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Join NowSupreme Court : भारत में सरकारी नौकरियों और आरक्षण की व्यवस्था को लेकर चल रही दशकों पुरानी बहस में सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐसा फैसला सुनाया है, जो आने वाले समय में देश की भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह से बदल कर रख देगा। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि योग्यता (Merit) किसी जाति की मोहताज नहीं होती।
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अदालत के इस नए आदेश के बाद अब अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के उन उम्मीदवारों के लिए रास्ते खुल गए हैं, जो अपनी मेहनत के दम पर जनरल कैटेगरी के कट-ऑफ से ज्यादा अंक लाते हैं।
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मेरिटोरियस छात्रों की बड़ी जीत
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि यदि रिजर्व कैटेगरी का कोई उम्मीदवार जनरल कैटेगरी के लिए तय किए गए कट-ऑफ मार्क्स से अधिक अंक प्राप्त करता है, तो उसे उसकी अपनी रिजर्व कैटेगरी में सीमित नहीं रखा जा सकता। ऐसे उम्मीदवार को ‘सामान्य श्रेणी’ (General Category) की सीट पर नियुक्त किया जाएगा।
इसका सीधा अर्थ यह है कि सामान्य श्रेणी की सीटें वास्तव में ‘ओपन कैटेगरी’ (Open Category) हैं, जहाँ देश का कोई भी नागरिक अपनी योग्यता के आधार पर जगह बना सकता है, चाहे उसकी श्रेणी कुछ भी हो।
राजस्थान हाई कोर्ट का आदेश हुआ खारिज
यह मामला तब तूल पकड़ा जब राजस्थान हाई कोर्ट ने एक भर्ती प्रक्रिया के दौरान यह नियम लागू कर दिया था कि रिजर्व कैटेगरी के उम्मीदवारों को जनरल कैटेगरी की सीटों पर नहीं चुना जाएगा, भले ही उनके मार्क्स जनरल कट-ऑफ से ज्यादा क्यों न हों। सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को पूरी तरह से खारिज कर दिया। सर्वोच्च अदालत ने माना कि ऐसा करना उन मेधावी उम्मीदवारों के साथ अन्याय होगा जो अपनी मेहनत से ओपन मेरिट में स्थान बना रहे हैं।
सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों पर क्या होगा असर?
इस फैसले का असर केवल सरकारी नौकरियों तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश के बड़े सरकारी शिक्षण संस्थानों (जैसे IIT, AIIMS, और यूनिवर्सिटीज) में नामांकन प्रक्रिया पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ेगा।
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मेरिट को बढ़ावा: अब रिजर्व कैटेगरी के छात्र अधिक मेहनत करने के लिए प्रोत्साहित होंगे क्योंकि उनके पास जनरल सीट हासिल करने का मौका होगा।
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आरक्षण का कोटा बरकरार: जो उम्मीदवार जनरल सीट पर चुन लिए जाएंगे, उनके कारण उनकी अपनी रिजर्व कैटेगरी (SC/ST/OBC/EWS) की सीटें खाली रहेंगी, जिससे उस कैटेगरी के अन्य निचले रैंक वाले उम्मीदवारों को मौका मिल सकेगा।
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भर्ती में पारदर्शिता: कोर्ट का यह फैसला चयन प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और न्यायसंगत बनाएगा।
सामान्य श्रेणी (General Category) का बदला हुआ चेहरा
अक्सर ‘सामान्य श्रेणी’ को केवल सवर्णों या गैर-आरक्षित वर्ग के लिए सुरक्षित माना जाता था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि यह एक ‘ओपन मेरिट कोटा’ है। इसमें वह हर व्यक्ति नौकरी पा सकता है जो मेरिट लिस्ट में सबसे ऊपर है।










