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Join NowStock Market Crash : आज 19 मार्च का दिन भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में एक डरावने सपने की तरह शुरू हुआ। जैसे ही बाजार खुला, दलाल स्ट्रीट पर सन्नाटा पसर गया और निवेशकों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ देखी गईं। सेंसेक्स (Sensex) ने देखते ही देखते 1953 अंकों की ऐतिहासिक गोताखोरी लगाई और यह 74751 के स्तर पर जा गिरा। वहीं, निफ्टी (Nifty) भी इस सुनामी से अछूता नहीं रहा और करीब 525 अंकों की भारी गिरावट के साथ कारोबार करता नजर आया। सबसे बुरा हाल बैंकिंग सेक्टर का है, जहाँ बैंक निफ्टी 1400 अंकों से ज्यादा टूट चुका है।
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आखिर क्यों मची है बाजार में यह चीख-पुकार?
बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि इस गिरावट के पीछे कोई एक वजह नहीं, बल्कि कई वैश्विक और घरेलू कारणों का घातक कॉकटेल है।
1. ईरान के मिसाइल हमलों से दहला मिडिल ईस्ट
बाजार में इस गिरावट की सबसे बड़ी और डरावनी वजह ईरान द्वारा कतर और सऊदी अरब के ऊर्जा ठिकानों पर किया गया हमला है। ईरान ने कतर के ‘रास लफ्फान इंडस्ट्रियल सिटी’ और सऊदी अरब की ‘रास तनुरा रिफाइनरी’ को निशाना बनाया है। इतना ही नहीं, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) का ‘हबशान गैस केंद्र’ भी इन हमलों की जद में आया है। युद्ध की इस आहट ने पूरी दुनिया की सप्लाई चेन और एनर्जी सिक्योरिटी को खतरे में डाल दिया है।
2. कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का सीधा असर कच्चे तेल यानी ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) पर पड़ा है। तेल की कीमतें अचानक उछलकर 112-113 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई हैं। भारत जैसे देश के लिए, जो अपनी जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, यह खबर किसी झटके से कम नहीं है। इससे महंगाई बढ़ने और राजकोषीय घाटा गहराने का डर पैदा हो गया है।
3. HDFC बैंक का आंतरिक संकट
घरेलू मोर्चे पर, भारत के सबसे बड़े निजी बैंक, HDFC बैंक से आई एक खबर ने आग में घी डालने का काम किया। बैंक के चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे की खबर मिलते ही निवेशकों का भरोसा डगमगा गया। इसका असर यह हुआ कि HDFC बैंक के शेयर 8 से 9 प्रतिशत तक टूट गए, जिससे पूरे बैंकिंग इंडेक्स पर दबाव बढ़ गया।
4. अमेरिकी फेडरल रिजर्व का सख्त रुख
अमेरिकी फेड रिजर्व ने ब्याज दरों को 3.50-3.75% पर स्थिर रखा है और उनके बयानों से संकेत मिल रहे हैं कि वे आगे भी सख्त रुख अपना सकते हैं। इस फैसले के बाद विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा भारतीय बाजार से पैसा निकालने (बिकवाली) की आशंका बढ़ गई है, जिससे बाजार में लिक्विडिटी का संकट खड़ा हो सकता है।
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वैश्विक बाजारों का हाल: हर तरफ बिछी है ‘लाल चादर’
सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के बाजार इस समय गहरे संकट में हैं। अमेरिकी बाजार (Wall Street) बुधवार को भारी गिरावट के साथ बंद हुए, जहाँ डाउ जोन्स 768 अंक और नैस्डैक करीब 1.46% गिरकर बंद हुआ। एशियाई बाजारों में भी जापान का निक्केई (Nikkei) और दक्षिण कोरिया का कोस्पी (Kospi) 2.5% से ज्यादा टूट चुके हैं।
निवेशकों को अब क्या करना चाहिए?
बाजार में आई इस अचानक गिरावट ने छोटे निवेशकों को डरा दिया है। विशेषज्ञों की सलाह है कि इस समय जल्दबाजी में कोई भी फैसला न लें। बाजार में अस्थिरता (Volatility) चरम पर है, इसलिए जब तक भू-राजनीतिक हालात सामान्य नहीं होते, तब तक ‘वेट एंड वॉच’ की रणनीति अपनाना ही समझदारी होगी।














