UP Census 2027: यूपी की 25 करोड़ जनता के लिए बड़ी खबर, शुरू होने जा रहा है महा-अभियान

UP Census 2027: उत्तर प्रदेश, जो अपनी विशाल जनसंख्या और राजनीतिक महत्व के लिए जाना जाता है, अब एक ऐतिहासिक बदलाव की दहलीज पर खड़ा है। राज्य में आगामी जनगणना-2027 को लेकर तैयारियां युद्ध स्तर पर शुरू हो गई हैं। यह केवल सिरों की गिनती नहीं है, बल्कि स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार उत्तर प्रदेश में एक ऐसा डेटाबेस तैयार होने जा रहा है जो आने वाले दशकों के लिए विकास की नई इबारत लिखेगा।

Mohan Bhagwat Statement: बांग्लादेश में हिंसा के बीच मोहन भागवत के इस बयान ने मचाया हड़कंप

मई 2026 से खटखटाया जाएगा आपका दरवाजा
मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह की अध्यक्षता में हुई हालिया हाई-लेवल मीटिंग में यह साफ हो गया है कि जनगणना का पहला चरण मई-जून 2026 में शुरू होगा। इस दौरान ‘हाउस लिस्टिंग’ यानी मकानों की गणना की जाएगी। अधिकारियों के मुताबिक, प्रदेश की अनुमानित आबादी अब 25 करोड़ 70 लाख के पार पहुंच चुकी है, ऐसे में इस विशाल कार्य को व्यवस्थित तरीके से पूरा करना किसी चुनौती से कम नहीं है।

Supreme Court: वोटर लिस्ट में बड़ा घोटाला? सुप्रीम कोर्ट ने EC से पूछे तीखे सवाल, 8 करोड़ लोगों का वोट कटने का डर

पहली बार होगी ‘जातिगत जनगणना’ (Caste Census in UP)
इस बार की जनगणना का सबसे चौंकाने वाला और महत्वपूर्ण हिस्सा इसका दूसरा चरण होगा। फरवरी 2027 में होने वाले इस चरण में न केवल व्यक्तियों की गिनती होगी, बल्कि पहली बार लोगों का जाति संबंधी विवरण भी लिया जाएगा। स्वतंत्र भारत में यह अपनी तरह की पहली कवायद होगी, जिसका असर प्रदेश की राजनीति और सरकारी योजनाओं के वितरण पर सीधे तौर पर पड़ेगा।

6 लाख कर्मचारियों की ‘महा-फौज’ और डिजिटल तकनीक
इतने बड़े राज्य की जनगणना को पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने तकनीक का सहारा लिया है। इस बार पेन-कागज का जमाना गया, अब जनगणना पूरी तरह डिजिटल (Digital Census) होगी।

  • 6 लाख से ज्यादा कार्मिक: इसमें करीब 5 लाख गणना कर्मी और 84 हजार सुपरवाइजर शामिल होंगे।

  • स्पेशल मोबाइल ऐप: आंकड़ों को रीयल-टाइम अपलोड करने के लिए एक विशेष मोबाइल ऐप विकसित किया गया है।

  • सटीक निगरानी: ‘सेंसस मैनेजमेंट एंड मॉनिटरिंग सिस्टम’ (CMMS) पोर्टल के जरिए ग्राम और वार्ड स्तर तक की निगरानी की जाएगी।

प्रशासनिक पाबंदियां और सख्त निर्देश
मुख्य सचिव ने स्पष्ट कर दिया है कि जनगणना की शुचिता बनाए रखने के लिए 31 दिसंबर 2025 के बाद प्रदेश की किसी भी प्रशासनिक इकाई (जैसे जिले या तहसील की सीमा) में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। यूपी के 18 मंडल, 75 जिले और 57 हजार से अधिक पंचायतों को कवर करने के लिए तीन दिवसीय विशेष प्रशिक्षण शिविर भी लगाए जाएंगे।

क्यों जरूरी है यह जनगणना?
यह जनगणना केवल आंकड़ों का खेल नहीं है। इससे यह पता चलेगा कि सरकार की योजनाएं किस तबके तक पहुंच रही हैं और कहां सुधार की जरूरत है। अगर आप उत्तर प्रदेश के निवासी हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है क्योंकि आने वाले समय में आपकी पहचान और सरकारी लाभ इसी डेटा पर आधारित होंगे।


Related Articles

Stay Connected

0FansLike
0FollowersFollow
0SubscribersSubscribe

Latest Articles