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Join NowEMI management tips: आज की इस भागदौड़ भरी जिंदगी में अपनी जरूरतों और सपनों को पूरा करने के लिए लोन लेना एक आम बात हो गई है। चाहे नया घर हो, चमचमाती कार हो या फिर बच्चों की पढ़ाई बैंक का दरवाजा खटखटाना हमें सबसे आसान रास्ता लगता है। शुरुआत में सब कुछ ठीक रहता है, किश्तें (EMIs) भी समय पर जाती हैं, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता है और घर के अन्य खर्च बढ़ते हैं, वही किश्तें किसी भारी बोझ जैसी लगने लगती हैं।
क्रेडिट कार्ड का बकाया, पर्सनल लोन और होम लोन की ईएमआई मिलकर धीरे-धीरे हमारे मासिक बजट को बिगाड़ देती हैं। क्या आप भी हर महीने की 1 से 10 तारीख के बीच इसी मानसिक तनाव से गुजरते हैं? अगर हाँ, तो यकीन मानिए आप अकेले नहीं हैं। लेकिन इस ‘कर्ज के जाल’ से निकलने का रास्ता उतना भी मुश्किल नहीं है जितना दिखता है। आइए जानते हैं कुछ ऐसे प्रैक्टिकल तरीके, जो आपको फिर से आर्थिक रूप से आजाद बना सकते हैं।
1. नए कर्ज को कहें ‘ना’ और खर्चों पर लगाएं लगाम
अक्सर लोग एक गलती सबसे ज्यादा करते हैं—पुराने लोन की किश्त भरने के लिए एक और नया लोन ले लेते हैं। यह आग बुझाने के लिए उसमें पेट्रोल डालने जैसा है। अगर आप पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है, तो सबसे पहले अपनी क्रेडिट लिमिट और नए लोन लेने की आदत पर पूरी तरह रोक लगा दें।
अपने मासिक खर्चों का बारीकी से विश्लेषण करें। क्या वह बाहर का खाना या बिना सोचे-समझे की गई ऑनलाइन शॉपिंग वाकई जरूरी है? इस समय आपका लक्ष्य पैसा बचाना और उसे सबसे ज्यादा ब्याज वाले लोन (जैसे क्रेडिट कार्ड का बकाया) को चुकाने में लगाना होना चाहिए। याद रखिए, आज का छोटा सा त्याग कल की बड़ी मानसिक शांति बनेगा।
2. ‘स्नोबॉल इफेक्ट’ अपनाएं: छोटे लोन को पहले खत्म करें
मनोवैज्ञानिक रूप से जब हम कोई काम पूरा करते हैं, तो हमें खुशी मिलती है। यही नियम कर्ज पर भी लागू होता है। अगर आपके ऊपर कई छोटे-बड़े लोन चल रहे हैं, तो सबसे पहले छोटे लोन की राशि को एकमुश्त चुकाकर उसे बंद करने की कोशिश करें।
जैसे ही एक छोटा लोन खत्म होगा, आपकी जेब में कुछ अतिरिक्त पैसे बचेंगे और आपका मानसिक बोझ भी कम होगा। इसके बाद उस बचे हुए पैसे को अगले बड़े लोन की ईएमआई में जोड़ दें। इसके अलावा, आप अपने बैंक से सीधे बात कर सकते हैं। कई बार बैंक ब्याज दर कम करने या ‘वन-टाइम सेटलमेंट’ का विकल्प देते हैं, जिससे आप एक बड़ी रकम बचाने में सफल हो सकते हैं।
3. बचत की शक्ति को पहचानें: इमरजेंसी फंड है जरूरी
कर्ज से मुक्ति का सबसे बड़ा हथियार है—बचत (Savings)। अपनी आमदनी का एक निश्चित हिस्सा (चाहे वह छोटा ही क्यों न हो) हर महीने अलग निकालें। इस जमा किए हुए पैसे का इस्तेमाल लोन के ‘प्रिंसिपल अमाउंट’ को कम करने के लिए करें।
जब आप लोन की मूल राशि में कुछ हिस्सा एकमुश्त भरते हैं, तो आपकी ईएमआई का बोझ अपने आप कम हो जाता है। बचत की यह आदत न केवल आपको कर्ज से बाहर निकालेगी, बल्कि भविष्य में किसी भी वित्तीय संकट या ‘बुरे वक्त’ में आपकी सबसे बड़ी ढाल बनेगी।
आर्थिक आजादी का रास्ता अनुशासन से होकर गुजरता है। कर्ज लेना कोई गुनाह नहीं है, लेकिन कर्ज के बोझ तले अपनी मुस्कान खो देना गलत है। आज ही अपने बजट को डायरी में लिखें, गैर-जरूरी खर्चों को काटें और एक-एक करके किश्तों के इस बोझ को उतार फेंके। याद रखें, आपकी मेहनत की कमाई पर पहला हक आपका और आपके परिवार का है, बैंक का नहीं….
















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