Rekha Gupta CM Delhi : रेखा गुप्ता सरकार के 1 साल का वो काला-सफेद सच, जिसने जनता को हैरान कर दिया

Published On: February 20, 2026
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Rekha Gupta CM Delhi : रेखा गुप्ता सरकार के 1 साल का वो काला-सफेद सच, जिसने जनता को हैरान कर दिया

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Rekha Gupta CM Delhi : दिल्ली की सियासत में एक साल पहले एक ऐसा भूचाल आया था, जिसने 27 साल के सूखे को खत्म कर दिया। अरविंद केजरीवाल की ‘आम आदमी पार्टी’ के अभेद्य किले को ढहाकर बीजेपी ने दिल्ली की सत्ता पर कब्जा किया। जनता ने 128 पन्नों के उस संकल्प पत्र (घोषणापत्र) पर भरोसा किया, जिसमें यमुना की सफाई से लेकर महिलाओं की आर्थिक आजादी तक के सपने बुने गए थे।

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आज मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार को एक साल पूरा हो गया है। यह एक साल उपलब्धियों, बदलावों और कुछ अधूरे सपनों का मिला-जुला सफर रहा है। आइए देखते हैं कि क्या रेखा सरकार दिल्ली की जनता की उम्मीदों पर खरी उतरी है या अभी भी ‘दिल्ली दूर है’?

1. केजरीवाल की फ्री स्कीम पर बीजेपी की मुहर

सत्ता संभालते ही रेखा गुप्ता के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी—फ्री बिजली और पानी। दिल्ली की जनता को डर था कि सरकार बदलते ही ये सुविधाएं बंद हो जाएंगी। लेकिन बीजेपी ने अपने वादे के मुताबिक मुफ्त बिजली और पानी की व्यवस्था को न केवल बरकरार रखा, बल्कि इसे और सुव्यवस्थित करने का दावा किया।

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2. मोहल्ला क्लिनिक का बदला स्वरूप: आयुष्मान आरोग्य मंदिर

दिल्ली की पहचान बन चुके ‘मोहल्ला क्लिनिक’ को रेखा सरकार ने एक नई दिशा दी है। सरकार ने इन्हें खत्म कर इनकी जगह 1100 आयुष्मान आरोग्य मंदिर बनाने का संकल्प लिया। बीते एक साल में 370 आरोग्य मंदिर शुरू किए जा चुके हैं, जहाँ आधुनिक डायग्नोस्टिक सुविधाएं और मुफ्त डॉक्टरी सलाह दी जा रही है।

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3. स्वास्थ्य के क्षेत्र में ‘मास्टरस्ट्रोक’: आयुष्मान भारत

पहली ही कैबिनेट मीटिंग में रेखा गुप्ता ने दिल्ली में आयुष्मान भारत योजना को लागू कर दिया। अब दिल्लीवासियों को 10 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिल रहा है। इसके साथ ही आयुष्मान वय वंदना योजना के तहत 70 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों को भी फ्री इलाज की सुरक्षा दी गई है। अब तक करीब 6.7 लाख आयुष्मान कार्ड जारी होना एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

4. अटल कैंटीन: 5 रुपये में मान सम्मान के साथ भोजन

गरीबों और झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले लोगों के लिए अटल कैंटीन एक वरदान साबित हो रही है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की याद में शुरू की गई इस योजना के तहत मात्र 5 रुपये में पौष्टिक भोजन दिया जा रहा है। दिल्लीभर में 71 ऐसी कैंटीन खुल चुकी हैं, जिससे हजारों लोगों का पेट भर रहा है।

5. महिलाओं को ₹21,000 और ‘मातृत्व सुरक्षा’

चुनाव के दौरान बीजेपी ने गर्भवती महिलाओं के लिए बड़ी घोषणा की थी। मुख्यमंत्री मातृत्व सुरक्षा योजना के तहत 83,700 से अधिक महिलाओं को रजिस्टर किया गया है और करीब 31.68 करोड़ रुपये सीधे उनके खातों (DBT) में भेजे गए हैं।

लेकिन… कहाँ फंस गया पेंच? (अधूरे वादे)

जहाँ कुछ मोर्चों पर सरकार ने तेजी दिखाई, वहीं कुछ बड़े वादे अभी भी कागजों पर ही हैं:

  • ₹2500 प्रति माह का इंतजार: महिलाओं को ‘महिला समृद्धि योजना’ के तहत हर महीने 2500 रुपये मिलने थे। 5100 करोड़ का बजट तो मंजूर हुआ, लेकिन एक साल बाद भी महिलाओं के खाते में पहली किस्त नहीं आई है।

  • मुफ्त गैस सिलेंडर: होली और दिवाली पर दो मुफ्त एलपीजी सिलेंडर का वादा किया गया था। कैबिनेट की मंजूरी के बावजूद, महिलाएं अभी भी ‘होली’ के आने का इंतजार कर रही हैं ताकि उन्हें इसका लाभ मिल सके।

  • बुजुर्गों की पेंशन: पेंशन को ₹2000 से बढ़ाकर ₹2500 और ₹3000 करने का वादा अभी भी अमलीजामा पहनाने का इंतजार कर रहा है।

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यमुना और प्रदूषण: विरासत में मिली ‘जहरीली’ चुनौती

यमुना की सफाई के लिए रेखा सरकार ने ‘यमुना मास्टर प्लान’ शुरू किया है। कचरा हटाना और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STPs) को दुरुस्त करने का काम पहले चरण में है। हालांकि, यमुना अभी भी पूरी तरह साफ नहीं हुई है। प्रदूषण के मुद्दे पर मुख्यमंत्री का कहना है कि यह उन्हें ‘विरासत’ में मिली समस्या है। DEVI (Electric Buses) की शुरुआत कर प्रदूषण कम करने की कोशिश तो की जा रही है, लेकिन दिल्ली की हवा अभी भी सांस लेने लायक नहीं हुई है। रेखा गुप्ता सरकार का पहला साल ‘नींव’ रखने जैसा रहा है। स्वास्थ्य और भोजन के मोर्चे पर काम हुआ है, लेकिन आर्थिक सहायता और पर्यावरण के मोर्चे पर जनता अभी और ठोस नतीजों की उम्मीद कर रही है। अगले साल तक क्या ये वादे पूरे होंगे? दिल्ली की जनता की नजरें टिकी हुई हैं।

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