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Join NowIndia Export Support Package : नए साल 2026 की शुरुआत के साथ ही भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक पटल पर चमकाने के लिए मोदी सरकार ने एक मास्टरस्ट्रोक खेला है। शुक्रवार को भारत सरकार ने निर्यातकों (Exporters) के लिए ₹7,295 करोड़ के विशाल निर्यात सहायता पैकेज (Export Support Package) की घोषणा की है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब वैश्विक व्यापार कई तरह की चुनौतियों और मंदी की आशंकाओं से जूझ रहा है।
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इस भारी-भरकम फंड का मुख्य उद्देश्य भारत के छोटे और मध्यम उद्योगों (MSMEs) को अंतरराष्ट्रीय बाजार में मुकाबला करने के लिए “सस्ता और आसान कर्ज” उपलब्ध कराना है। आइए जानते हैं कि इस फैसले से आपके बिजनेस की किस्मत कैसे बदल सकती है।
दो हिस्सों में बंटा खजाना: ब्याज में छूट और गारंटी का सहारा
सरकार ने इस ₹7,295 करोड़ के पैकेज को दो मुख्य श्रेणियों में विभाजित किया है, ताकि निर्यातकों को हर स्तर पर मदद मिल सके:
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₹5,181 करोड़ की ब्याज छूट योजना (Interest Subvention Scheme): यह योजना 2025 से 2031 तक यानी अगले 6 वर्षों के लिए लागू होगी। इसके तहत निर्यातकों को शिपमेंट से पहले (Pre-shipment) और शिपमेंट के बाद (Post-shipment) लिए जाने वाले कर्ज पर ब्याज में भारी सब्सिडी दी जाएगी।
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₹2,114 करोड़ की कोलैटरल सपोर्ट (Collateral Support): छोटे व्यापारियों के लिए सबसे बड़ी समस्या बैंक को गारंटी देना होती है। सरकार ने इसके लिए ₹2,114 करोड़ आवंटित किए हैं, जिससे बिना किसी अतिरिक्त संपत्ति को गिरवी रखे निर्यातकों को वर्किंग कैपिटल लोन मिल सकेगा।
व्यापार होगा तेज और सस्ता: अजय भादू का बड़ा बयान
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव अजय भादू ने इस योजना को लॉन्च करते हुए कहा, “हमारा लक्ष्य व्यापार वित्त (Trade Finance) को तेज और सस्ता बनाना है। ये हस्तक्षेप निर्यातकों की वित्त संबंधी सभी समस्याओं का समाधान करेंगे।” यह ‘एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन’ (Export Promotion Mission) का दूसरा बड़ा हिस्सा है। पिछले ही हफ्ते सरकार ने ₹4,531 करोड़ के मार्केट एक्सेस सपोर्ट की घोषणा की थी।
MSME निर्यातकों की लगेगी ‘लॉटरी’
इस योजना का सबसे ज्यादा फायदा छोटे और मध्यम वर्ग के व्यापारियों (MSME) को होने वाला है।
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75% कवरेज: भारत की लगभग 75% टैरिफ लाइनों (उत्पादों) को इस योजना के दायरे में लाया गया है।
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2.75% की ब्याज सब्सिडी: पात्र MSME निर्यातकों को ब्याज दर में 2.75% तक की छूट मिलेगी।
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₹50 लाख की कैप: हर फर्म सालाना अधिकतम 50 लाख रुपये तक की ब्याज सब्सिडी का लाभ उठा सकेगी।
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₹10 करोड़ की गारंटी: कोलैटरल सपोर्ट योजना के तहत प्रति फर्म 10 करोड़ रुपये तक की क्रेडिट गारंटी सरकार की ओर से दी जाएगी।
किन सेक्टर्स को मिलेगा खास फायदा?
सरकार ने इस बार उन सेक्टर्स पर विशेष ध्यान दिया है जहाँ लेबर (मजदूरों) की ज्यादा जरूरत होती है या जहाँ ज्यादा पूंजी निवेश होता है।
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रणनीतिक निर्यात: डिफेंस (रक्षा) और SCOMET (विशेष रसायन, जीव, सामग्री और तकनीक) से जुड़े उत्पादों को भी शामिल किया गया है ताकि भारत की सामरिक ताकत बढ़े।
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पारदर्शी चयन: उन उत्पादों को प्राथमिकता दी गई है जिनमें भारत ज्यादा ‘वैल्यू एडिशन’ करता है। प्रतिबंधित, प्रतिबंधित वस्तुओं और कचरे/स्क्रैप को इस लिस्ट से बाहर रखा गया है।
RBI और DGFT निभाएंगे मुख्य भूमिका
इस योजना का क्रियान्वयन भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) द्वारा संयुक्त रूप से किया जाएगा। जल्द ही RBI इस संबंध में विस्तृत गाइडलाइंस जारी करेगा, जिससे बैंकों को लोन की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए जाएंगे।
‘मेक इन इंडिया’ से ‘सेल टू वर्ल्ड’ का सफर
यह ₹7,295 करोड़ का पैकेज केवल एक वित्तीय मदद नहीं है, बल्कि यह भारत के ‘विश्वगुरु’ बनने की दिशा में एक बड़ा आर्थिक कदम है। जब दुनिया भर में सप्लाई चेन बाधित है, तब भारत अपने निर्यातकों को सस्ता कर्ज और गारंटी देकर ग्लोबल मार्केट पर कब्जा करने की तैयारी कर रहा है। अगर आप एक निर्यातक हैं या भविष्य में अपना सामान विदेशों में बेचना चाहते हैं, तो यह आपके लिए स्वर्ण युग की शुरुआत है।















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