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Join NowIndian Railways Coach : क्या आप भी ट्रेन में सफर करते हैं? अगर हाँ, तो आपने अक्सर अपने टिकट या ट्रेन के डिब्बों (कोच) के बाहर S1, B1, A1 या H1 जैसे कुछ खास कोड्स लिखे देखे होंगे। जब हम रिजर्वेशन कराते हैं, तो हमारे टिकट पर भी बर्थ नंबर के साथ यही कोड छपकर आता है।
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि रेलवे इन कोड्स का इस्तेमाल क्यों करता है और इनका असली मतलब क्या होता है? कई बार जानकारी न होने पर यात्री अपना डिब्बा खोजने में कंफ्यूज हो जाते हैं। आज हम आपको बिल्कुल आसान भाषा में समझाएंगे कि भारतीय रेलवे (Indian Railways) में S1 से लेकर H1 तक कुल 9 कैटिगरी के कोच का क्या मतलब होता है। इसे पढ़ने के बाद आप अपनी टिकट देखते ही बता देंगे कि आपका सफर कैसा होने वाला है…
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ट्रेन के डिब्बों पर ये कोड्स क्यों लिखे होते हैं?
भारतीय रेलवे दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्क्स में से एक है। एक लंबी ट्रेन में जनरल, स्लीपर, एसी और सामान रखने वाले कई तरह के डिब्बे होते हैं। यात्रियों की सुविधा के लिए रेलवे हर क्लास के डिब्बे को एक खास अंग्रेजी अक्षर (Alphabet) और नंबर देता है। इससे यात्रियों को भीड़भाड़ वाले रेलवे स्टेशन पर अपना कोच ढूंढने में आसानी होती है।
S1 से लेकर H1 तक: जानिए रेलवे के 9 प्रमुख कोच का मतलब
चलिए एक-एक करके ट्रेन के सभी 9 प्रमुख कोच कैटिगरी को डिकोड करते हैं:
1. स्लीपर क्लास (S1, S2, S3…)
अगर आपके टिकट पर S1, S2 या S10 लिखा है, तो इसका मतलब है कि आपका रिजर्वेशन ‘स्लीपर क्लास’ (Sleeper Class) में है। यह नॉन-एसी (बिना एसी वाला) कोच होता है, जिसमें आप लेटकर सफर कर सकते हैं। आम आदमी सबसे ज्यादा इसी कोच में सफर करता है क्योंकि इसका किराया काफी किफायती होता है।
2. थर्ड एसी / AC 3-Tier (B1, B2, B3…)
अगर कोच के बाहर B1, B2 या B3 लिखा है, तो यह ‘थर्ड एसी’ कोच है। यह पूरी तरह से वातानुकूलित (AC) होता है। इसमें एक तरफ तीन सीटें (Lower, Middle, Upper) और साइड में दो सीटें (Side Lower, Side Upper) होती हैं। मध्यवर्गीय परिवारों के लिए एसी में सफर करने का यह सबसे लोकप्रिय विकल्प है।
3. थर्ड एसी इकोनॉमी (M1, M2, M3…)
यह रेलवे का नया और अपडेटेड कोच है। अगर डिब्बे पर M1 या M2 लिखा है, तो यह ‘थर्ड एसी इकोनॉमी’ क्लास है। इसमें थर्ड एसी (B1, B2) के मुकाबले थोड़ी ज्यादा सीटें होती हैं, जिस कारण इसका किराया रेगुलर थर्ड एसी से थोड़ा सस्ता होता है।
4. सेकंड एसी / AC 2-Tier (A1, A2, A3…)
A1 या A2 लिखे हुए डिब्बे ‘सेकंड एसी’ के होते हैं। यह थर्ड एसी से ज्यादा आरामदायक होता है क्योंकि इसमें मिडल बर्थ (बीच वाली सीट) नहीं होती। एक तरफ सिर्फ दो सीटें (अपर और लोअर) होती हैं। इसमें यात्रियों को प्राइवेसी के लिए पर्दे भी मिलते हैं और भीड़ कम होती है।
5. फर्स्ट एसी / AC 1st Class (H1, H2…)
यह ट्रेन का सबसे महंगा और वीआईपी (VIP) कोच होता है। अगर डिब्बे पर H1 या H2 लिखा है, तो समझ जाइए कि यह ‘फर्स्ट एसी’ है। इसमें कोई खुला हिस्सा नहीं होता, बल्कि प्राइवेट केबिन बने होते हैं (2 या 4 बर्थ वाले)। इन केबिन का दरवाजा आप अंदर से लॉक कर सकते हैं। इसकी टिकट कई बार फ्लाइट की टिकट जितनी महंगी होती है।
6. एसी चेयर कार (C1, C2, C3…)
शताब्दी एक्सप्रेस या इंटरसिटी जैसी दिन में चलने वाली ट्रेनों में आपको C1 या C2 कोड देखने को मिलेंगे। इसका मतलब है ‘एसी चेयर कार’ (AC Chair Car)। इसमें लेटने के लिए बर्थ नहीं होती, बल्कि बस या फ्लाइट की तरह बैठने के लिए आरामदायक कुर्सियां (3×2 के फॉर्मूले पर) होती हैं।
7. एग्जीक्यूटिव चेयर कार (E1, E2…)
अगर टिकट पर E1 या E2 लिखा है, तो यह ‘एग्जीक्यूटिव चेयर कार’ है। यह नॉर्मल चेयर कार (C1) से ज्यादा प्रीमियम और महंगी होती है। इसमें पैर फैलाने के लिए ज्यादा जगह (Legroom) मिलती है और सीटें 2×2 के पैटर्न में लगी होती हैं।
8. सेकंड सीटिंग / 2S (D1, D2, D3…)
अगर आपके डिब्बे पर D1 या D2 लिखा है, तो यह नॉन-एसी सिटिंग कोच है। इसमें सिर्फ बैठने की जगह होती है। जनरल डिब्बे से यह अलग इसलिए है क्योंकि इसमें सफर करने के लिए आपके पास रिजर्वेशन होना जरूरी है और आपको आपकी फिक्स सीट मिलती है।
9. हाइब्रिड / कंपोजिट कोच (HA1…)
कई बार कुछ ट्रेनों में आपको HA1 लिखा हुआ डिब्बा दिखेगा। इसका मतलब होता है कि यह एक ‘हाइब्रिड कोच’ है। इस एक ही डिब्बे को दो हिस्सों में बांटा जाता है— आधा डिब्बा फर्स्ट एसी (1st AC) का होता है और आधा डिब्बा सेकंड एसी (2nd AC) का।
कुछ अन्य जरूरी कोड्स जो आपको पता होने चाहिए
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GS या UR: इसका मतलब जनरल डिब्बा (General Seating/Unreserved) है। इसमें कोई भी चालू टिकट लेकर पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर बैठ सकता है।
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SLR: इसका मतलब सिटिंग कम लगेज रेक (Seating cum Luggage Rake) है। इसका आधा हिस्सा गार्ड और रेलवे के सामान के लिए होता है, और कुछ हिस्सा दिव्यांगजनों या जनरल यात्रियों के लिए होता है।
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EOG: ये पावर कार (End on Generation) होती है, जो ट्रेन के सबसे आगे या पीछे लगती है और पूरी ट्रेन में बिजली सप्लाई करती है।
अगली बार जब आप ट्रेन का सफर करें, तो स्टेशन पर खड़े होकर डिब्बों के कोड्स जरूर देखिएगा। अब आप इन कोड्स (S1 से लेकर H1 तक) का मतलब अच्छे से जानते हैं। रेलवे की यह शानदार कोडिंग व्यवस्था हमारे सफर को आसान और टेंशन-फ्री बनाती है। आपको यह जानकारी कैसी लगी? अगली बार आप किस क्लास में सफर करने वाले हैं, यह जरूर सोचिएगा!










