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Join NowBudget 2026: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साल 2026 का केंद्रीय बजट पेश कर दिया है, और इस बार के बजट की चर्चा हर तरफ हो रही है। इस बजट को अर्थशास्त्रियों और जानकारों ने एक ‘नारियल’ की संज्ञा दी है। जिस तरह एक नारियल बाहर से सख्त लेकिन अंदर से नरम और मीठा होता है, ठीक उसी तरह इस बजट में भी कड़े आर्थिक फैसलों के खोल के भीतर आम जनता और चुनावी राज्यों के लिए कई राहत भरी बातें छिपी हैं।
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यह बजट केवल आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि यह अर्थव्यवस्था और राजनीति के बीच एक शानदार संतुलन साधने की कोशिश है। आइए विस्तार से समझते हैं कि इस बार के बजट में किन राज्यों की लॉटरी लगी है और कौन से सेक्टर देश की तकदीर बदलने वाले हैं।
चुनावी राज्यों पर फोकस: राजनीति या विकास?
बजट 2026 में स्पष्ट रूप से उन राज्यों को प्राथमिकता दी गई है जहाँ इस साल चुनाव होने वाले हैं। केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों के लिए बजट में विशेष प्रावधान किए गए हैं। इसके साथ ही, आंध्र प्रदेश (जहाँ भाजपा की सहयोगी टीडीपी की सरकार है) और गुजरात (प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का गृह राज्य) को भी बड़े लाभार्थियों की सूची में रखा गया है।
लेकिन वित्त मंत्री की तारीफ इस बात के लिए होनी चाहिए कि उन्होंने इस ‘राजनीतिक निवेश’ को बहुत ही तार्किक तरीके से आर्थिक मजबूती के साथ जोड़ा है।
नारियल की खेती और ‘प्रमोशन स्कीम’
बजट में एक विशेष प्रमोशन स्कीम की घोषणा की गई है जो मुख्य रूप से केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और गुजरात के नारियल उत्पादकों पर केंद्रित है। नारियल न केवल एक धार्मिक फल है, बल्कि इसकी बढ़ती वैश्विक मांग को देखते हुए यह किसानों की आय का एक बहुत बड़ा जरिया बन सकता है। सरकार की यह पॉलिसी किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
चीन पर निर्भरता कम करने की तैयारी: दुर्लभ धातुएं (Rare Metals)
भारत अब अपनी रणनीतिक जरूरतों के लिए किसी दूसरे देश, खासकर ‘मनमौजी’ चीन पर निर्भर नहीं रहना चाहता। बजट में भारत के भीतर ही दुर्लभ धातुओं (Rare Metals) की सप्लाई चेन विकसित करने पर जोर दिया गया है। इसके लिए केरल, तमिलनाडु, ओडिशा और आंध्र प्रदेश को केंद्र बिंदु बनाया गया है। इन राज्यों में मौजूद खनिज संपदा का दोहन कर भारत रक्षा और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की राह पर है।
नीली अर्थव्यवस्था (Blue Economy) और मछुआरों के लिए तोहफा
तटीय राज्यों के लिए बजट में एक क्रांतिकारी कदम उठाया गया है। अब एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक ज़ोन (EEZ) और गहरे समुद्र में मछली पकड़ने को पूरी तरह ड्यूटी-फ्री कर दिया गया है। इतना ही नहीं, भारतीय मछुआरों द्वारा पकड़ी गई मछली को यदि किसी विदेशी बंदरगाह पर बेचा जाता है, तो उसे ‘एक्सपोर्ट’ माना जाएगा। इससे आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरल, बंगाल और गुजरात के मछुआरा समुदायों की आय में जबरदस्त उछाल आने की उम्मीद है।
हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर: रफ्तार पकड़ेगा भारत
रेलवे हमेशा से बजट का सबसे पसंदीदा हिस्सा रहा है। इस बार वित्त मंत्री ने 7 नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का वादा किया है। ये ट्रेनें न केवल समय बचाएंगी बल्कि देश के इंफ्रास्ट्रक्चर को नई ऊंचाई पर ले जाएंगी। इन कॉरिडोर के जरिए चेन्नई (तमिलनाडु), सिलीगुड़ी (बंगाल) और वाराणसी (उत्तर प्रदेश) जैसे प्रमुख शहरों को जोड़ा जाएगा, जो कनेक्टिविटी और व्यापार के नए द्वार खोलेगा।
कुल मिलाकर, बजट 2026 एक ‘विजनरी’ बजट है। यह न केवल वर्तमान राजनीतिक समीकरणों को साधता है, बल्कि भविष्य के भारत की नींव भी रखता है। चीन के साथ प्रतिस्पर्धा हो या किसानों और मछुआरों का कल्याण, निर्मला सीतारमण ने हर मोर्चे पर संतुलन बनाने की कोशिश की है।











