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Smartphone radiation effects: क्या आप भी सिरहाने रखते हैं फोन? जानिए ये छोटी सी आदत कैसे कर रही है आपको बीमार

Smartphone radiation effects: क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो रात को सोने से पहले इंस्टाग्राम पर रील्स देखते हैं, वॉट्सऐप चेक करते हैं और नींद आने पर फोन को अ

Malvika

Malvika (वरिष्ठ संवाददाता)

27 अप्रैल 2026

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Smartphone radiation effects: क्या आप भी सिरहाने रखते हैं फोन? जानिए ये छोटी सी आदत कैसे कर रही है आपको बीमार

फोटो: ग्राउंड रिपोर्ट - विशेष संवाददाता (दैनिक एक्सप्रेस)

Smartphone radiation effects: क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो रात को सोने से पहले इंस्टाग्राम पर रील्स देखते हैं, वॉट्सऐप चेक करते हैं और नींद आने पर फोन को अपने सिरहाने या तकिए के नीचे रखकर सो जाते हैं? अगर आपका जवाब ‘हां’ है, तो आप अकेले नहीं हैं। आज के समय में यह हम में से ज़्यादातर लोगों की आदत बन चुकी है।

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हमें लगता है कि सुबह का अलार्म बजने पर फोन आसानी से मिल जाएगा या आधी रात को कोई ज़रूरी मैसेज आया तो हम तुरंत देख लेंगे। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आपकी यह छोटी सी आदत आपकी सेहत के लिए कितनी खतरनाक साबित हो सकती है? आइए, आज बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं कि सिरहाने फोन रखकर सोने से आपकी नींद, दिमाग और शरीर पर क्या असर पड़ता है।

आखिर क्या है फोन को सिरहाने रखकर सोने का विज्ञान?

हमारे शरीर में एक ‘स्लीप हार्मोन’ होता है, जिसे ‘मेलाटोनिन’ (Melatonin) कहते हैं। जब रात में अंधेरा होता है, तो हमारा दिमाग इस हार्मोन को बनाता है, जिससे हमें अच्छी नींद आती है।

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लेकिन हमारे मोबाइल की स्क्रीन से एक खास तरह की नीली रोशनी (Blue Light) निकलती है। जब हम रात में फोन देखते हैं या फोन हमारे सिर के पास बार-बार ब्लिंक करता है, तो हमारे दिमाग को लगता है कि अभी भी दिन का समय है। इस कन्फ्यूजन की वजह से दिमाग मेलाटोनिन हार्मोन बनाना कम कर देता है और हमारी नींद उड़ जाती है।

सेहत को कैसे नुकसान पहुंचाता है सिरहाने रखा फोन?

1. नींद की क्वालिटी का खराब होना:
भले ही आप फोन रखकर सो जाएं, लेकिन रात भर आने वाले नोटिफिकेशंस की आवाज़ या वाइब्रेशन आपके दिमाग को ‘अलर्ट मोड’ पर रखता है। इसकी वजह से आप गहरी नींद (Deep Sleep) में नहीं जा पाते। यही कारण है कि 7-8 घंटे सोने के बाद भी अगली सुबह आप खुद को थका हुआ और चिड़चिड़ा महसूस करते हैं।

2. रेडिएशन का खतरा (Radiation Risk):
मोबाइल फोन सिग्नल्स पकड़ने के लिए इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन (RF energy) छोड़ते हैं। हालांकि, वैज्ञानिक अभी भी इस पर रिसर्च कर रहे हैं कि यह कैंसर जैसी बीमारियों का कारण बन सकता है या नहीं, लेकिन दुनिया भर के हेल्थ एक्सपर्ट्स यही मानते हैं कि फोन को सीधे अपने सिर के पास रखने से रेडिएशन का असर हमारे दिमाग पर पड़ सकता है। इससे सिरदर्द और फोकस न कर पाने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

3. मानसिक तनाव और एंग्जाइटी:
तकिए के नीचे फोन होने का मतलब है कि आप पूरी रात दुनिया से जुड़े हुए हैं। रात को अचानक नींद खुलने पर फोन चेक करने की आदत से मानसिक तनाव (Stress) और एंग्जाइटी बढ़ती है। दिमाग को आराम करने का जो समय मिलना चाहिए, वह उसे नहीं मिल पाता।

जानलेवा भी हो सकती है ये आदत (ओवरहीटिंग का खतरा)

रेडिएशन और नींद खराब होने के अलावा एक बहुत बड़ा ‘फिजिकल’ खतरा भी है। कई लोग रात को फोन चार्जिंग पर लगाकर उसे बिस्तर पर या तकिए के नीचे रख देते हैं।
फोन इस्तेमाल करते वक्त या चार्ज होते वक्त गर्म होता है। जब आप उसे तकिए के नीचे दबा देते हैं, तो फोन की गर्मी बाहर नहीं निकल पाती। इससे बैटरी के ओवरहीट (Overheat) होने और यहां तक कि फोन में ब्लास्ट होने या आग लगने का बड़ा खतरा बना रहता है। ऐसी कई खबरें आपने न्यूज़ में भी पढ़ी होंगी।

इस बुरी आदत से कैसे बचें? (कुछ आसान उपाय)

अगर आप इस खतरनाक आदत को बदलना चाहते हैं, तो इन छोटे-छोटे और आसान टिप्स को आज ही अपनी रूटीन में शामिल करें:

  • दूरी बनाए रखें: सोते समय फोन को कम से कम 3 से 4 फीट की दूरी पर या कमरे की किसी टेबल पर रखें।

  • एयरप्लेन मोड (Airplane Mode) का इस्तेमाल: अगर अलार्म के लिए फोन पास रखना मजबूरी है, तो उसका इंटरनेट (Wi-Fi/Data) बंद कर दें या उसे एयरप्लेन मोड पर डाल दें। इससे रेडिएशन और नोटिफिकेशंस दोनों कम हो जाएंगे।

  • स्क्रीन टाइम रूल: कोशिश करें कि सोने से कम से कम 30 मिनट पहले आप फोन, टीवी या लैपटॉप की स्क्रीन से दूर हो जाएं।

  • किताब पढ़ने की आदत: सोने से पहले फोन चलाने के बजाय कोई अच्छी किताब (Book) पढ़ने की आदत डालें। इससे नींद भी अच्छी आएगी और दिमाग भी शांत रहेगा।

दोस्तों, फोन हमारी सुविधा के लिए बनाया गया है, हमारी सेहत खराब करने के लिए नहीं। अच्छी नींद हमारे शरीर की सबसे बड़ी ज़रूरत है। इसलिए आज रात से ही अपने प्यारे स्मार्टफोन को अपने बिस्तर से थोड़ा दूर रखिए और एक सुकून भरी, गहरी नींद का आनंद लीजिए। बदलाव छोटी सी आदत से शुरू होता है..


“छात्रों की स्वास्थ्य और सुरक्षा के साथ कोई समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अनियमितताओं पर कठोरतम प्रशासनिक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।”

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