Join WhatsApp
Join NowNitish Kumar: बिहार की राजनीति में पिछले दो दशकों से एक ही नाम गूंजता रहा है—नीतीश कुमार। लेकिन अब वक्त बदल चुका है। दो दशक तक बिहार के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर काबिज रहने के बाद, नीतीश कुमार ने अब पटना की गलियों को छोड़ दिल्ली के गलियारों यानी राज्यसभा का रुख कर लिया है। उनके इस फैसले ने न केवल बिहार की सियासत में हलचल मचा दी है, बल्कि जनता के मन में भी कई बड़े सवाल छोड़ दिए हैं।
Nitin Nabin: क्या सच में बनेगा ‘सोनार बांग्ला’? बंगाल की राजनीति में आया नया भूचाल
इस्तीफे के बाद का सस्पेंस: कौन बनेगा उत्तराधिकारी?
नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद और विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद बिहार में सत्ता का समीकरण बदल गया है। बीजेपी के सम्राट चौधरी अब मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, वहीं जेडीयू कोटे से विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव को उपमुख्यमंत्री बनाया गया है। लेकिन सबसे बड़ा सस्पेंस अभी भी बरकरार है— “जेडीयू विधानमंडल दल का नेता कौन होगा?”
नीतीश कुमार पिछले 20 सालों से खुद इस पद की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। अब उनके जाने के बाद जेडीयू के अंदर नंबर दो की पोजीशन के लिए होड़ मची है।
1 अणे मार्ग पर होने वाली महाबैठक पर टिकी सबकी निगाहें
बिहार के सियासी गलियारों में इस वक्त सबसे ज्यादा चर्चा सोमवार को होने वाली जेडीयू की बैठक की है। यह बैठक नीतीश कुमार के सरकारी आवास, 1 अणे मार्ग पर बुलाई गई है। इसमें जेडीयू के सभी विधायक, विधान परिषद सदस्य और पार्टी के दिग्गज नेता शामिल होंगे। इस बैठक का एकमात्र एजेंडा है—नया नेता चुनना। एमएलसी संजय गांधी ने साफ कर दिया है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार, संजय झा और उमेश कुशवाहा की मौजूदगी में यह तय होगा कि पार्टी का भविष्य किसके हाथों में सुरक्षित है।
रेस में कौन-कौन है शामिल?
जेडीयू के अंदर फिलहाल तीन बड़े चेहरों के नाम हवा में तैर रहे हैं:
-
विजय कुमार चौधरी: जो फिलहाल उपमुख्यमंत्री हैं और नीतीश कुमार के बेहद करीबी माने जाते हैं। उनके पास अनुभव और सलीका दोनों है।
-
बिजेंद्र प्रसाद यादव: पार्टी के सबसे वरिष्ठ नेताओं में से एक। उनकी साख और संगठन पर पकड़ उन्हें इस दौड़ में आगे रखती है।
-
श्रवण कुमार: अचानक से रेस में उभरा एक ऐसा नाम जो सबको चौंका सकता है।
जेडीयू में ‘नंबर 2’ की अहमियत क्यों है?
जेडीयू इस वक्त बिहार में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है। विधानसभा में 85 और विधान परिषद में 20 से अधिक सदस्यों के साथ जेडीयू का वजूद बिहार की राजनीति की दिशा तय करता है। ऐसे में जो भी विधानमंडल दल का नेता चुना जाएगा, उसे नीतीश कुमार की विरासत को आगे बढ़ाना होगा। यह सिर्फ एक पद नहीं है, बल्कि यह इस बात का संकेत होगा कि नीतीश कुमार के बाद जेडीयू में सबसे ताकतवर चेहरा कौन है।
निष्कर्ष: क्या यह फैसला जेडीयू की दिशा बदल देगा?
नीतीश कुमार का दिल्ली जाना जेडीयू के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत है। क्या नया नेता पार्टी को एकजुट रख पाएगा? क्या बीजेपी के साथ गठबंधन में जेडीयू अपनी धमक बरकरार रख पाएगी? इन सभी सवालों के जवाब सोमवार की बैठक के बाद मिल जाएंगे। बिहार की जनता और राजनीतिक पंडितों की सांसें इस वक्त अटकी हुई हैं, क्योंकि यह फैसला सिर्फ सदन का नेता नहीं, बल्कि जेडीयू की अगली राजनीतिक दिशा तय करेगा।










