UP Politics:
उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में इस वक्त एक ही चर्चा जोरों पर है—”योगी कैबिनेट का विस्तार और बड़े पैमाने पर फेरबदल”। माना जा रहा है कि 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपनी टीम में ऐसी ‘सर्जरी’ करने जा रहे हैं, जिसकी कल्पना शायद ही किसी ने की हो। सूत्रों की मानें तो यूपी में ‘गुजरात मॉडल’ लागू होने वाला है, जहाँ रातों-रात लगभग पूरी कैबिनेट बदल दी गई थी।
70 फीसदी मंत्रियों पर गिरेगी गाज!
लखनऊ से दिल्ली तक चल रही बैठकों के दौर से जो खबरें छनकर आ रहे हैं, वो मौजूदा मंत्रियों की धड़कनें बढ़ाने वाली हैं। चर्चा है कि योगी सरकार के 70 फीसदी से ज्यादा मंत्री बदले जा सकते हैं। विशेष रूप से वे चेहरे जो 2017 से लगातार मंत्री पद पर बने हुए हैं या जिन्होंने 2022 में दूसरी बार शपथ ली थी, उनकी कुर्सी पर खतरा मंडरा रहा है। बीजेपी आलाकमान का मानना है कि नए चेहरों को मौका देकर जनता के बीच एक नई ऊर्जा और ‘एंटी-इंकंबेंसी’ को कम करने का संदेश दिया जा सकता है।
कुर्मी समाज का बढ़ेगा दबदबा?
यूपी बीजेपी की कमान कुर्मी समाज से आने वाले पंकज चौधरी को सौंपने के बाद अब कैबिनेट में भी इसी जाति समीकरण का बोलबाला दिख सकता है। जानकारों का कहना है कि आगामी विस्तार में कुर्मी समाज के 2 से 3 नए नेताओं को कैबिनेट मंत्री बनाया जा सकता है। यह कदम 2027 की चुनावी बिसात बिछाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
इन दिग्गजों की हो सकती है एंट्री: पंकज सिंह और आकाश सक्सेना रेस में आगे
नए मंत्रिमंडल में शामिल होने वाले संभावित नामों ने सबको चौंका दिया है। सूत्रों के मुताबिक, सबसे बड़ा नाम रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बेटे पंकज सिंह का है, जिन्हें बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। इसके अलावा रामपुर में आजम खान के किले को ढहाने वाले विधायक आकाश सक्सेना और अलीगढ़ के कुंवर जयवीर सिंह के नामों की भी प्रबल चर्चा है।
संभावित नए चेहरों की लिस्ट:
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साध्वी निरंजन ज्योति: केंद्रीय राजनीति के बाद अब यूपी में सक्रिय हो सकती हैं।
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महेंद्र सिंह: पूर्व मंत्री जिनकी दोबारा कैबिनेट में वापसी के संकेत मिल रहे हैं।
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मनोज पांडेय और पूजा पाल: विपक्षी खेमे से आए कद्दावर चेहरों को इनाम मिल सकता है।
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भूपेंद्र सिंह चौधरी और अशोक कटारिया: संगठन के पुराने खिलाड़ियों को सरकार में जगह मिल सकती है।
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अन्य नाम: कृष्णा पासवान, राम रतन कुशवाहा और पद्मसेन चौधरी भी रेस में शामिल हैं।
मकर संक्रांति के बाद ‘महा-बदलाव’
बीते दिनों यूपी बीजेपी अध्यक्ष पंकज चौधरी और फिर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दिल्ली में हाईकमान के साथ हुई मुलाकातों ने इस फेरबदल पर मुहर लगा दी है। अब बस इंतजार है तो सही समय का। माना जा रहा है कि मकर संक्रांति (14-15 जनवरी) के शुभ अवसर के बाद किसी भी दिन नई कैबिनेट का ऐलान हो सकता है। बीजेपी संगठन से सरकार में किसे लाना है और सरकार से किसे संगठन में भेजना है, इसकी फाइनल लिस्ट तैयार हो चुकी है।
2027 का लक्ष्य: संगठन और सरकार का नया तालमेल
यूपी में फिलहाल सीएम योगी के साथ 54 मंत्रियों की जम्बो टीम है, जिसमें केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक जैसे दिग्गज उपमुख्यमंत्री शामिल हैं। लेकिन 2027 की चुनौती को देखते हुए बीजेपी अब ‘परफॉरमेंस’ को ही पैमाना बना रही है। जो मंत्री जनता की उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे या जिनके विभागों में काम सुस्त रहा, उनका पत्ता कटना लगभग तय है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में आने वाला यह हफ्ता बेहद ऐतिहासिक होने वाला है। क्या योगी आदित्यनाथ ‘गुजरात मॉडल’ अपनाकर सबको हैरान करेंगे? या फिर कुछ पुराने दिग्गजों को बचा लिया जाएगा? इसका जवाब जल्द ही सबके सामने होगा।

