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Join NowUniform Civil Code India: भारत में इन दिनों समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर बहस अपने चरम पर है। सरकार और समाज के बीच यह सवाल लगातार उठ रहा है कि क्या देश में सभी धर्मों के लिए एक समान कानून लागू होना चाहिए। इसी बीच लोगों के मन में यह जिज्ञासा भी बढ़ रही है कि क्या भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान में भी ऐसा कोई कानून मौजूद है या नहीं।
भारत में UCC क्या है और क्यों हो रही है चर्चा?
भारत में Uniform Civil Code (UCC) का मतलब है कि विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे मामलों में सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून हो, चाहे उनका धर्म कोई भी हो। यह प्रावधान भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 में नीति निर्देशक तत्वों के रूप में शामिल है।
हाल के वर्षों में UCC को लेकर बहस तेज हुई है, खासकर तब जब उत्तराखंड ने 2025 में इसे लागू कर एक ऐतिहासिक कदम उठाया। इसके अलावा गुजरात में भी इसे लेकर विधायी पहल देखी गई है। वहीं गोवा में पहले से ही एक तरह का कॉमन सिविल कोड लागू है, जो पुर्तगाली शासनकाल से चला आ रहा है।
UCC का मुख्य उद्देश्य:
- लैंगिक समानता (Gender Equality) को बढ़ावा देना
- धर्म आधारित भेदभाव को खत्म करना
- सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार सुनिश्चित करना
पाकिस्तान में क्यों नहीं है UCC?
पाकिस्तान एक इस्लामिक राष्ट्र है, जहां की पूरी कानूनी व्यवस्था धार्मिक सिद्धांतों पर आधारित है। यहां भारत की तरह Uniform Civil Code का कोई प्रावधान नहीं है।
पाकिस्तान में:
- कानून धर्म के आधार पर तय होते हैं
- मुसलमानों के लिए अलग नियम
- हिंदू, ईसाई और सिख समुदायों के लिए अलग पर्सनल लॉ
यानी वहां एक समान नागरिक कानून के बजाय धार्मिक विविधता के आधार पर अलग-अलग कानूनी ढांचा लागू है।
मुस्लिम पर्सनल लॉ और निकाहनामा
पाकिस्तान में मुसलमानों के लिए Muslim Family Laws Ordinance 1961 (MFLO) सबसे महत्वपूर्ण कानून है। इसके तहत:
- निकाहनामा (Marriage Contract) का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है
- बहुविवाह की अनुमति है, लेकिन शर्तों के साथ
- पहली पत्नी की सहमति और स्थानीय काउंसिल की मंजूरी जरूरी होती है
यह नियम पारिवारिक संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से बनाए गए हैं।
तलाक और विरासत के नियम
पाकिस्तान में तलाक की प्रक्रिया भी धर्म आधारित है:
- पुरुष ‘तलाक-ए-अहसान’ के जरिए तलाक दे सकता है
- महिला ‘खुला’ के जरिए कोर्ट से तलाक मांग सकती है
- संपत्ति और विरासत के नियम शरिया कानून पर आधारित होते हैं
अल्पसंख्यकों के लिए अलग कानून
पाकिस्तान में गैर-मुस्लिम समुदायों के लिए अलग कानून लागू हैं:
- हिंदुओं के लिए ‘Hindu Marriage Act 2017’
- सिंध में ‘Sindh Hindu Marriage Act 2016’
- ईसाइयों के लिए ‘Christian Marriage Act 1872’ और ‘Divorce Act 1869’
हालांकि, इन कानूनों को आधुनिक बनाने की मांग लगातार उठती रही है क्योंकि कई नियम आज भी औपनिवेशिक दौर के हैं।
जहां भारत में UCC को एक आधुनिक और समानता आधारित सुधार के रूप में देखा जा रहा है, वहीं पाकिस्तान में अब भी धार्मिक कानूनों पर आधारित अलग-अलग पर्सनल लॉ ही लागू हैं। दोनों देशों की कानूनी सोच और सामाजिक ढांचे में यही सबसे बड़ा अंतर है।









