Hard Cover vs Soft Case : क्या आपका पसंदीदा फोन कवर ही बन सकता है उसकी ‘मौत’ की वजह? हार्ड vs सॉफ्ट केस का वो सच जो दुकानदार भी नहीं बताते

Published On: January 13, 2026
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Hard Cover vs Soft Case : क्या आपका पसंदीदा फोन कवर ही बन सकता है उसकी 'मौत' की वजह? हार्ड vs सॉफ्ट केस का वो सच जो दुकानदार भी नहीं बताते

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Hard Cover vs Soft Case : आज के डिजिटल युग में स्मार्टफोन महज एक गैजेट नहीं, बल्कि हमारी ज़िंदगी का एक हिस्सा बन चुका है। बैंकिंग से लेकर यादों को सहेजने तक, सब कुछ इसी छोटी सी मशीन में कैद है। ऐसे में जब हम 20, 50 या 1 लाख रुपये का फोन खरीदते हैं, तो सबसे पहला ख्याल उसकी सुरक्षा का आता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस कवर को आप अपने फोन की ‘ढाल’ समझकर खरीद रहे हैं, वही उसे अंदर से नुकसान पहुँचा सकता है?

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अक्सर लोग मोबाइल की दुकान पर जाकर सिर्फ डिजाइन देखकर कवर चुन लेते हैं, लेकिन असली जंग हार्ड कवर (Hard Cover) और सॉफ्ट केस (Soft Case) के बीच होती है। आइए जानते हैं कि आपके कीमती फोन के लिए कौन सा कवर ‘बॉडीगार्ड’ बनेगा और कौन सा सिर्फ एक ‘दिखावा’।

1. हार्ड कवर: स्टाइल का सुल्तान या सिर्फ एक दिखावा?

हार्ड कवर आमतौर पर पॉलीकार्बोनेट या सख्त प्लास्टिक से बने होते हैं। ये कवर उन लोगों की पहली पसंद होते हैं जिन्हें अपने फोन का स्लिम और प्रीमियम लुक बरकरार रखना पसंद है।

  • खूबियां: ये फोन को खरोंच (Scratches) और धूल से बेहतरीन सुरक्षा देते हैं। अगर आप अपना फोन टेबल या बेड पर रखते हैं, तो हार्ड कवर फोन की बॉडी को रगड़ लगने से बचाता है। इसके अलावा, इन पर प्रिंटिंग बहुत शानदार होती है, जो आपके फोन को एक स्टाइलिश लुक देती है।

  • कमियां: यहाँ एक बड़ा ट्विस्ट है! हार्ड कवर दिखने में तो मजबूत होते हैं, लेकिन ये ‘लचीले’ नहीं होते। अगर आपका फोन ऊंचाई से कंक्रीट पर गिरता है, तो हार्ड केस खुद तो चटक ही जाता है, साथ ही गिरने के झटके (Shock) को सीधे फोन की बॉडी और इंटरनल पार्ट्स तक पहुँचा देता है। यानी, बाहर से कवर ठीक दिख सकता है, लेकिन अंदर फोन का मदरबोर्ड डैमेज हो सकता है।

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2. सॉफ्ट केस: शॉक एब्जॉर्बर जो चुपचाप काम करता है

सॉफ्ट केस या सिलिकॉन कवर (TPU) आजकल सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं। ये लचीले होते हैं और फोन पर आसानी से चढ़ जाते हैं।

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  • सुरक्षा का गणित: सॉफ्ट केस की सबसे बड़ी ताकत है इसकी ‘झटका सोखने’ (Shock Absorption) की क्षमता। जब फोन जमीन पर गिरता है, तो सॉफ्ट केस एक स्प्रिंग की तरह काम करता है और गिरने के असर को खुद सोख लेता है। इससे फोन की स्क्रीन और कैमरा लेंस के टूटने का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है।

  • दिक्कत कहाँ है? सॉफ्ट केस की सबसे बड़ी समस्या इनका ‘पीलापन’ है। कुछ समय बाद पारदर्शी (Transparent) सॉफ्ट केस गंदे और पीले दिखने लगते हैं। साथ ही, बहुत ज्यादा गर्मी होने पर ये ढीले भी पड़ सकते हैं।

प्रोटेक्शन के मामले में असली विजेता कौन?

अगर हम सिर्फ और सिर्फ ‘सुरक्षा’ की बात करें, तो सॉफ्ट केस (TPU/Silicone) यहाँ बाजी मार ले जाता है। विज्ञान के नजरिए से देखें तो झटके को सोखना, उसे रोकने से ज्यादा कारगर होता है।

आपको कौन सा चुनना चाहिए?

  • सॉफ्ट केस चुनें अगर: आपके हाथ से फोन बार-बार गिरता है, घर में छोटे बच्चे हैं, या आप ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर ज्यादा ट्रैवल करते हैं। यह आपके हजारों रुपये के स्क्रीन डैमेज को बचा सकता है।

  • हार्ड कवर चुनें अगर: आप फोन को बहुत संभालकर रखते हैं, आपको फोन का स्लिम लुक पसंद है और आप चाहते हैं कि फोन का पिछला हिस्सा स्क्रैच-फ्री रहे।

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एक जरूरी सलाह: हाइब्रिड कवर (Hybrid Case)

अगर आप सुरक्षा और स्टाइल दोनों चाहते हैं, तो बाजार में अब ‘हाइब्रिड केस’ भी उपलब्ध हैं। इनमें किनारों पर सॉफ्ट TPU होता है और पीछे की तरफ हार्ड प्लास्टिक। यह आपके स्मार्टफोन के लिए ‘बुलेटप्रूफ जैकेट’ की तरह काम करता है। कवर चुनते समय सिर्फ उसकी खूबसूरती न देखें, बल्कि अपनी लाइफस्टाइल को देखें। याद रखिए, एक गलत कवर का चुनाव आपके हजारों रुपये के स्मार्टफोन को कबाड़ में बदल सकता है। अगली बार कवर खरीदते वक्त ‘सॉफ्ट’ या ‘हार्ड’ के इस गणित को जरूर याद रखें…..


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