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Join NowUP Voter List 2026: उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों एक ऐसी हलचल मची है जिसने बड़े-बड़े राजनीतिक दिग्गजों की नींद उड़ा दी है। यूपी में 2026 के विधानसभा चुनावों की आहट के बीच, मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण (UP Voter List Revision 2026) का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। 6 जनवरी 2026 को जैसे ही पहला ड्राफ्ट रोल जारी हुआ, उसके बाद जो आंकड़े सामने आए हैं, वे न केवल हैरान करने वाले हैं बल्कि उत्तर प्रदेश की बदलती राजनीतिक चेतना की ओर भी इशारा कर रहे हैं।
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वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने की मची होड़: 11 जनवरी को टूटा रिकॉर्ड
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी ताज़ा बुलेटिन के अनुसार, जनवरी के दूसरे हफ्ते में वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने (Voter ID Registration) की प्रक्रिया ने बिजली जैसी रफ्तार पकड़ ली है। चौंकाने वाली बात यह है कि जहाँ राजनीतिक दल (BJP, SP, BSP, Congress) इस मामले में सुस्त नजर आ रहे हैं, वहीं यूपी की जनता ने खुद कमान संभाल ली है।
आंकड़ों की गहराई में जाएं तो 7 जनवरी से 11 जनवरी 2026 के बीच जो हुआ, उसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी:
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7 जनवरी: ड्राफ्ट रोल जारी होने के पहले दिन जनता की ओर से एक भी आवेदन नहीं आया।
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8 जनवरी: अचानक लहर उठी और 30,663 लोगों ने सीधे आवेदन किया।
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10 जनवरी: यह संख्या तीन गुना बढ़कर 92,456 तक पहुंच गई।
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11 जनवरी: इस दिन ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए, जब 1,26,984 लोगों ने खुद आगे बढ़कर मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए आवेदन किया।
राजनीतिक दलों की ‘सुस्ती’ या जनता का ‘अविश्वास’?
एक तरफ जहाँ आम आदमी अपने वोट की ताकत को समझ रहा है, वहीं भारतीय जनता पार्टी (BJP), समाजवादी पार्टी (SP), और कांग्रेस जैसी बड़ी पार्टियों के बीएलए (BLA) सुस्त पड़ते दिख रहे हैं।
निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त 5 लाख 76 हजार से ज्यादा बीएलए के माध्यम से नाम जोड़ने के दावे बहुत धीमी गति से बढ़ रहे हैं। 11 जनवरी तक के आंकड़े कुछ इस प्रकार हैं:
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बीजेपी (BJP): 1,458 दावे
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सपा (SP): 268 दावे
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बसपा (BSP): 108 दावे
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कांग्रेस (Congress): 85 दावे
हैरानी की बात यह है कि बीजेपी और सपा एक-दूसरे पर फर्जी वोटर शामिल कराने के आरोप तो लगा रहे हैं, लेकिन रिकॉर्ड बताते हैं कि किसी भी दल ने नाम हटाने (Deletion of Names) के लिए एक भी औपचारिक दावा पेश नहीं किया है।
वरिष्ठ पत्रकार का विश्लेषण: नेताओं से टूट रहा है सीधा कनेक्शन?
एबीपी न्यूज़ के वरिष्ठ पत्रकार विवेक राय के अनुसार, ये आंकड़े यूपी की राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत हैं। उनका कहना है कि “वोटर भले ही किसी पार्टी को वोट दे, लेकिन आज के दौर में उसे सियासी दलों पर भरोसा नहीं रहा। लोगों को लगता है कि अगर नाम जुड़वाना है, तो खुद पहल करनी होगी।” यह ‘सेल्फ-डिपेंडेंट’ वोटर पार्टियों के पारंपरिक वोट बैंक समीकरणों को बिगाड़ सकता है।
यूपी चुनाव 2026: क्या है आगे की राह?
अगर आपने अभी तक उत्तर प्रदेश मतदाता सूची (UP Voter List 2026) में अपना नाम चेक नहीं किया है या नाम जुड़वाने के लिए आवेदन नहीं किया है, तो आपको तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए। जिस तरह से लाखों लोग खुद आवेदन कर रहे हैं, उससे साफ है कि आने वाला चुनाव बेहद दिलचस्प होने वाला है।
यूपी की जनता अब किसी नेता या कार्यकर्ता के भरोसे नहीं बैठी है। 11 जनवरी को 1.26 लाख से ज्यादा आवेदनों का आना इस बात का सबूत है कि मतदाता अब जागरूक हो चुका है। राजनीतिक दलों के लिए यह खतरे की घंटी है कि वे ज़मीनी स्तर पर जनता से अपना जुड़ाव खो रहे हैं।










