धर्म

Bhagavad Gita: ऐसे लोगों से कृष्ण करते हैं नफरत

Bhagavad Gita: हिन्दुओं का सबसे प्रमुख ग्रन्थ भगवत गीता जीवन को सकारात्मक मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। जो व्यक्ति गीता का नियमित पाठ करता है, गीता में बताई बातों का अनुशरण करता है उसके साथ स्वयं भगवान कृष्ण खड़े रहते हैं और प्रत्येक विकट परिस्थिति में उसका साथ देते हैं।

आज विश्व भर में गीता के अनुयायी हैं। मान्यता है कि जो गीता के ज्ञान से स्वयं का निर्माण करता है उसका जीवन दुखों से मुक्त हो जाता है। वही आज हम आपको गीता की कुछ अमुख बातें बताने जा रहे हैं। जिनका यदि आप अनुपालन करते हैं तो आपको अपने जीवन में संघर्ष से लड़ने का साहस मिलेगा व आप अपने नियमित प्रयास से आसानी से सफलता को हासिल कर पाएंगे।

भगवत गीता में भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को उपदेश देते हुए कहा था। जो व्यक्ति स्वयं को भय पर विजय प्राप्त करता है। अपने मित्रों के साथ सत्यता से परिपूर्ण व्यवहार बनाता है। परिजनों का सम्मान करता है। अपनी आलोचनाओं को भी मुस्कुरा कर सुनता रहता है और संघर्ष करने से पीछे नहीं हटता। मैं उसका साथ सदैव देता हूँ और उस व्यक्ति को जीवन में कभी भी कष्टों से भय नहीं लगता।

गीता के मुताबिक यदि कोई व्यक्ति परिस्थितियों से भयभीत होकर स्वयं को कष्ट देने लगता है। अपनों के मोह के वशीभूत प्रयास करना छोड़ देता है। उसे जीवन में कुछ भी प्राप्त नहीं होता। उसका जीवन निगेटिव ऊर्जा से भरा रहता है और उसे अपनी सारी उम्र दुखों की मार झेलनी पड़ती है।

इसके साथ ही व्यक्ति को सदैव सौम्य स्वभाव से रहना चाहिए। उसे कभी भी अपनी चीजों पर घमंड नहीं करना चाहिए। घमंड व्यक्ति को अनैतिक मार्ग की तरफ ले जाता है और व्यक्ति अपने साथियों के साथ ही अनैतिक व्यवहार करने लगता है। उसका यह व्यवहार उसे असफल बनाता है और कष्ट उसके जीवन का हिस्सा बन जाते हैं।

श्री कृष्ण का कहना है वह उस व्यक्ति का साथ कभी नहीं छोड़ते जो सौम्य स्वाभाव का होता है और अपनी भक्ति से विजय प्राप्त करना जानता है। जबकि वह उस व्यक्ति का जीवन काफी कठिन बनाते हैं जो स्वयं पर घमंड करता है। दूसरे जीवों का सम्मान करना नहीं जनता। जाति धर्म के नाम पर किसी भी प्राणी का शोषण करता है और स्वयं को सर्वश्रेष्ठ बताने के लिए दूसरों को नीचा दिखाता है।

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