Home loan लेना हुआ आसान, छोटे कर्जों पर खत्म हुए ये चार्ज, जानिए नए PSL नियमों का पूरा A-Z

Home loan: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने आम आदमी और छोटे कारोबारियों को बड़ी राहत देते हुए प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग (PSL) यानी प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र को दिए जाने वाले ऋण के नियमों में महत्वपूर्ण बदलावों का ऐलान किया है, जो आने वाली एक तारीख से लागू हो जाएंगे। इन नए दिशानिर्देशों का सीधा मकसद छोटे कर्जदारों को अनावश्यक शुल्क के बोझ से बचाना और यह सुनिश्चित करना है कि बैंकिंग प्रणाली का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे।

RBI ने साफ किया है कि इन संशोधनों का मुख्य लक्ष्य देश में वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) के लक्ष्यों को प्रभावी ढंग से पूरा करना है। केंद्रीय बैंक के नए सर्कुलर के अनुसार, अब बैंक ₹50,000 तक के छोटे लोन पर किसी भी तरह का सेवा शुल्क (Service Charge) या निरीक्षण शुल्क (Inspection Charge) नहीं लगा पाएंगे। यह कदम उन लाखों छोटे उधारकर्ताओं के लिए एक बड़ी राहत है जो अक्सर इन अतिरिक्त शुल्कों के कारण वित्तीय दबाव में आ जाते थे। इसके अलावा, PSL लक्ष्यों का पालन सही ढंग से हो रहा है या नहीं, यह सुनिश्चित करने के लिए बैंकों को अब तिमाही और वार्षिक आधार पर दिए गए लोन का विस्तृत डेटा RBI को सौंपना होगा।

आखिर यह प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग (PSL) क्या है?

प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग (PSL) भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा बनाई गई एक अनिवार्य नीति है। इस नीति के तहत, देश के सभी बैंकों को अपने कुल ऋण का एक निश्चित हिस्सा कुछ विशेष क्षेत्रों को देना ही होता है। इन क्षेत्रों में मुख्य रूप से कृषि, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSMEs), शिक्षा, एक्सपोर्ट क्रेडिट और कमजोर वर्ग शामिल हैं। इस नीति का मूल उद्देश्य समाज के उन वर्गों, जैसे छोटे किसानों, मजदूरों, छात्रों और छोटे उद्यमियों (small entrepreneurs) तक सस्ती दरों पर कर्ज पहुंचाना है, जिन तक बैंकिंग सुविधाएं आसानी से नहीं पहुंच पातीं। यह नीति बैंकों को उन क्षेत्रों में भी निवेश करने के लिए बाध्य करती है, जिन्हें वे अक्सर कम लाभ या अधिक जोखिम वाला मानकर नजरअंदाज कर देते हैं।

घर खरीदने का सपना होगा आसान: होम लोन के लिए बनी तीन नई श्रेणियां

RBI ने आम आदमी के “अपने घर” के सपने को साकार करने में मदद करने के लिए PSL के तहत होम लोन की सीमा (Home Loan Limit) में भी बढ़ोतरी की है। अब होम लोन के लिए तीन अलग-अलग श्रेणियां बना दी गई हैं:

  1. 50 लाख से अधिक आबादी वाले शहर (मेट्रो सिटी): इन शहरों में अब ₹50 लाख तक का होम लोन PSL के तहत गिना जाएगा। पहले यह सीमा मात्र ₹35 लाख थी। हालांकि, इसके लिए मकान की कुल कीमत ₹63 लाख से ज़्यादा नहीं होनी चाहिए।
  2. 10 लाख से 50 लाख आबादी वाले शहर: इन शहरों में अब ₹45 लाख तक का होम लोन पीएसएल के दायरे में आएगा।
  3. 10 लाख से कम आबादी वाले क्षेत्र: छोटे शहरों और कस्बों में यह सीमा ₹35 लाख तक कर दी गई है।

इसके अतिरिक्त, व्यक्तिगत परिवारों के लिए मरम्मत या विस्तार हेतु प्रति उधारकर्ता ₹10 लाख की ऋण सीमा भी तय की गई है।

गोल्ड लोन पर RBI का बड़ा कदम

भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) ने एक और बड़ा स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा है कि बैंक अब NBFCs (गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों) से खरीदे गए सोने के आभूषणों पर दिए गए लोन को प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (PSL) का हिस्सा नहीं मान सकते। इसका मतलब यह है कि इस तरह के लोन अब बैंक के PSL लक्ष्यों में नहीं गिने जाएंगे। इस नए नियम का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि PSL के लिए निर्धारित फंड केवल उन क्षेत्रों में ही जाए, जिन्हें इसकी वास्तव में जरूरत है, जैसे कि कृषि, छोटे व्यवसाय, और शिक्षा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि असली जरूरतमंदों तक वित्तीय सहायता पहुंच सके, न कि बैंक आसानी से अपने लक्ष्यों को पूरा करने के लिए गोल्ड लोन का सहारा लें।

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