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Join NowLohri 2026: सर्दियों की ठिठुरती रात, ढोल की थाप, आग की लपटें और ‘सुंदर मुंदरिये’ के लोकगीत… जी हां, यह जादू है लोहड़ी (Lohri) के त्योहार का। पंजाब और उत्तर भारत में मनाया जाने वाला यह पर्व सिर्फ नाच-गाने का जरिया नहीं है, बल्कि इसके पीछे प्रकृति और सेहत का एक गहरा विज्ञान छुपा हुआ है।
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अक्सर लोग सोचते हैं कि लोहड़ी बस आग के चारों ओर घूमने का नाम है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हम इस पवित्र अग्नि में कीमती अनाज और मेवे क्यों अर्पित करते हैं? आइए जानते हैं लोहड़ी से जुड़ी उन परंपराओं के बारे में जो आज भी हमारी जड़ों को मजबूती से थामे हुए हैं।
खेती और प्रकृति का अनूठा संगम
लोहड़ी का सीधा संबंध हमारी धरती और किसानों की मेहनत से है। यह रबी की फसल (Rabi Crops) की कटाई का समय होता है। किसान अपनी लहलहाती फसल को देख खुश होते हैं और प्रकृति को धन्यवाद देने के लिए अलाव (Bonfire) जलाते हैं। परिवार और दोस्त इस अलाव के चारों ओर इकट्ठा होते हैं, भांगड़ा और गिद्दा करते हैं और अग्नि देव को अपनी नई फसल का अंश समर्पित करते हैं।
रेवड़ी और गजक: सिर्फ स्वाद नहीं, सेहत का खजाना
लोहड़ी के जश्न में रेवड़ी का जिक्र न हो, ऐसा मुमकिन नहीं। तिल, गुड़ और शुद्ध घी से बनी यह कुरकुरी मिठाई सर्दियों में शरीर के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।
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तिल और गुड़: ये दोनों ही शरीर को अंदरूनी गर्मी प्रदान करते हैं।
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ऊर्जा का स्रोत: ठंड के मौसम में जब ऊर्जा का स्तर गिरता है, तब रेवड़ी और गजक हमें तुरंत स्फूर्ति देती हैं। यही वजह है कि इसे अपनों में बांटना बेहद शुभ और प्रेम बढ़ाने वाला माना जाता है।
वहीं, गजक भी लोहड़ी की खास पहचान है। यह तिल और गुड़ के मेल से बनी ऐसी मिठाई है जो लंबे समय तक खराब नहीं होती। इसके सेवन से हड्डियों को मजबूती मिलती है और शरीर कड़ाके की ठंड से लड़ने के लिए तैयार होता है।
सरसों का साग और मक्के की रोटी: लोहड़ी की आत्मा
अगर आप किसी पंजाबी घर में लोहड़ी मना रहे हैं, तो सरसों का साग और मक्के की रोटी के बिना थाली अधूरी है। ताजी सरसों, पालक और बथुआ को धीमी आंच पर घंटों पकाकर तैयार किया गया साग, और उस पर पिघलता हुआ सफेद मक्खन… यह सिर्फ भोजन नहीं, एक एहसास है। मक्के की रोटी के साथ इसका मेल सर्दियों में शरीर को अद्भुत ताकत और पोषण देता है।
तिल के लड्डू और अग्नि को अर्पण
तिल के लड्डू का महत्व लोहड़ी और मकर संक्रांति दोनों में बहुत ज्यादा है। पुराने समय से ही परंपरा रही है कि तिल और गुड़ से बने लड्डू सबसे पहले पवित्र अग्नि को अर्पित किए जाते हैं। मान्यता है कि अग्नि में तिल डालने से घर में सुख-शांति आती है और दरिद्रता दूर होती है। बाद में इसे प्रसाद के रूप में बांटा जाता है।
अलाव में मूंगफली और पॉपकॉर्न का रहस्य
लोहड़ी की सबसे मजेदार रस्म है अलाव में मूंगफली और पॉपकॉर्न डालना। जब आग में मूंगफली के चटकने की आवाज आती है, तो वह माहौल में एक अलग ही उमंग भर देती है। लोग आग के चारों ओर घूमते हुए “आदर आए, दलिदर जाए” (समृद्धि आए, गरीबी जाए) की कामना करते हैं। बाद में उन्हीं भुनी हुई मूंगफली और पॉपकॉर्न का आनंद ढोल की थाप पर लिया जाता है। लोहड़ी का त्योहार हमें सिखाता है कि हम चाहे कितनी भी आधुनिकता में जी लें, हमारी खुशियां आज भी प्रकृति और आपसी भाईचारे में ही बसी हैं। इस बार जब आप लोहड़ी की आग के चारों ओर घूमें, तो याद रखिएगा कि वह सिर्फ आग नहीं, बल्कि हमारी परंपराओं की वह मशाल है जो पीढ़ियों से जलती आ रही है।















