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Join NowBrij Bhushan Sharan Singh: भारत में आरक्षण (Reservation) एक ऐसा मुद्दा है जिस पर बहस कभी खत्म नहीं होती। इसी बीच, कैसरगंज के पूर्व सांसद और बीजेपी के कद्दावर नेता बृज भूषण शरण सिंह (Brij Bhushan Sharan Singh) ने आरक्षण को लेकर एक ऐसा बयान दिया है, जिसने सियासी गलियारों में खलबली मचा दी है। अपने बयानों के लिए मशहूर बृज भूषण ने इस बार सीधे सवर्णों के स्वाभिमान और पिछड़ों के हक की बात करते हुए एक नई लकीर खींच दी है।
“सवर्ण रिक्शा चलाएगा, पर भीख नहीं मांगेगा”
बृज भूषण शरण सिंह ने बेहद भावनात्मक अंदाज में सवर्णों (Savarnas) की मौजूदा स्थिति पर बात की। उन्होंने कहा, “यह मेरा वादा है कि सवर्ण समाज का व्यक्ति रिक्शा चला लेगा, मजदूरी कर लेगा, लेकिन वह कभी आरक्षण की मांग नहीं करेगा।” उन्होंने आगे कहा कि एक समय था जब 300 साल तक शिक्षा पर सवर्णों का राज था, लेकिन आज स्थितियां बदल चुकी हैं। उनके मुताबिक, सवर्ण समाज ने अपनी मेहनत से जीना सीख लिया है, चाहे वह मजदूरी ही क्यों न हो।
अयोध्या से दिल्ली तक: “मजदूर बन गया है ठाकुर-ब्राह्मण”
पूर्व सांसद ने उदाहरण देते हुए कहा कि आज आप अयोध्या की सड़कों पर रिक्शा चलाते हुए या बहराइच की गलियों में मजदूरी करते हुए सवर्णों को देख सकते हैं। उन्होंने कहा, “हम ठाकुर और ब्राह्मण आज गौशालाओं में काम कर रहे हैं, आजादपुर मंडी में सब्जी बेच रहे हैं। कांशीराम जी का सपना था कि अगड़ी जातियों को नीचे लाया जाए, आज उनका वह सपना पूरा हो गया है। हम टॉप से नीचे आ गए हैं और अब सफाई कर्मचारी या रिक्शा चालक के रूप में मिल रहे हैं।”
पिछड़ों को दी चेतावनी: “नकली पिछड़ों से बचो”
बृज भूषण शरण सिंह का सबसे बड़ा हमला उन जातियों पर था जो ‘नकली’ तरीके से पिछड़ी जातियों (OBC) की सूची में शामिल हो गई हैं। उन्होंने पिछड़े वर्ग के लोगों को संबोधित करते हुए कहा, “पिछड़ी जाति के लोगों, आपका बैर ब्राह्मण, क्षत्रिय या बनियों से नहीं है। आपका असली हक तो वो ‘नकली पिछड़े’ मार रहे हैं जो अगड़ी जाति के होकर भी आपकी लिस्ट में घुस गए हैं।”
उन्होंने दावा किया कि पिछले 75 सालों में असली पिछड़ों को वह नहीं मिला जिसके वे हकदार थे, क्योंकि आरक्षण का लाभ उन लोगों ने उठा लिया जो अपनी सुविधा के अनुसार जातियों का नाम बदलकर पिछड़े बन गए हैं।
अगले 100 साल तक नहीं चाहिए आरक्षण!
एक बड़ा संकल्प लेते हुए बृज भूषण ने कहा कि सवर्ण समाज आने वाले 100 सालों तक भी आरक्षण की मांग नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि सवर्णों को परेशान करना बंद किया जाना चाहिए क्योंकि वे अब किसी का हक नहीं मार रहे हैं। उनके अनुसार, “आपका हक तो आपकी ही बिरादरी के वो लोग मार रहे हैं जो टॉप पोजीशन (IAS, IPS) पर बैठे हैं। नौकरियों की संख्या सीमित है और असली फायदा ऊपर बैठे लोग ही ले जा रहे हैं।”
एक नई बहस की शुरुआत
बृज भूषण शरण सिंह का यह बयान न केवल सवर्णों की ‘कथित’ बदहाली को उजागर करता है, बल्कि पिछड़ों के भीतर मौजूद वर्गीकरण की समस्या पर भी चोट करता है। क्या वाकई आरक्षण का लाभ केवल मलाईदार परत (Creamy Layer) को मिल रहा है? और क्या सवर्ण समाज वाकई आरक्षण से इतनी दूरी बना चुका है? ये सवाल अब यूपी की राजनीति में जोर-शोर से गूंजेंगे।










