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Join NowSmartphone Battery: आज के डिजिटल युग में हमारा स्मार्टफोन हमारी जिंदगी का एक अविभाज्य अंग बन चुका है। सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक, फोन हमारे हाथ में रहता है। लेकिन जैसे-जैसे फोन पुराना होता है, हमारी सबसे बड़ी सिरदर्दी बन जाती है इसकी बैटरी लाइफ (Battery Life)।
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शुरुआत में जो फोन पूरे दो दिन चलता था, वह कुछ ही महीनों बाद दोपहर होते-होते दम तोड़ने लगता है। क्या आपने कभी सोचा है ऐसा क्यों होता है? दरअसल, इसके पीछे कोई तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि आपकी गलत चार्जिंग आदतें (Wrong Charging Habits) जिम्मेदार हैं। अगर आप भी अपने फोन को 100% तक चार्ज करते हैं, तो ठहर जाइए! आप अनजाने में अपने महंगे स्मार्टफोन की उम्र घटा रहे हैं।
क्या है ’80-20′ बैटरी रूल और यह क्यों जरूरी है?
स्मार्टफोन एक्सपर्ट्स और लिथियम-आयन बैटरी बनाने वाली कंपनियां अब एक खास नियम की सलाह देती हैं, जिसे ’80-20 बैटरी रूल’ (80-20 Battery Rule) कहा जाता है।
यह नियम बहुत सीधा और प्रभावी है:
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20% पर चार्ज लगाएं: जब आपके फोन की बैटरी गिरकर 20% तक पहुँच जाए, तभी चार्जर कनेक्ट करें। बैटरी को कभी भी पूरी तरह ‘0%’ या डेड न होने दें।
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80% पर चार्जर हटा दें: जैसे ही चार्जिंग का आंकड़ा 80% छुए, बिजली का स्विच बंद कर दें। इसे 100% तक ले जाने की जिद न करें।
100% चार्ज करना क्यों है ‘खतरनाक’?
ज्यादातर लोग सोचते हैं कि फोन को पूरा 100% चार्ज करने से ज्यादा बैकअप मिलेगा। लेकिन विज्ञान इसके उलट है। जब स्मार्टफोन की बैटरी 80% से ऊपर जाती है, तो उसे फुल चार्ज करने के लिए वोल्टेज का दबाव बहुत बढ़ जाता है। इससे बैटरी के अंदर अत्यधिक गर्मी (Overheating) पैदा होती है। यह गर्मी बैटरी की रासायनिक क्षमता (Chemical Capacity) को धीरे-धीरे खत्म कर देती है, जिससे वह चार्ज होल्ड करना कम कर देती है।
लंबे समय तक 100% चार्ज रखने या रातभर चार्जर लगा छोड़ने से बैटरी ‘फूल’ सकती है या उसका बैकअप स्थायी रूप से गिर सकता है।
0% तक डिस्चार्ज होने के नुकसान
सिर्फ ओवरचार्जिंग ही नहीं, बल्कि बैटरी को पूरी तरह खाली होने देना भी एक बड़ा गुनाह है। जब बैटरी बिल्कुल खत्म हो जाती है, तो उसके सेल्स ‘डीप डिस्चार्ज’ मोड में चले जाते हैं। दोबारा चार्ज करने पर इन सेल्स पर बहुत ज्यादा तनाव पड़ता है, जिससे बैटरी की लाइफ तेजी से घटने लगती है।
80-20 रूल अपनाने के चौंकाने वाले फायदे:
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बैटरी हेल्थ रहती है बरकरार: इस नियम को फॉलो करने से बैटरी की ‘साइकिल लाइफ’ बढ़ जाती है। आपका फोन 2-3 साल बाद भी नए जैसा बैकअप देगा।
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ओवरहीटिंग से छुटकारा: फोन चार्जिंग के दौरान गर्म नहीं होगा, जिससे मदरबोर्ड और अन्य पार्ट्स सुरक्षित रहेंगे।
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पैसों की बचत: आज के समय में बैटरी रिप्लेसमेंट काफी महंगा होता है। सही आदतों से आप हजारों रुपये बचा सकते हैं।
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तेज परफॉरमेंस: अच्छी बैटरी हेल्थ का सीधा असर फोन की स्पीड और परफॉरमेंस पर पड़ता है।
छोटी सी आदत, बड़ा बदलाव
माना कि भागदौड़ भरी जिंदगी में हर बार 80% पर चार्जर हटाना थोड़ा मुश्किल लग सकता है, लेकिन अगर आप अपने फोन से प्यार करते हैं और उसे लंबे समय तक चलाना चाहते हैं, तो यह स्मार्ट चार्जिंग (Smart Charging) अपनाना ही समझदारी है। महंगे कवर और स्क्रीन गार्ड से ज्यादा जरूरी है अपने फोन की बैटरी का ख्याल रखना। आज ही अपनी आदत बदलें और अपने स्मार्टफोन को एक लंबी जिंदगी दें….














