक ऐसा फैसला सुनाया है, जिसने देश भर के छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों के बीच खलबली मचा दी है। अगर आपका बच्चा या आप खुद 2026 में 10वीं की बोर्ड परीक्षा देने वाले हैं, तो यह खबर आपके लिए सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। बोर्ड ने साफ कर दिया है कि अब “दो बोर्ड परीक्षा” का मतलब “मनमर्जी” नहीं होगा।
क्या है CBSE का नया फरमान?
अभी तक कई छात्रों और अभिभावकों के मन में यह धारणा थी कि अगर दो बोर्ड परीक्षाएं होंगी, तो वे अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी एक परीक्षा में बैठ सकेंगे। लेकिन सीबीएसई के परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज ने इस भ्रम को पूरी तरह से तोड़ दिया है। बोर्ड ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि 2026 से होने वाली पहली बोर्ड परीक्षा देना हर हाल में अनिवार्य (Compulsory) होगा।
पहली परीक्षा छोड़ी तो क्या होगा? (खतरे की घंटी)
सीबीएसई के नए नियमों के अनुसार, जो छात्र पहली बोर्ड परीक्षा (जो आमतौर पर फरवरी में शुरू होगी) में शामिल नहीं होंगे, उन्हें दूसरी बोर्ड परीक्षा में बैठने का मौका ही नहीं दिया जाएगा। बोर्ड को कई ऐसे आवेदन मिले थे जिनमें छात्रों ने मांग की थी कि उन्हें सीधे दूसरी परीक्षा में बैठने दिया जाए, लेकिन बोर्ड ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है।
इतना ही नहीं, अगर कोई छात्र पहली परीक्षा में बैठता तो है, लेकिन तीन या उससे ज्यादा विषय छोड़ देता है, तो उसे भी दूसरी परीक्षा के लिए अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा। ऐसे छात्रों को ‘Essential Repeat’ की श्रेणी में डाल दिया जाएगा, जिसका सीधा सा मतलब है— आपको पूरी 10वीं कक्षा दोबारा पढ़नी होगी और अगले साल फिर से मुख्य परीक्षा देनी होगी।
अंक सुधारने का सुनहरा मौका, लेकिन एक शर्त पर!
नई प्रणाली का मुख्य उद्देश्य छात्रों का तनाव कम करना और उन्हें बेहतर प्रदर्शन का मौका देना है। जो छात्र पहली बोर्ड परीक्षा में सफल हो जाएंगे, उनके पास दूसरी परीक्षा में अपने मार्क्स सुधारने (Improvement) का शानदार मौका होगा।
-
छात्र विज्ञान, गणित, सामाजिक विज्ञान और भाषाओं में से किन्हीं भी तीन विषयों में अपने अंक सुधारने के लिए दूसरी परीक्षा दे सकते हैं।
-
यह उनके लिए वरदान है जो किसी कारणवश पहले प्रयास में अपना सर्वश्रेष्ठ नहीं दे पाए। लेकिन याद रहे, इस वरदान का लाभ उठाने के लिए पहली परीक्षा की दहलीज लांघना जरूरी है।
अभिभावकों और छात्रों को अब क्या करना चाहिए?
इस नए नियम के बाद अब छात्रों को अपनी रणनीति बदलनी होगी। अब आप पहली परीक्षा को ‘ट्रायल’ या ‘ऑप्शनल’ समझने की गलती नहीं कर सकते।
-
गंभीरता दिखाएं: पहली परीक्षा को ही फाइनल मानकर तैयारी करें।
-
हाजिरी सुनिश्चित करें: किसी भी हाल में परीक्षा न छोड़ें, क्योंकि मेडिकल इमरजेंसी के मामलों में भी बोर्ड के कड़े नियम हो सकते हैं।
-
रणनीति बनाएं: पहले प्रयास में सभी विषयों में पास होने का लक्ष्य रखें, ताकि दूसरे प्रयास में आप केवल उन विषयों पर ध्यान दे सकें जिनमें आपके नंबर कम रह गए हों।
सीबीएसई का यह कदम शिक्षा के स्तर को सुधारने और छात्रों को अधिक अवसर प्रदान करने के लिए है, लेकिन अनुशासन के साथ। तो तैयार हो जाइए, क्योंकि 2026 की बोर्ड परीक्षा अब पहले से कहीं ज्यादा चुनौतीपूर्ण और रोमांचक होने वाली है…















