Symptoms of Motiyabind: धुंधली नजर हो सकती है ‘मोतियाबिंद’ का खतरनाक संकेत, कहीं देर न हो जाए

Published On: August 24, 2025
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Symptoms of Motiyabind: धुंधली नजर हो सकती है 'मोतियाबिंद' का खतरनाक संकेत, कहीं देर न हो जाए

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Symptoms of Motiyabind: हमारी आंखें… ईश्वर का दिया वो अनमोल तोहफा हैं, जिसकी बदौलत हम इस दुनिया के हर रंग, हर खूबसूरत नजारे को देख पाते हैं. लेकिन जरा सोचिए, अगर इसी खूबसूरत दुनिया पर धीरे-धीरे धुंध की चादर छाने लगे तो? अगर आपको चीजें साफ दिखने के बजाय धुंधली नजर आने लगें, तो यह सिर्फ आंखों की मामूली कमजोरी नहीं हो सकती.

अक्सर हम नजर के धुंधलेपन को चश्मे का नंबर बढ़ने, थकान या बढ़ती उम्र की सामान्य प्रक्रिया मानकर नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन यह लापरवाही आपकी आंखों की रोशनी पर बहुत भारी पड़ सकती है. यह ‘मोतियाबिंद’ (Cataract) जैसी गंभीर और खतरनाक बीमारी का शुरुआती संकेत हो सकता है.

विशेषज्ञ की राय: नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. सुनील कुमार बताते हैं, “मोतियाबिंद आंखों की एक बहुत ही आम, लेकिन गंभीर बीमारी है. इसमें हमारी आंखों का प्राकृतिक लेंस, जो किसी कैमरे के लेंस की तरह काम करता है, धीरे-धीरे अपनी पारदर्शिता खोकर धुंधला या अपारदर्शी हो जाता है. यह ठीक वैसा ही है जैसे किसी साफ खिड़की के शीशे पर धूल जम जाए. अगर समय रहते इसका सही इलाज न कराया जाए, तो यह स्थिति बढ़कर स्थायी अंधेपन (Permanent Blindness) का कारण बन सकती है.”


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मोतियाबिंद के प्रमुख लक्षण (Key Symptoms of Cataract)

मोतियाबिंद चुपके से दस्तक देता है. इसके लक्षण शुरुआत में इतने हल्के होते हैं कि उन पर ध्यान ही नहीं जाता. लेकिन अगर आप इनमें से कोई भी संकेत महसूस कर रहे हैं, तो तुरंत सावधान हो जाएं:

  1. धुंधला या कोहरे जैसा दिखना: यह इसका सबसे आम लक्षण है. आपको ऐसा महसूस हो सकता है जैसे आप किसी धुंधले शीशे या कोहरे के पार से देख रहे हैं.

  2. रंगों का फीका दिखना: दुनिया की सारी चमक फीकी पड़ सकती है. चमकीले रंग भी आपको धुंधले या पीलेपन के साथ नजर आ सकते हैं.

  3. रोशनी का ज्यादा चुभना: रात में गाड़ी चलाते समय सामने से आती गाड़ियों की हेडलाइट्स या घर में लगे बल्ब की रोशनी आंखों में सामान्य से ज्यादा चुभ सकती है. आपको रोशनी के चारों ओर एक गोला (Halo) भी दिख सकता है.

  4. रात में देखने में परेशानी (Night Vision Problems): खासकर कम रोशनी में या रात के समय देखने में काफी मुश्किल होने लगती है.

  5. डबल विजन (दोहरी दृष्टि): एक आंख से देखने पर भी चीजें दो-दो दिखाई दे सकती हैं.

  6. चश्मे का नंबर बार-बार बदलना: अगर आपको हाल ही में बार-बार अपने चश्मे या कॉन्टैक्ट लेंस का नंबर बदलवाना पड़ रहा है, तो यह मोतियाबिंद का संकेत हो सकता है.

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क्यों होता है मोतियाबिंद? (Causes of Cataract)

  • बढ़ती उम्र: यह सबसे बड़ा कारण है. 50-60 वर्ष की आयु के बाद लेंस में प्रोटीन का जमाव शुरू हो जाता है, जिससे वह धुंधला होने लगता है.

  • डायबिटीज (शुगर): डायबिटीज के मरीजों में मोतियाबिंद बहुत जल्दी और कम उम्र में विकसित हो सकता है.

  • आंखों में चोट या सर्जरी: आंख में लगी कोई पुरानी चोट या हुई कोई सर्जरी भी लेंस को प्रभावित कर सकती है.

  • सूरज की हानिकारक किरणें: बिना सुरक्षा के लंबे समय तक धूप और अल्ट्रावॉयलेट (UV) किरणों के संपर्क में रहने से आंखों को नुकसान पहुंचता है.

  • आनुवंशिकी (विरासत): अगर आपके परिवार में किसी को मोतियाबिंद की समस्या रही है, तो आपका जोखिम भी बढ़ जाता ہے.

  • धूम्रपान और शराब का सेवन: ये आदतें आंखों के स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित करती हैं.

मोतियाबिंद का इलाज: अब डरने की नहीं, समझने की जरूरत

  • प्रारंभिक चरण: शुरुआती अवस्था में, डॉक्टर तेज रोशनी वाले चश्मे या दवाओं से कुछ समय के लिए आपकी दृष्टि को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं.

  • अग्रिम चरण (सर्जरी): जब मोतियाबिंद पक जाता है और आपकी रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करने लगता है, तो सर्जरी ही इसका एकमात्र और 100% प्रभावी इलाज है. यह एक छोटी सी, सुरक्षित और लगभग दर्द रहित प्रक्रिया है, जिसमें नेत्र सर्जन धुंधले प्राकृतिक लेंस को हटाकर उसकी जगह एक नया, कृत्रिम और बिल्कुल साफ लेंस (Intraocular Lens) लगा देते हैं. यह सर्जरी आंखों की रोशनी वापस लाने में किसी चमत्कार से कम नहीं है.

मोतियाबिंद से बचाव कैसे करें? (Prevention is Better Than Cure)

  1. संतुलित आहार: अपनी डाइट में विटामिन A, C और E से भरपूर चीजें शामिल करें. हरी पत्तेदार सब्जियां, गाजर, आंवला, खट्टे फल और बादाम खाएं.

  2. सनग्लासेस पहनें: जब भी धूप में बाहर निकलें, तो UV प्रोटेक्शन वाले सनग्लासेस जरूर पहनें.

  3. बुरी आदतों से दूरी: धूम्रपान और शराब का सेवन छोड़ दें या बहुत कम कर दें.

  4. डायबिटीज पर नियंत्रण: अगर आपको शुगर की बीमारी है, तो उसे हमेशा कंट्रोल में रखें.

  5. नियमित आंखों की जांच: 40 की उम्र के बाद साल में कम से कम एक बार अपनी आंखों की पूरी जांच जरूर कराएं.

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याद रखें, आपकी आंखों की रोशनी अनमोल है. धुंधली नजर को सिर्फ एक नंबर मानकर टालना आपके भविष्य को अंधकार में धकेल सकता है. समय पर जांच और सही इलाज से मोतियाबिंद से होने वाले अंधेपन को आसानी से रोका जा सकता

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