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Join NowRaghav Chadha joins BJP: राजनीति के बारे में एक बात हमेशा कही जाती है कि यहाँ कोई भी स्थायी दोस्त या दुश्मन नहीं होता। और रातों-रात बाजी कैसे पलटती है, इसका सबसे ताज़ा उदाहरण हमें दिल्ली की सियासत में देखने को मिला है। सोचिए, एक तरफ आम आदमी पार्टी (AAP) आने वाले चुनावों की तैयारियों में जुटी थी, और दूसरी तरफ पार्टी के सबसे भरोसेमंद माने जाने वाले राघव चड्ढा समेत 7 राज्यसभा सांसदों ने पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया!
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इस सियासी भूचाल के बाद आम आदमी पार्टी के अंदर खलबली मची हुई है। संकट की इस घड़ी में डैमेज कंट्रोल करने के लिए पार्टी के दो सबसे बड़े चेहरे— अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया ने आधी रात को एक अहम सीक्रेट मीटिंग की। आइए, एकदम आसान भाषा में समझते हैं कि आखिर पर्दे के पीछे क्या चल रहा है और AAP का अगला कदम क्या होने वाला है।
आखिर हुआ क्या है? (एक झटके में कैसे गई आधी ताकत)
राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के कुल 10 सांसद थे। इनमें से 7 सांसदों ने एक साथ पार्टी छोड़ने का ऐलान कर दिया। इनमें राघव चड्ढा, संदीप पाठक, और अशोक मित्तल जैसे वो बड़े नाम शामिल हैं, जो कभी अरविंद केजरीवाल के बेहद करीबी और पार्टी के रणनीतिकार माने जाते थे। इन नेताओं ने खुलेआम बीजेपी मुख्यालय जाकर सदस्यता ले ली।
इस घटना ने पार्टी को झकझोर कर रख दिया है। जैसे ही यह खबर फैली, पूरी दिल्ली से लेकर पंजाब तक की राजनीति में हड़कंप मच गया। अब सवाल यह था कि इस ‘ऑपरेशन’ से पार्टी को कैसे उबारा जाए?
आधी रात को केजरीवाल-सिसोदिया की इमरजेंसी मीटिंग
पार्टी में मची इस भगदड़ को रोकने और आगे की रणनीति तय करने के लिए मनीष सिसोदिया ने तुरंत मोर्चा संभाला। सूत्रों के मुताबिक, मनीष सिसोदिया गुजरात के राजकोट में नगर निगम चुनाव का प्रचार कर रहे थे। खबर मिलते ही वे तुरंत दिल्ली लौटे।
रात को एयरपोर्ट से उतरते ही सिसोदिया अपने घर जाने के बजाय सीधे अरविंद केजरीवाल के आवास पर पहुंच गए। दोनों पुराने दोस्तों और पार्टी के शीर्ष नेताओं के बीच आधे घंटे से ज्यादा समय तक बंद कमरे में बातचीत हुई। एक आम आदमी की तरह सोचें, तो यह वैसा ही था जैसे घर में अचानक कोई बड़ी मुसीबत आ जाए और घर के बड़े सदस्य बैठकर यह तय करें कि “अब आगे क्या करना है?” इस मीटिंग में 7 सांसदों के जाने से होने वाले नुकसान और पार्टी के ‘प्लान बी’ (Plan B) पर गहन चर्चा की गई।
क्या है AAP का ‘प्लान बी’? राज्यसभा सभापति को जाएगी चिट्ठी
आम आदमी पार्टी अब हाथ पर हाथ धरे बैठने के मूड में नहीं है। पार्टी ने कानूनी दांव-पेच का इस्तेमाल करते हुए बागी सांसदों पर पलटवार करने की तैयारी कर ली है।
पार्टी के सूत्रों का कहना है कि राज्यसभा में AAP के ‘चीफ व्हिप’ (मुख्य सचेतक) एनडी गुप्ता जल्द ही राज्यसभा के सभापति को एक आधिकारिक शिकायत पत्र (Letter) सौंपने वाले हैं। इसके साथ ही सीनियर नेता संजय सिंह ने भी ऐलान किया है कि वे सभापति को लेटर लिखकर इन नेताओं की सदस्यता रद्द करने की मांग करेंगे।
कानूनी पेंच: दल-बदल कानून (Anti-Defection Law) का सहारा
पार्टी की रणनीति बहुत साफ है। वे संविधान की 10वीं अनुसूची यानी ‘दल-बदल विरोधी कानून’ के तहत राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल की राज्यसभा सदस्यता खत्म करवाना चाहते हैं।
लेकिन यहाँ एक बड़ा पेच है!
नियम के मुताबिक, अगर किसी पार्टी के दो-तिहाई (2/3) सांसद एक साथ पार्टी छोड़ते हैं, तो उन पर दल-बदल कानून लागू नहीं होता (इसे विलय या मर्जर माना जाता है)। AAP के 10 में से 7 सांसद गए हैं, जो दो-तिहाई से ज्यादा है।
तो फिर AAP शिकायत क्यों कर रही है? दरअसल, AAP का तर्क है कि 7 में से सिर्फ 3 नेता (राघव, संदीप, अशोक) ही खुलेआम कैमरे के सामने बीजेपी दफ्तर में पार्टी जॉइन करते हुए दिखे हैं। बाकी 4 नेता अभी पब्लिक डोमेन में ऐसा करते नहीं दिखे हैं। इसलिए AAP फिलहाल इन 3 नेताओं को टारगेट करके उनकी सांसदी रद्द करवाने की पूरी कोशिश कर रही है।
आगे क्या होगा?
अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती अपनी पार्टी के बाकी बचे नेताओं और कार्यकर्ताओं का मनोबल बनाए रखने की है। पंजाब और दिल्ली के आने वाले चुनावों से ठीक पहले हुए इस फेरबदल ने AAP के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि राज्यसभा के सभापति AAP की इस चिट्ठी पर क्या एक्शन लेते हैं और क्या बागी सांसदों की सदस्यता बच पाती है या नहीं। राजनीति के इस शह-मात के खेल में आगे जो भी होगा, उसकी पूरी जानकारी हम आप तक इसी तरह आसान भाषा में पहुंचाते रहेंगे।









