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Join NowDigital Census India: भारत के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। लंबे इंतजार और कई कयासों के बाद, केंद्र सरकार ने आखिरकार भारत की जनगणना 2027 (Census of India 2027) का शंखनाद कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में शुक्रवार को एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पर मुहर लग गई। सरकार ने 11,718.24 करोड़ रुपए का भारी-भरकम बजट पास करते हुए देश की नई जनगणना कराने की मंजूरी दे दी है।
लेकिन रुकिए! यह कोई सामान्य जनगणना नहीं होने वाली है। इस बार कुछ ऐसा होने जा रहा है जो पिछले कई दशकों में नहीं हुआ। न कोई मोटा रजिस्टर होगा, न ही कागजों का ढेर। इस बार आपका डेटा ‘पूरी तरह डिजिटल’ (Digital Census) तरीके से मोबाइल एप पर सेव होगा। और सबसे बड़ी खबर—इस बार सरकार आपकी जाति (Caste) भी पूछेगी।
तो चलिए, आसान शब्दों में समझते हैं कि आखिर आपके दरवाजे पर जनगणना वाले कब आएंगे, क्या सवाल पूछे जाएंगे और 1931 के बाद यह बदलाव क्यों इतना खास है?
96 साल बाद पहली बार होगा ऐसा: खुलेगा ‘जाति’ का राज
इस बार की जनगणना सबसे अलग और खास क्यों है? इसका सबसे बड़ा कारण है ‘जातिगत जनगणना’ (Caste Census) का इसमें शामिल होना। अब तक भारत में आजादी के बाद जितनी भी जनगणनाएं हुईं, उनमें सिर्फ SC (अनुसूचित जाति) और ST (अनुसूचित जनजाति) की ही गिनती होती थी। बाकी सभी को ‘सामान्य’ या ‘ओबीसी’ के बड़े समूहों में गिना जाता था।
लेकिन जनगणना 2027 में 1931 (ब्रिटिश शासनकाल) के बाद पहली बार देश के सभी समुदायों की जातिगत जानकारी आधिकारिक रूप से जुटाई जाएगी। सरकार के इस कदम से देश की असली सामाजिक और आर्थिक तस्वीर साफ हो सकेगी।
तारीखें नोट कर लें: कब आपके घर आएंगे कर्मचारी?
इस विशाल प्रक्रिया को सरकार ने दो चरणों (Phases) में बांटने का फैसला किया है:
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पहला चरण (अप्रैल 2026 – सितंबर 2026):
शुरुआत में इंसानों की नहीं, बल्कि आपके ‘घर’ की गिनती होगी। इसे हाउसलिस्टिंग (Houselisting) कहा जाता है। अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच कर्मचारी आपके घर आकर आवास से जुड़ी जानकारी, मकान कैसा है, सुविधाएं क्या हैं, इसे नोट करेंगे। -
दूसरा चरण (फरवरी 2027):
असली जनसंख्या गणना (Population Enumeration) इस महीने में होगी। इसी दौरान आपके परिवार के सदस्यों की संख्या, शिक्षा, कामकाज और जाति पूछी जाएगी।
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बर्फीले इलाकों के लिए अलग नियम: लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के जिन इलाकों में फरवरी में भारी बर्फबारी होती है, वहां जनगणना का काम सितंबर 2026 में ही पूरा कर लिया जाएगा।
100% डिजिटल जनगणना: पेन-पेपर की छुट्टी!
पुराने जमाने की तरह अब कर्मचारी कंधे पर मोटे-मोटे फॉर्म का थैला टांगकर नहीं आएंगे।
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मोबाइल ऐप का इस्तेमाल: जनगणना करने वाले कर्मचारी (Enumerators) अपने स्मार्टफोन या टैबलेट में एक विशेष ऐप के जरिए आपका डेटा भरेंगे। यह ऐप Android और iOS दोनों पर उपलब्ध होगा।
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जियो-टैगिंग (Geo-tagging): देश की हर इमारत, हर घर को डिजिटल मैप पर ‘जियो-टैग’ किया जाएगा, जिससे कोई भी घर गिनती से न छूटे।
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16 भाषाओं का विकल्प: भारत विविधताओं का देश है, इसलिए ऐप में हिंदी और अंग्रेजी के अलावा 16 से ज्यादा क्षेत्रीय भाषाओं का विकल्प मिलेगा ताकि डेटा एकदम सही भरा जा सके।
30 लाख ‘डिजिटल वॉरियर्स’ संभालेंगे मोर्चा
इस महाभियान को अंजाम देने के लिए लगभग 30 लाख प्रक्षेत्र कर्मचारियों (Field Staff) की फौज तैयार की जाएगी। इनमें अधिकतर सरकारी शिक्षक शामिल होंगे। सरकार इन्हें विशेष ट्रेनिंग देगी कि ऐप कैसे चलाना है और जाति या प्रवास (Migration) जैसे संवेदनशील सवाल कैसे पूछने हैं। इनकी मदद के लिए ‘सेंसस मैनेजमेंट एंड मॉनिटरिंग सिस्टम’ (CMMS portal) जैसा हाई-टेक सिस्टम बनाया गया है जो रियल टाइम में दिल्ली में बैठे अफसरों को बताएगा कि किस गांव में कितनी गिनती हो चुकी है।
नए और तीखे सवाल: “आप यहां क्यों आए?”
इस बार सवालों की लिस्ट में कुछ नए कॉलम जोड़े गए हैं। जाति के अलावा प्रवास (Migration) पर बहुत जोर दिया जाएगा। आपसे पूछा जा सकता है:
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आपका जन्म स्थान (Birthplace) कहां है?
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आप इस शहर/गांव में कितने सालों से रह रहे हैं?
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आपने अपनी पिछली जगह क्यों छोड़ी? (नौकरी के लिए, शादी के लिए या किसी और कारण से?)
आम जनगणना और जाति जनगणना में अंतर क्या है?
अक्सर लोग कन्फ्यूज हो जाते हैं। इसे ऐसे समझें:
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सामान्य जनगणना: इसका मकसद सिर्फ यह जानना है कि देश में कितने बच्चे, बूढ़े, जवान, महिला और पुरुष हैं। वे कितने पढ़े-लिखे हैं और क्या काम करते हैं। इसके आधार पर सड़क, स्कूल और अस्पताल बनते हैं।
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जातिगत जनगणना: यह समाज की अंदरूनी परतें खोलती है। इससे पता चलता है कि किस जाति की संख्या कितनी है और क्या उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ उनकी आबादी के हिसाब से मिल रहा है या नहीं? यह डेटा आरक्षण (Reservation) नीतियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है।
पिछली बार 121 करोड़ थे हम!
आखिरी बार जनगणना 2011 में हुई थी। तब भारत की आबादी 121 करोड़ दर्ज की गई थी। उस वक्त महिलाओं और पुरुषों का अनुपात और साक्षरता दर मुख्य मुद्दे थे। 2021 की जनगणना कोरोना महामारी के कारण टल गई थी। अब 2027 में जब नतीजे आएंगे, तो पूरी दुनिया की नजरें भारत पर होंगी कि क्या हम आधिकारिक तौर पर दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देश का टैग पहनते हैं या जनसंख्या वृद्धि में स्थिरता आई है।
भारत के भविष्य का यह ‘डिजिटल डेटा’ 2047 के विकसित भारत की नींव रखेगा। आप भी तैयार रहिए, क्योंकि जब 2027 में घंटी बजेगी, तो आपको देश की सही तस्वीर बनाने में अपना योगदान देना होगा।










