Prayagraj Magh Mela : 40 दिनों की कठिन तपस्या और कल्पवास का वो रहस्य जिसे जानकर आप भी कहेंगे ‘हर हर गंगे’

Published On: January 3, 2026
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Prayagraj Magh Mela : 40 दिनों की कठिन तपस्या और कल्पवास का वो रहस्य जिसे जानकर आप भी कहेंगे 'हर हर गंगे'

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Prayagraj Magh Mela : साल 2026 की शुरुआत के साथ ही पूरा देश भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो गया है। आज यानी 3 जनवरी 2026 को पौष पूर्णिमा के पावन अवसर पर उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में विश्व प्रसिद्ध ‘माघ मेला 2026’ का शंखनाद हो गया है। ठिठुरती ठंड के बीच गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पावन संगम तट पर लाखों श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई और अपने नए साल की शुरुआत ईश्वर के सानिध्य में की।

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ज्योतिष शास्त्र की मानें तो साल 2026 को ‘सूर्य का वर्ष’ माना जा रहा है। ऐसे में माघ मेले का महत्व और भी बढ़ जाता है, क्योंकि सूर्य देव की आराधना और तप के लिए यह समय सर्वश्रेष्ठ बताया गया है।

संगम तट पर ‘मिनी कुंभ’ का नजारा

भले ही यह पूर्ण कुंभ नहीं है, लेकिन प्रयागराज की रेती पर बसा यह अस्थाई तंबुओं का शहर किसी ‘मिनी कुंभ’ से कम नहीं लग रहा। देश के कोने-कोने से आए संत, नागा साधु और कल्पवासियों के पहुंचने से संगम तट ‘हर-हर गंगे’ के जयकारों से गूंज उठा है। आज तड़के ब्रह्ममुहूर्त से ही मुख्य स्नान घाटों पर तिल रखने की जगह नहीं बची है।

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क्या है कल्पवास का वो रहस्य? जिसे सुनकर रूह कांप जाए

माघ मेले की सबसे अनूठी और कठिन परंपरा है— ‘कल्पवास’। आज से हजारों श्रद्धालु संगम की रेती पर 40 दिनों के लिए अपना घर-बार छोड़कर झोपड़ियों में निवास करेंगे। लेकिन कल्पवास कोई साधारण प्रवास नहीं है, यह एक कठोर साधना है।

  • एक समय भोजन: कल्पवासी पूरे दिन में केवल एक बार सात्विक भोजन करते हैं।

  • कठोर अनुशासन: भूमि पर शयन, ब्रह्ममुहूर्त में गंगा स्नान और दिन भर भजन-कीर्तन।

  • त्याग की पराकाष्ठा: क्रोध, अहंकार, और भौतिक सुख-सुविधाओं का पूरी तरह त्याग।

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शास्त्रों में मान्यता है कि एक महीने का कल्पवास हजारों वर्षों की तपस्या के बराबर फल देता है और मनुष्य को जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति (मोक्ष) दिलाता है।

माघ मेला 2026: प्रमुख स्नान तिथियां (जरूर नोट करें)

अगर आप भी संगम स्नान की योजना बना रहे हैं, तो इन प्रमुख तारीखों का विशेष ध्यान रखें:

  • 3 जनवरी – पौष पूर्णिमा: आज से कल्पवास और मेले की शुरुआत।

  • 14 जनवरी – मकर संक्रांति: जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे, तब होगा बड़ा स्नान।

  • 21 जनवरी – मौनी अमावस्या: इसे ‘राजयोग स्नान’ कहा जाता है, इस दिन सबसे अधिक भीड़ उमड़ती है।

  • 30 जनवरी – बसंत पंचमी: मां सरस्वती के पूजन और पीले वस्त्रों के संगम का दिन।

  • 5 फरवरी – माघी पूर्णिमा: इस दिन स्नान का अपना ही विशेष फल है।

  • 15 फरवरी – महाशिवरात्रि: मेले का समापन और अंतिम शाही स्नान।

क्यों खास है 2026 का माघ मेला?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माघ मास के दौरान सभी देवी-देवता प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रयागराज में निवास करते हैं। पौराणिक कथाओं में उल्लेख है कि इस समय संगम का जल ‘अमृत’ के समान हो जाता है। 15 फरवरी को महाशिवरात्रि के साथ इस मेले का समापन होगा, जो अपने आप में एक दुर्लभ संयोग है।

प्रशासन ने भी श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए कड़े इंतजाम किए हैं। जल पुलिस, ड्रोन निगरानी और सुरक्षा बलों की तैनाती के साथ-साथ कल्पवासियों के लिए विशेष चिकित्सा शिविर भी लगाए गए हैं।


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