Women’s Reservation Bill Failed: संसद में ‘नारी शक्ति’ के साथ महाधोखा? बहुमत के अभाव में बिल फेल

Women’s Reservation Bill Failed: भारत की राजनीति में आज एक ऐसा मोड़ आया है जिसने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है। दशकों से प्रतीक्षित ‘महिला आरक्षण बिल’ (Women’s Reservation Bill), जिसे ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के नाम से पेश किया गया था, लोकसभा में जरूरी बहुमत न मिलने के कारण गिर गया है। संविधान संशोधन के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत की कमी ने इस ऐतिहासिक बदलाव पर फिलहाल पूर्णविराम लगा दिया है। इस घटनाक्रम के बाद देश के दो बड़े दिग्गजों—मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और विपक्ष के नेता राहुल गांधी—के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है।

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सीएम योगी का तीखा हमला: “इतिहास का काला अध्याय”
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटना पर कड़ी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने इसे भारतीय लोकतंत्र के लिए एक ‘काला अध्याय’ करार दिया। योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर कहा कि विपक्ष द्वारा इस बिल को रोकना ‘भारत माता’ के सम्मान पर सीधा आघात है।

उन्होंने तीखे लहजे में कहा, “यह देश की समूची मातृशक्ति के साथ एक बड़ा धोखा है। कांग्रेस के नेतृत्व वाले इंडी (I.N.D.I.A.) गठबंधन ने अपनी नारी विरोधी मानसिकता को दुनिया के सामने उजागर कर दिया है।” योगी ने चेतावनी देते हुए कहा कि देश की नारी इस छल और अन्याय को कभी नहीं भूलेगी और सही समय आने पर इसका करारा जवाब देगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि पीएम मोदी के नेतृत्व में एनडीए (NDA) गठबंधन महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए अपने प्रयास जारी रखेगा।

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लोकसभा अध्यक्ष का तकनीकी स्पष्टीकरण: क्यों गिरा बिल?
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही के दौरान बताया कि मत विभाजन (Voting) के समय बिल के पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े। हालांकि बिल को समर्थन देने वालों की संख्या अधिक थी, लेकिन संविधान संशोधन के नियमों के तहत इसे पारित करने के लिए कुल सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता थी, जो पूरी नहीं हो सकी। अध्यक्ष ने साफ किया कि विचार करने के शुरुआती स्तर पर ही बिल गिर जाने के कारण अब इस पर आगे की कोई कार्यवाही संभव नहीं है।

राहुल गांधी की अलग दलील: “यह संविधान पर आक्रमण था”
दूसरी ओर, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस बिल के गिरने को एक जीत के रूप में पेश किया है। राहुल गांधी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि यह बिल असल में महिला आरक्षण के लिए नहीं था, बल्कि यह भारत की राजनीतिक संरचना को बदलने की एक सोची-समझी साजिश थी।

राहुल गांधी ने कहा, “यह बिल संविधान पर एक सीधा हमला था और हमने इसे हराकर संविधान की रक्षा की है। हमने इसे इसलिए रोका क्योंकि यह महिला आरक्षण के नाम पर देश के राजनीतिक ढांचे को बदलने का एक तरीका था।” राहुल के इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है कि क्या विपक्ष वास्तव में आरक्षण के खिलाफ है या उसे बिल की तकनीकी बारीकियों से आपत्ति थी।

क्या होगा आगे?
महिला आरक्षण बिल का गिरना न केवल सत्ता पक्ष के लिए एक बड़ा झटका है, बल्कि यह आगामी चुनावों में एक बड़ा मुद्दा बनने जा रहा है। जहाँ भाजपा इसे ‘नारी शक्ति के अपमान’ के रूप में पेश करेगी, वहीं विपक्ष इसे ‘संविधान बचाओ’ की अपनी मुहीम से जोड़ेगा। फिलहाल, भारत की करोड़ों महिलाएं उस दिन का इंतजार कर रही हैं जब संसद में उनकी आवाज़ को 33% की कानूनी गारंटी मिलेगी।

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