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Join NowPushkar Singh Dhami: देवभूमि उत्तराखंड, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए विश्व विख्यात है, आज एक ऐसे स्वर्णिम युग में प्रवेश कर चुकी है जिसकी कल्पना दशकों से की जा रही थी। यह केवल सड़कों और पुलों का विकास नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड की आत्मा—उसकी सांस्कृतिक विरासत का पुनरुत्थान है। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी जी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने एक ऐसा ‘सशक्त मॉडल’ पेश किया है, जहाँ आधुनिक विकास और प्राचीन आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है।
Pushkar Singh Dhami: स्मार्ट सिटी और ₹1.11 लाख करोड़ के विजन से सवर रहा है देवभूमि का भविष्य
सांस्कृतिक पुनर्जागरण: मंदिरों का भव्य स्वरूप
मुख्यमंत्री धामी ने सत्ता संभालते ही ‘सांस्कृतिक पुनर्जागरण’ को अपनी प्राथमिकता बनाया। उनका मानना है कि उत्तराखंड की पहचान यहाँ के मंदिरों और लोक-परंपराओं में बसती है। इसी विजन के साथ राज्य के उन ऐतिहासिक मंदिरों के जीर्णोद्धार का काम शुरू किया गया, जो वर्षों से उपेक्षित थे।
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श्री वाराही धाम का नवनिर्माण: चम्पावत स्थित माँ वाराही के धाम को अब एक भव्य और आधुनिक स्वरूप दिया जा रहा है, जिससे यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं को विश्वस्तरीय सुविधाएं मिल सकेंगी।
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गोल्ज्यू और शारदा कॉरिडोर: न्याय के देवता ‘गोलू देवता’ (गोल्ज्यू) और माँ शारदा के पावन क्षेत्रों के लिए कॉरिडोर निर्माण की योजना गेम-चेंजर साबित होने वाली है। यह ठीक उसी तर्ज पर विकसित किए जा रहे हैं जैसे काशी विश्वनाथ और उज्जैन महाकाल कॉरिडोर, जिससे स्थानीय पर्यटन को जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा।
लोक-परंपराओं को मिला ‘राजकीय’ सम्मान
उत्तराखंड की संस्कृति केवल पत्थरों में नहीं, बल्कि यहाँ के मेलों और उत्सवों में भी जीवित है। ऐतिहासिक बग्वाल मेले (पाषाण युद्ध) को ‘राजकीय मेला’ घोषित कर धामी सरकार ने पहाड़ की परंपराओं के प्रति अपना सम्मान प्रकट किया है। इस कदम से न केवल इन मेलों का संरक्षण होगा, बल्कि नई पीढ़ी भी अपनी जड़ों से जुड़ने में गर्व महसूस करेगी।
आस्था के साथ समृद्धि का मार्ग: ईको-टूरिज्म और आधुनिकीकरण
मुख्यमंत्री का विजन स्पष्ट है—“विकास भी, विरासत भी”। जहाँ एक ओर केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम में मास्टरप्लान के तहत काम चल रहा है, वहीं दूसरी ओर मानसखंड मंदिर माला मिशन के जरिए कुमाऊं के प्राचीन मंदिरों को मुख्य पर्यटन मानचित्र पर लाया जा रहा है।
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धार्मिक स्थलों का आधुनिकीकरण: अब श्रद्धालुओं को केवल पैदल रास्तों पर निर्भर नहीं रहना होगा; रोपवे और चौड़ी सड़कों के जरिए दुर्गम मंदिरों तक पहुंच सुलभ बनाई जा रही है।
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ईको-टूरिज्म: प्रकृति के साथ छेड़छाड़ किए बिना पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार प्रभावी कदम उठा रही है, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।
एक सशक्त और गौरवशाली भविष्य की ओर
यह संतुलित मॉडल न केवल उत्तराखंड की आस्था को संवार रहा है, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ को भी मजबूत कर रहा है। मुख्यमंत्री धामी के इन प्रयासों से आज उत्तराखंड एक सशक्त, समृद्ध और गौरवशाली राज्य के रूप में उभर रहा है। देवभूमि की यह नई तस्वीर यह बताने के लिए काफी है कि जब नेतृत्व में दृढ़ इच्छाशक्ति हो, तो इतिहास और भविष्य दोनों को एक साथ संवारा जा सकता है।










